मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में प्रशासन को आम जनता के करीब लाने और उनकी बुनियादी समस्याओं का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से एक सराहनीय पहल की गई है। जिले के कलेक्टर मृणाल मीना ने गुरुवार, 22 मई को लालबर्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत कनकी में एक 'रात्रिकालीन चौपाल' का आयोजन किया। इस अनूठी पहल का मुख्य उद्देश्य गांव की उन समस्याओं को सुनना था जो लंबे समय से लंबित थीं और जिन्हें प्रशासनिक स्तर पर तत्काल सुधार की आवश्यकता थी। इस दौरान कलेक्टर के साथ जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ, वारासिवनी एसडीएम कार्तिकेय जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के आला अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
चौपाल में उठी गांव की प्रमुख समस्याएं
रात्रिकालीन चौपाल का मुख्य केंद्र ग्राम पंचायत कनकी की वे समस्याएं थीं जो सीधे तौर पर ग्रामीणों के दैनिक जीवन को प्रभावित कर रही हैं। चौपाल के प्रारंभ में सरपंच श्री दुर्गा प्रसाद पगरवार ने गांव का पक्ष रखते हुए समस्याओं का विस्तृत ब्योरा पेश किया। सरपंच द्वारा उठाए गए प्रमुख बिंदु निम्नलिखित थे:
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विद्युत आपूर्ति की विसंगति: गांव का आधा हिस्सा धपेरा फीडर से और शेष आधा हिस्सा गर्रा फीडर से जुड़ा होने के कारण ग्रामीणों को निरंतर और नियमित विद्युत आपूर्ति नहीं मिल पा रही थी।
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भूमि सीमांकन का अभाव: बांडा तालाब की भूमि के सीमांकन न होने से स्थानीय स्तर पर विवादों की स्थिति बनी हुई थी।
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सिंचाई और नहरें: नहरों की समुचित सफाई न होने के कारण कृषि कार्यों में बाधा उत्पन्न हो रही थी।
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रेत की उपलब्धता: गांव के स्थानीय निवासियों को अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए रेत खदानों से रेत उपलब्ध नहीं हो पा रही थी।
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पेयजल की किल्लत: नल-जल योजना का पानी गांव के अंतिम छोर यानी आवास टोला तक नहीं पहुँच पा रहा था, जिससे लोगों को जल संकट का सामना करना पड़ रहा था।
अधिकारियों को मौके पर दिए कड़े निर्देश
कलेक्टर मृणाल मीना ने हर समस्या को गंभीरता से सुना और संबंधित विभाग के अधिकारियों से मौके पर ही वस्तुस्थिति की जानकारी ली। उन्होंने केवल समस्याओं को दर्ज नहीं किया, बल्कि उनके समाधान की समय-सीमा भी तय की:
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बिजली समस्या का समाधान: विद्युत विभाग के कनिष्ठ यंत्री को निर्देश दिए गए कि वे 15 दिनों के भीतर बिजली फीडर संबंधी विसंगति को दूर करें ताकि गांव में निर्बाध बिजली मिल सके।
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पेयजल व्यवस्था: पीएचई विभाग ने जानकारी दी कि लवादा की पानी टंकी की क्षमता कम होने के कारण पानी की आपूर्ति बाधित हो रही है। कलेक्टर ने इस तकनीकी बाधा को दूर कर जल भंडारण क्षमता बढ़ाने और पेयजल संकट से निजात दिलाने के निर्देश दिए।
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नहरों की सफाई: सिंचाई विभाग को निर्देशित किया गया कि वे बांडा तालाब की नहरों की सफाई का कार्य प्राथमिकता से पूरा करें ताकि किसानों को सिंचाई में कोई असुविधा न हो।
बुनियादी ढांचे और शिक्षा पर विशेष ध्यान
चौपाल के दौरान बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्रामीणों की अन्य मांगों पर भी कलेक्टर ने संवेदनशील रुख अपनाया। जल निकासी की समस्या को देखते हुए सड़क किनारे नाली निर्माण की मांग उठी। इस पर कलेक्टर ने पंचायत सचिव को तुरंत जेसीबी मशीन लगाकर नाली खुलवाने के निर्देश दिए ताकि जलभराव की समस्या खत्म हो सके।
शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति प्रशासन की गंभीरता का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि कनकी के बंजारी आवास टोला में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र न होने की समस्या पर कलेक्टर ने तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत बच्चों के लिए वैकल्पिक शाला की व्यवस्था करने तथा उन क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए ताकि गांव के बच्चों को शिक्षा और पोषण से वंचित न रहना पड़े।
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और पारदर्शिता
रात्रिकालीन चौपाल में सरकारी योजनाओं के लाभ को लेकर भी चर्चा की गई। कलेक्टर मृणाल मीना ने प्रधानमंत्री आवास योजना और खाद्यान्न पात्रता पर्ची को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियम स्पष्ट हैं—सूची से अपात्र लोगों को बाहर किया जाएगा और उनकी जगह जो वास्तविक पात्र हितग्राही हैं, उन्हें पात्रता पर्ची जारी की जाएगी। इसी तरह आवास प्लस सर्वे सूची में जो लोग शामिल हो चुके हैं, उन्हें योजना का लाभ मिलना सुनिश्चित किया जाएगा।
कृषि एवं पशुपालन: तकनीकी जानकारी का प्रसार
कृषि प्रधान गांव होने के कारण किसानों की समस्याओं और पशुपालन विभाग से संबंधित बिंदुओं पर भी विशेषज्ञों ने जानकारी दी। कृषि विभाग ने ग्रामीणों को 'मिट्टी परीक्षण' के महत्व के बारे में बताया ताकि वे अपनी भूमि की उर्वरक शक्ति के अनुसार सही फसल का चयन कर सकें। वहीं, पशुपालन विभाग ने एक महत्वपूर्ण सुविधा साझा की: मादा पशुओं में कृत्रिम गर्भाधान और 'सेक्स सॉर्टेड सीमेन' सुविधा प्राप्त करने के लिए पशुपालक अब टोल फ्री नंबर 1962 पर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक संपर्क कर सकते हैं।
प्रशासनिक जवाबदेही और साप्ताहिक शेड्यूल
कलेक्टर ने जवाबदेही तय करने के लिए एक अभिनव निर्देश दिया। उन्होंने पटवारी, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, कृषि विस्तार अधिकारी, पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी, एएनएम और पंचायत स्तरीय अन्य कर्मचारियों को निर्देशित किया कि वे अपनी ग्राम पंचायत में उपलब्धता का साप्ताहिक शेड्यूल पंचायत भवन में चस्पा करें। इससे ग्रामीणों को यह पता रहेगा कि किस दिन कौन सा अधिकारी उनसे मिलने आएगा, जिससे लोगों को अपने छोटे-मोटे कार्यों के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
जमीन से जुड़े विवादों का निराकरण
चौपाल का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वामित्व योजना के तहत आया पट्टा विवाद रहा। जानकारी में आया कि गोपाल नखाते नामक व्यक्ति के नाम से दो पट्टे जारी हो गए हैं। इस पर कलेक्टर ने एसडीएम को निर्देश दिए कि वे तत्काल इस मामले की जांच कर एक पट्टा निरस्त करें ताकि रिकॉर्ड में शुद्धता बनी रहे।
इस रात्रिकालीन चौपाल ने न केवल ग्रामीणों की लंबित समस्याओं को हल करने का मार्ग प्रशस्त किया, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच के संवादहीनता के गैप को भी कम किया। ग्रामीणों ने कलेक्टर की इस पहल की सराहना की और उम्मीद जताई कि प्रशासन का यह सक्रिय रुख उन्हें आने वाले समय में विकास की मुख्यधारा से जोड़े रखेगा। बालाघाट जिले के लिए यह पहल अन्य पंचायतों के लिए एक आदर्श उदाहरण बनकर उभरी है, जहाँ समस्या के समाधान के लिए जनसुनवाई अब घर के द्वार तक पहुँच गई है।
image source: https://balaghat.mpinfo.org
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