विदिशा जिले के नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की दिशा में मंगलवार, 7 जुलाई 2026 को एक अत्यंत सुखद और गौरवपूर्ण दिन रहा। विदिशा जिला चिकित्सालय ने अपनी चिकित्सा सुविधाओं के सफर में एक और मील का पत्थर स्थापित करते हुए आधुनिक 'फेको' (Phacoemulsification) तकनीक से मोतियाबिंद की निःशुल्क सर्जरी की शुरुआत की है। इस सुविधा के लोकार्पण के साथ ही अब विदिशा के निवासियों को अपनी आंखों के गंभीर इलाज के लिए भोपाल, इंदौर या अन्य बड़े महानगरों की ओर रुख करने की आवश्यकता नहीं होगी। विश्वस्तरीय नेत्र चिकित्सा सुविधा अब स्थानीय स्तर पर जिले के ही अस्पताल में उपलब्ध होगी।
यह पहल न केवल जिले की स्वास्थ्य अधोसंरचना को सशक्त बनाती है, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के उन नागरिकों के लिए एक बड़ी वरदान साबित होगी, जो महंगे निजी अस्पतालों में अपना उपचार कराने में असमर्थ थे। अब विदिशा जिला चिकित्सालय में बिना किसी खर्च के आधुनिकतम तकनीक से आंखों का सफल ऑपरेशन संभव हो सकेगा।
फेको तकनीक: आधुनिक चिकित्सा का एक उत्कृष्ट उदाहरण
सिविल सर्जन डॉ. अनूप वर्मा ने फेको तकनीक की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह मोतियाबिंद हटाने की दुनिया की सबसे आधुनिक, सुरक्षित और प्रभावी पद्धति है। पारंपरिक ऑपरेशनों के विपरीत, इस प्रक्रिया में आंख में अत्यंत सूक्ष्म चीरा लगाया जाता है। इसके बाद अल्ट्रासोनिक तरंगों का उपयोग करके मोतियाबिंद को सफलतापूर्वक हटाया जाता है।
इस तकनीक के प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं:
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टांकों से मुक्ति: इस प्रक्रिया में सामान्यतः टांके लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे ऑपरेशन के बाद असुविधा बहुत कम होती है।
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अत्यल्प दर्द: यह एक पेनलेस (दर्द रहित) सर्जरी है, जिससे मरीज को घबराहट नहीं होती।
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न्यूनतम जोखिम: संक्रमण का खतरा इस तकनीक में नगण्य के बराबर होता है।
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शीघ्र रिकवरी: फेको तकनीक से ऑपरेशन कराने के बाद मरीज बहुत कम समय में सामान्य दृष्टि प्राप्त कर लेता है और अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या में शीघ्र वापस लौट सकता है।
कलेक्टर की अपील: धुंधली नजर को न करें नजरअंदाज
जिले के कलेक्टर एवं जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष श्री अंशुल गुप्ता ने इस नई सेवा के शुभारंभ के अवसर पर विदिशा वासियों से विशेष अपील की है। उन्होंने कहा कि मोतियाबिंद एक ऐसी समस्या है, जिसे अक्सर लोग उम्र का तकाजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। कलेक्टर ने लोगों को प्रेरित करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति को धुंधला दिखाई देना, रात में देखने में कठिनाई महसूस होना, तेज रोशनी में चुभन होना या पढ़ने-लिखने में असमर्थता जैसी समस्याएं हो रही हैं, तो वे इसे हल्के में न लें।
श्री गुप्ता ने नागरिकों से आग्रह किया कि वे बिना किसी संकोच के जिला चिकित्सालय विदिशा के नेत्र रोग विभाग में आएं और अपनी जांच कराएं। कलेक्टर ने समाज के प्रत्येक नागरिक का आह्वान किया कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों और पड़ोस के जरूरतमंद लोगों को इस निःशुल्क सुविधा का लाभ दिलाने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक को मोतियाबिंद की वजह से अपनी दृष्टि खोने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अब यह सुविधा उनके अपने जिले में पूरी तरह से निःशुल्क उपलब्ध है।
स्वास्थ्य विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता: जन-जन तक बेहतर उपचार
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. रामहित कुमार ने विभाग की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि जिले के हर पात्र मरीज तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग का संकल्प है। फेको तकनीक का आना स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी उपलब्धि से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि अब मरीज को न केवल आधुनिक चिकित्सा मिलेगी, बल्कि भोपाल जैसे शहरों में जाने पर होने वाली भागदौड़, समय की बर्बादी और अतिरिक्त आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी।
डॉ. कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग पूरी तत्परता के साथ मरीजों की सेवा में लगा है और आने वाले समय में जिले के अन्य क्षेत्रों में भी चिकित्सा सुविधाओं को और अधिक उन्नत किया जाएगा।
नेत्र रोग विशेषज्ञ की सलाह: समय पर जांच ही बचाव है
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश साहू ने मरीजों को परामर्श देते हुए बताया कि मोतियाबिंद के इलाज में समय का बहुत महत्व होता है। यदि समय पर ऑपरेशन न कराया जाए, तो आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जाने का खतरा रहता है। उन्होंने बताया कि जिला चिकित्सालय में अब विशेषज्ञों की देखरेख में फेको मशीन के माध्यम से ऑपरेशन किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञ डॉ. साहू के अनुसार:
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जांच की प्रक्रिया: अस्पताल आते ही मरीज की पहले ओपीडी (OPD) में सघन जांच की जाती है।
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परामर्श: डॉक्टर की सलाह के बाद ऑपरेशन की तारीख तय की जाती है।
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निःशुल्क सुविधा: यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क है, जिसका लाभ जिले का कोई भी गरीब मरीज उठा सकता है।
जनहित में विशेष संदेश: जागरूक बनें और लाभ उठाएं
जिला चिकित्सालय प्रशासन ने विशेष रूप से 50 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए यह विशेष आग्रह किया है कि वे मोतियाबिंद की नियमित जांच करवाएं। समाज के प्रबुद्ध वर्ग से अपील की गई है कि वे अपने आसपास के लोगों को इस सुविधा के बारे में बताएं।
अस्पताल की ओर से एक जनहित नारा भी दिया गया है: "धुंधली नज़र को न करें नज़रअंदाज़। आज ही जिला चिकित्सालय विदिशा के नेत्र रोग विभाग में अपनी आंखों की जांच कराएं और अत्याधुनिक फेको तकनीक से निःशुल्क मोतियाबिंद ऑपरेशन कराकर अपनी अमूल्य दृष्टि सुरक्षित रखें।" यह संदेश इस बात का द्योतक है कि प्रशासन अपने नागरिकों के उज्ज्वल और स्पष्ट भविष्य के प्रति कितना संवेदनशील है। विदिशा जिला अस्पताल का यह कदम वास्तव में चिकित्सा क्षेत्र में एक नई सुबह लेकर आया है, जो हजारों लोगों को फिर से दुनिया को स्पष्ट रूप से देखने का अवसर प्रदान करेगा।
image source : https://vidisha.mpinfo.org
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