बालाघाट जिले के पशुपालन एवं डेयरी विभाग के उपसंचालक डॉ. अरुण कुमार नेमा ने हाल ही में बिरसा विकासखंड का दौरा कर विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा की। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य शासन की विभिन्न योजनाओं की प्रगति को परखना और पशुपालकों को आधुनिक डेयरी व्यवसाय के प्रति प्रोत्साहित करना था। डॉ. नेमा ने स्पष्ट किया कि विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण करना अनिवार्य है।

प्रगतिशील पशुपालकों से संवाद और निरीक्षण

बिरसा विकासखंड के अपने भ्रमण के दौरान, उपसंचालक डॉ. नेमा ने प्रगतिशील पशुपालकों से सीधा संवाद स्थापित किया। उन्होंने पशुपालकों को विभाग की लाभकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाने और पारंपरिक पशुपालन के स्थान पर आधुनिक डेयरी व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके।

  • दुग्ध संकलन केंद्र का दौरा: डॉ. नेमा ने प्रगतिशील पशुपालक श्री योगेश ठाकरे द्वारा संचालित दुग्ध संकलन केंद्र और पशु आहार केंद्र का निरीक्षण किया।

  • योजनाओं का अवलोकन: उन्होंने 'डॉ. भीमराव आंबेडकर कामधेनु योजना' के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के लिए प्रस्तावित स्थलों का भी अवलोकन किया और इस दिशा में आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।

विभागीय समीक्षा बैठक और लक्ष्य निर्धारण

भ्रमण के उपरांत, विकासखंड बिरसा के विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों, मैत्री कार्यकर्ताओं और गौसेवकों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में डॉ. नेमा ने विभाग द्वारा संचालित प्रत्येक योजना की वर्तमान प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। जिन क्षेत्रों में विभाग अपेक्षित उपलब्धि प्राप्त नहीं कर सका था, वहां के अधिकारियों और कर्मचारियों को काम में तेजी लाने और लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के कड़े निर्देश दिए गए।

नस्ल सुधार और उत्पादन पर विशेष जोर

समीक्षा बैठक के दौरान उपसंचालक ने 'क्षीर धारा ग्राम योजना' पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि:

  • चयनित गांवों में प्रजनन योग्य मादा पशुओं का अधिक से अधिक कृत्रिम गर्भाधान सुनिश्चित किया जाए।

  • सेक्स-सॉर्टेड सीमेन (Sex-Sorted Semen) के उपयोग को बढ़ावा देकर नस्ल सुधार कार्यक्रम को गति प्रदान की जाए।

  • डॉ. नेमा ने रेखांकित किया कि इन वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने से न केवल दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, बल्कि पशुपालकों की आय में भी उल्लेखनीय इजाफा होगा।

जनजातीय समुदायों के लिए संचालित योजनाएं

डॉ. नेमा ने विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के लिए चलाई जा रही योजनाओं की प्रगति का भी जायजा लिया। इसमें 'धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान' और 'मुख्यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना' की समीक्षा मुख्य रही। उन्होंने विकासखंड के सभी पशु चिकित्सा अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि इन योजनाओं के अंतर्गत तय किए गए लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति सुनिश्चित की जाए।

अधिकारियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. धनवान शाह, डॉ. राकेश शील, डॉ. राजेश कुमार शेंडे और डॉ. खेमचन्द्र भालेकर सहित विभाग के अन्य कर्मचारी, मैत्री कार्यकर्ता और गौसेवक उपस्थित रहे। यह दौरा पशुपालन विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता लाने और जमीनी स्तर तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

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