बालाघाट जिले में महिला और बाल सुरक्षा को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। कलेक्टर श्री मृणाल मीना की अध्यक्षता में आयोजित इस संयुक्त बैठक में जिला समन्वय समिति, शक्ति सदन, जिला स्तरीय टास्क फोर्स और जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, उनके पुनर्वास और सुरक्षा से जुड़े तंत्र को अधिक प्रभावी बनाना था।

महिला सुरक्षा और शक्ति सदन के प्रभावी संचालन पर मंथन

बैठक के दौरान शक्ति सदन के क्रियान्वयन और लाभार्थियों को मिल रही सुविधाओं की गहन समीक्षा की गई। कलेक्टर श्री मीना ने स्पष्ट किया कि 'शक्ति सदन' केवल एक आश्रय स्थल न होकर पीड़ित महिलाओं के लिए आशा की किरण होना चाहिए। उन्होंने वहां उपलब्ध कराए जा रहे पुनर्वास सेवाओं, कानूनी सहायता, और मनोसामाजिक परामर्श की गुणवत्ता को और बेहतर करने के निर्देश दिए। महिलाओं के विरुद्ध होने वाली हिंसा की घटनाओं को रोकने और पीड़ितों को समय पर त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए पुलिस, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग के बीच निरंतर संवाद पर जोर दिया गया।

बाल संरक्षण: बाल विवाह, बाल श्रम और तस्करी पर प्रहार

जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में बाल अधिकारों से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने विशेष रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अधिकारियों को कड़ी चेतावनी और निर्देश जारी किए:

  • बाल विवाह की रोकथाम: जिले में बाल विवाह जैसी कुरीतियों को जड़ से समाप्त करने के लिए ग्रामीण स्तर पर जागरूकता बढ़ाने और सख्त निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।

  • बाल श्रम एवं तस्करी: बाल श्रम और बाल तस्करी के मामलों में संलिप्त लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई में ढिलाई न बरतने की बात कही गई।

  • गुमशुदा बच्चों की खोज: लापता बच्चों की बढ़ती समस्याओं को देखते हुए कलेक्टर ने पुलिस विभाग को समयबद्ध तरीके से खोजबीन करने और अन्य संबंधित विभागों के साथ डेटा साझा करने को कहा।

संवेदनशीलता और जवाबदेही: कलेक्टर का स्पष्ट संदेश

कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों को यह स्पष्ट कर दिया कि महिला और बाल सुरक्षा के मामलों में 'संवेदनशीलता' ही सबसे बड़ा मंत्र है। उन्होंने कहा, "महिला एवं बाल विकास से जुड़े मामलों में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है। किसी भी स्तर पर होने वाली लापरवाही सीधे तौर पर पीड़ितों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है, जो कतई स्वीकार्य नहीं होगी।"

उन्होंने पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को एक 'को-ऑर्डिनेटेड अप्रोच' के साथ काम करने का आह्वान किया। कलेक्टर का मानना है कि यदि विभिन्न विभाग आपसी समन्वय स्थापित करें, तो न केवल अपराधों में कमी आएगी बल्कि पीड़ितों को न्याय मिलने की प्रक्रिया भी तेज होगी।

सहभागी विभाग और समिति के सदस्य

इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री डी.के. सुन्द्रियाल, वन स्टॉप सेंटर की प्रमुख श्रीमती रचना चौधरी के साथ-साथ महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, श्रम विभाग एवं बाल कल्याण समिति के वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। किशोर न्याय बोर्ड और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों ने भी सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए।

बैठक के अंत में यह निर्णय लिया गया कि महिला एवं बाल सुरक्षा के प्रति जन-जागरूकता को बढ़ाने के लिए आने वाले समय में जिले के हर कोने में अभियान चलाए जाएंगे। कलेक्टर श्री मीना ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने क्षेत्र में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाएं ताकि बालाघाट जिले को महिलाओं और बच्चों के लिए एक सुरक्षित और बेहतर स्थान बनाया जा सके।

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