पन्ना जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पताल परिसर की व्यवस्थाओं को लेकर जिला प्रशासन बेहद सख्त नजर आया है। मंगलवार को कलेक्टर श्रीमती ऊषा परमार ने जिला चिकित्सालय का औचक निरीक्षण किया। यह दौरा विशेष रूप से अस्पताल के वार्डों में हालिया हुई अतिवर्षा के कारण हुए जलभराव की समस्या के बाद किया गया। कलेक्टर ने मौके पर पहुँचकर न केवल वस्तुस्थिति का जायजा लिया, बल्कि संबंधित अधिकारियों को व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के स्पष्ट और कड़े निर्देश भी दिए।

जलभराव की समस्या: स्थायी समाधान की आवश्यकता

निरीक्षण के दौरान सबसे मुख्य मुद्दा अस्पताल के वार्डों में पानी भरने का रहा। अतिवर्षा की स्थिति में मरीजों और उनके परिजनों को हो रही भारी असुविधा को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने इसे प्रशासनिक विफलता माना। उन्होंने लोक निर्माण विभाग और अस्पताल प्रबंधन को निर्देशित किया कि परिसर की ड्रेनेज व्यवस्था का तत्काल पुनर्गठन किया जाए। उन्होंने कहा कि चिकित्सालय जैसे संवेदनशील स्थान पर जलभराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। अतः जल निकासी के लिए एक 'स्थायी समाधान' (Permanent Solution) सुनिश्चित किया जाए, ताकि भविष्य में कभी भी मरीजों को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।

नवीन भवन निर्माण में गति लाने के निर्देश

अस्पताल परिसर में चल रहे नवीन भवन निर्माण कार्य का अवलोकन करते हुए कलेक्टर श्रीमती परमार ने निर्माण एजेंसी को काम की धीमी गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में हर हाल में तेजी लाई जाए ताकि इस भवन का लाभ शीघ्र ही आमजन और मरीजों को मिलना शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूरा करना एजेंसी की प्राथमिकता होनी चाहिए।

अतिक्रमण पर कार्रवाई की चेतावनी

चिकित्सालय परिसर में यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के उद्देश्य से कलेक्टर ने परिसर में संचालित विभिन्न दुकानों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने दुकानदारों को सख्त हिदायत दी कि वे अपनी दुकानों को निर्धारित रैलिंग के भीतर ही संचालित करें। रैलिंग के बाहर किए गए किसी भी प्रकार के अतिक्रमण को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने कहा कि यदि कोई दुकानदार रैलिंग के बाहर अतिक्रमण करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

प्रशासनिक टीम की उपस्थिति

औचक निरीक्षण के दौरान जिला प्रशासन की पूरी टीम मौजूद रही। कलेक्टर के साथ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री उमराव सिंह मरावी, एसडीएम श्री संजय नागवंशी और सिविल सर्जन डॉ. आलोक गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। कलेक्टर ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे नियमित रूप से अस्पताल परिसर की निगरानी करें और छोटी-छोटी समस्याओं का समय रहते समाधान करें ताकि मरीजों को अस्पताल में केवल उपचार मिले, न कि अव्यवस्थाओं से जूझना पड़े।

यह निरीक्षण पन्ना जिला प्रशासन की संवेदनशीलता को दर्शाता है। कलेक्टर का यह कड़ा रुख यह सुनिश्चित करने का प्रयास है कि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नागरिकों को एक स्वच्छ, सुरक्षित और सुव्यवस्थित वातावरण उपलब्ध हो सके।

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