मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में गंगा दशहरे का पावन पर्व इस बार जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के संकल्प के साथ मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आह्वान पर पूरे प्रदेश में चल रहे “जल गंगा संवर्धन अभियान” के अंतर्गत बालाघाट नगर पालिका परिषद द्वारा एक वृहद जनजागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य केंद्र बिंदु नगर की आस्था और जीवनदायिनी माँ वैनगंगा नदी रही, जिसके तटों को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने मिलकर श्रमदान किया।

प्रभात फेरी और शंकरघाट में स्वच्छता अभियान

अभियान की शुरुआत 25 मई की सुबह एक उत्साहजनक प्रभात फेरी के साथ हुई। नगर पालिका परिषद बालाघाट के सफाई मित्रों और कर्मचारियों की सक्रिय सहभागिता के साथ निकली यह प्रभात फेरी शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए शंकरघाट पहुंची। सुबह 7:30 बजे से ही सफाई अभियान का आगाज कर दिया गया। शंकरघाट के तटों और बड़े पुल के नीचे जमा हुए कचरे, प्लास्टिक और अपशिष्ट पदार्थों को चुन-चुनकर हटाया गया।

सफाई अभियान के दौरान निम्नलिखित गतिविधियों पर विशेष ध्यान दिया गया:

  • नदी तट की सफाई: घाटों पर जमा हुई गंदगी, पॉलिथिन और अघुलनशील कचरे को एकत्रित कर निस्तारण के लिए भेजा गया।

  • नदी तल की स्वच्छता: जल के भीतर बिखरे हुए कचरे को साफ किया गया ताकि जलधारा को प्रदूषण से मुक्त रखा जा सके।

  • सामूहिक संकल्प: स्वच्छता श्रमदान के बाद उपस्थित सभी लोगों ने माँ वैनगंगा की परिक्रमा की और नदी की निर्मलता बनाए रखने का सामूहिक संकल्प लिया।

प्रशासनिक और राजनीतिक नेतृत्व की सक्रिय भागीदारी

इस आयोजन की गरिमा बढ़ाने के लिए बालाघाट जिले के प्रशासनिक आला अधिकारी और नगर के प्रमुख जनप्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। यह भागीदारी इस अभियान की गंभीरता को दर्शाती है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से संयुक्त कलेक्टर राहुल नायक, बालाघाट एसडीएम गोपाल सोनी, नगर पालिका अध्यक्ष भारती सुरजीत सिंह ठाकुर, उपाध्यक्ष योगेश बिसेन, तथा सभापति गण समीर जायसवाल, कमलेश पांचे, उज्जवल आमाडारे, राकेश सेवईवार, गजेन्द्र भारद्वाज, जैनेन्द्र कटरे और धीरज सुराना ने सक्रिय रूप से श्रमदान में हिस्सा लिया।

इसके अलावा, शहरी विकास अभिकरण के अधिकारी बी.डी. कतरोलिया, सीएमओ सूर्यप्रकाश उके, वाचस्पति त्रिपाठी, गुलाबचंद लटारे, यशवंत राणा, उपयंत्री ज्योति मेश्राम, ममता नगपुरे एवं नगर पालिका के सभी सफाई मित्रों ने इस अभियान को सफल बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

जल संरक्षण की महत्ता पर विशेष संवाद

नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती भारती सुरजीत सिंह ठाकुर ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि माँ वैनगंगा न केवल बालाघाट की धार्मिक आस्था का आधार है, बल्कि यह हमारे शहर के लिए शुद्ध पेयजल का भी प्रमुख स्रोत है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि पूजन सामग्री और प्लास्टिक का नदी में विसर्जन जल प्रदूषण को बढ़ावा दे रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए घातक साबित हो सकता है।

उन्होंने आम नागरिकों से अपील की कि वे जल स्रोतों को प्रदूषण मुक्त बनाने में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि सरकार और प्रशासन केवल सुविधाएं दे सकते हैं, लेकिन नदी को स्वच्छ बनाए रखना समाज की जिम्मेदारी है।

दिनभर चलीं विभिन्न गतिविधियां

गंगा दशहरे के पावन पर्व पर केवल सफाई अभियान तक ही कार्यक्रम सीमित नहीं रहे, बल्कि दिनभर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन कर जल संरक्षण का संदेश दिया गया:

  1. पौधारोपण: पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए नदी के तटों पर वृक्षारोपण किया गया।

  2. माँ वैनगंगा पूजन और महाआरती: नदी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष पूजा, पुष्प और चुनरी अर्पण के साथ दीपदान और महाआरती का भव्य आयोजन किया गया।

  3. सांस्कृतिक कार्यक्रम: जल संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और जन-जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन किया गया।

भविष्य की चुनौतियां और हमारा दायित्व

गंगा दशहरे पर आयोजित इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन और जल संकट जैसी वैश्विक चुनौतियों के प्रति लोगों को जागरूक करना था। बालाघाट में वैनगंगा नदी का संरक्षण करना केवल एक सरकारी अभियान नहीं, बल्कि शहर की भविष्य की आवश्यकताओं को सुरक्षित करना है।

प्रशासन और जनमानस के बीच का यह समन्वय संकेत देता है कि यदि निरंतर इसी प्रकार के स्वच्छता अभियान चलते रहे, तो माँ वैनगंगा को फिर से उसकी पुरानी निर्मलता और गौरव प्राप्त हो सकता है। यह आयोजन एक उदाहरण है कि जब प्रशासन और समाज के लोग एक साथ मिलकर किसी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए खड़े होते हैं, तो बड़े से बड़े बदलाव संभव हैं। बालाघाट वासियों के लिए यह संकल्प अब एक दैनिक जिम्मेदारी बन गया है कि वे अपनी जीवनदायिनी नदी को कचरे से मुक्त रखें।

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