कटनी जिले में कानून और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया। म.प्र. राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए, जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री जितेन्द्र कुमार शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम ढ़ीमरखेड़ा स्थित संतकबीर जूनियर हाई स्कूल में संपन्न हुआ। इस शिविर का मुख्य केंद्र बिंदु आधुनिक डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती—'साइबर अपराध' था।
डिजिटल युग और बढ़ते साइबर खतरे
शिविर को संबोधित करते हुए न्यायाधीश सुश्री पूर्वा तिवारी ने छात्रों को साइबर अपराध के बदलते स्वरूपों से रूबरू कराया। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान समय में तकनीक जितनी तेजी से आगे बढ़ रही है, उसी गति से साइबर अपराधियों का जाल भी फैल रहा है। न्यायाधीश ने छात्रों को आगाह किया कि ऑनलाइन धोखाधड़ी, फिशिंग, फेक कॉल, सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल और आर्थिक साइबर ठगी जैसे मामले समाज के लिए गंभीर खतरा बनते जा रहे हैं।
उन्होंने छात्रों को समझाया कि साइबर अपराधी अक्सर कम उम्र के बच्चों और युवाओं को अपना निशाना बनाते हैं, क्योंकि वे डिजिटल दुनिया में अधिक सक्रिय होते हैं। न्यायाधीश ने उदाहरण देते हुए बताया कि किस प्रकार सोशल मीडिया पर एक छोटी सी चूक या किसी अनजान व्यक्ति से साझा की गई निजी जानकारी, बड़ी मुसीबत का कारण बन सकती है।
सुरक्षित इंटरनेट के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश पूर्वा तिवारी ने छात्रों को सुरक्षित इंटरनेट उपयोग के लिए 'गोल्डन रूल्स' बताए, जिनका पालन करके छात्र न केवल स्वयं को, बल्कि अपने परिवार को भी ठगी से बचा सकते हैं:
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अज्ञात लिंक से दूरी: किसी भी अनजान नंबर या ईमेल से आए संदेहास्पद लिंक पर क्लिक न करें। ये लिंक आपके मोबाइल या कंप्यूटर में वायरस डाल सकते हैं या व्यक्तिगत डेटा चुरा सकते हैं।
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गोपनीयता का महत्व: अपना पासवर्ड, ओटीपी (OTP), आधार कार्ड या अन्य कोई भी सरकारी पहचान पत्र (जैसे कि [Aadhaar Redacted]) कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।
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सोशल मीडिया पर सावधानी: सोशल मीडिया प्रोफाइल को 'प्राइवेट' रखें और केवल उन्हीं लोगों को फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार करें जिन्हें आप निजी तौर पर जानते हैं।
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संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट: यदि आपको किसी भी प्रकार की संदिग्ध कॉल, मैसेज या ऑनलाइन गतिविधि महसूस होती है, तो उसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत अपने बड़ों या नजदीकी पुलिस थाने/साइबर सेल को सूचित करें।
छात्रों में दिखा उत्साह और जागरूकता
इस विधिक साक्षरता शिविर की सबसे बड़ी सफलता छात्रों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे, जैसे—"यदि गलती से किसी लिंक पर क्लिक हो जाए तो क्या करें?" या "किसी के गलत इस्तेमाल से कैसे बचें?" न्यायाधीश पूर्वा तिवारी ने इन सभी जिज्ञासाओं का सरल और प्रभावी तरीके से समाधान किया।
छात्रों ने संकल्प लिया कि वे न केवल इन सुरक्षा नियमों का पालन करेंगे, बल्कि अपने घर के बुजुर्गों और मित्रों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करेंगे। इस शिविर का आयोजन विद्यार्थियों में न केवल कानून के प्रति समझ विकसित करने के लिए किया गया था, बल्कि उन्हें एक जिम्मेदार 'डिजिटल नागरिक' बनाने के लिए प्रेरित करना भी इसका मुख्य लक्ष्य था।
विधिक जागरूकता की निरंतर प्रक्रिया
कटनी जिला विधिक सेवा प्राधिकरण समय-समय पर जिले के विभिन्न विद्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में इस तरह के शिविर आयोजित करता रहता है। इसका उद्देश्य आम जनता को उनके कानूनी अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति साक्षर बनाना है। ढ़ीमरखेड़ा के इस शिविर ने सिद्ध किया कि यदि सही समय पर छात्रों को मार्गदर्शन दिया जाए, तो उन्हें साइबर अपराधियों के चंगुल से दूर रखा जा सकता है।
इस कार्यक्रम के माध्यम से न केवल शैक्षणिक ज्ञान बढ़ा, बल्कि छात्रों ने यह भी समझा कि 'सावधानी ही बचाव है'। जिला प्रशासन और न्यायपालिका की इस पहल का स्थानीय निवासियों ने भी स्वागत किया है, क्योंकि आज के डिजिटल दौर में हर व्यक्ति के लिए साइबर साक्षर होना एक अनिवार्य आवश्यकता बन चुका है। आने वाले समय में ऐसे और भी शिविर आयोजित किए जाएंगे ताकि पूरे कटनी जिले को साइबर अपराध मुक्त बनाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ाया जा सके।
image source : https://katni.mpinfo.org
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