प्रस्तावना: जबलपुर संभाग के कमिश्नर धनंजय सिंह की उच्चस्तरीय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक सुगमता से पहुंचे और आम जनता की शिकायतों का समय पर निवारण हो, इसके लिए प्रशासनिक मॉनिटरिंग सबसे अहम कड़ी होती है। इसी व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जबलपुर संभाग के कमिश्नर श्री धनंजय सिंह ने बुधवार, 22 जुलाई को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया। इस वर्चुअल बैठक में जबलपुर संभाग के सभी जिलों के कलेक्टरों के साथ-साथ राजस्व, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, नगरीय प्रशासन, श्रम और जनजातीय कार्य जैसे विभिन्न प्रमुख विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हुए। इस व्यापक समीक्षा बैठक का मुख्य केंद्रबिंदु शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति का जायजा लेना और लंबे समय से अटके पड़े लंबित प्रकरणों का त्वरित और संतोषजनक निराकरण सुनिश्चित करना था। संभाग स्तर पर आयोजित इस बैठक में बालाघाट जिले के प्रशासनिक अमले ने भी पूरी सक्रियता के साथ हिस्सा लिया।

बालाघाट जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति कमिश्नर श्री धनंजय सिंह द्वारा आयोजित इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग बैठक में बालाघाट जिले से प्रशासनिक नेतृत्व का पूरा अमला वर्चुअल रूप से जुड़ा हुआ था और मुस्तैदी से दिशा-निर्देशों को नोट कर रहा था। बैठक में बालाघाट के कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने प्रमुख रूप से भाग लिया। इसके साथ ही जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक सराफ, अपर कलेक्टर श्री जी.एस. धुर्वे, अपर कलेक्टर श्री डी.पी. बर्मन, संयुक्त कलेक्टर श्री राहुल नायक, तथा संयुक्त कलेक्टर श्री एम.आर. कोल समेत विभिन्न विभागों के अन्य जिम्मेदार अधिकारी भी बैठक कक्ष में उपस्थित रहे। इन सभी अधिकारियों की उपस्थिति यह सुनिश्चित करने के लिए थी कि संभाग आयुक्त स्तर से मिलने वाले निर्देशों को बालाघाट जिले में बिना किसी विलंब के धरातल पर कड़ाई से लागू किया जा सके और विकास कार्यों तथा जनहित की योजनाओं को गति दी जा सके।

सीएम हेल्पलाइन के लंबित मामलों पर कमिश्नर का कड़ा रुख और सख्ती बैठक की शुरुआत करते हुए संभागायुक्त श्री धनंजय सिंह ने सबसे पहले 'मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (CM Helpline)' के माध्यम से प्राप्त होने वाली शिकायतों और उनके निराकरण की स्थिति की जिलेवार गहन समीक्षा की। कमिश्नर श्री सिंह ने इस मोर्चे पर ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट और दो टूक निर्देश दिए कि आमजन से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या कोताही बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी। विशेष रूप से राजस्व विभाग के अंतर्गत एक वर्ष से अधिक समय से लंबित पड़ी सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का तत्काल और प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने के कड़े निर्देश दिए गए। कमिश्नर ने सभी संबंधित विभागों को यह चेतावनी दी कि जनता की समस्याओं का समय-सीमा के भीतर समाधान करना हर अधिकारी की प्रथम नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी है, और इसमें किसी भी तरह का बहाना नहीं चलेगा।

टीएल (TL) और लोक सेवा गारंटी के लंबित प्रकरणों को एक सप्ताह में निपटाने के निर्देश बैठक के दौरान 'सीएम मॉनिट' की जिलेवार समीक्षा करते हुए कमिश्नर ने टाइम लिमिट (TL) प्रकरणों की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई। टीएल प्रकरणों में विशेष रूप से राजस्व एवं विकास शाखा से जुड़े मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने पर उन्होंने अपनी गहरी नाराजगी व्यक्त की। संभागायुक्त ने इन तमाम लंबित मामलों को हर हाल में आगामी एक सप्ताह के भीतर पूरी गुणवत्ता के साथ निराकृत करने के सख्त निर्देश दिए। इसके साथ ही, 'लोक सेवा गारंटी अधिनियम' के दायरे में आने वाले ऐसे आवेदन जो निर्धारित समय-सीमा से बाहर जाकर अभी भी लंबित पड़े हुए हैं, उनकी भी बिंदुवार समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे शेष बचे सभी मामलों का शीघ्र निपटारा करें। इसके अलावा, भू-अर्जन प्रकरणों, भूमि आवंटन तथा नजूल निर्वर्तन समिति के कार्यों की जिलेवार प्रगति की समीक्षा करते हुए सभी जिला कलेक्टरों से विस्तृत रिपोर्ट ली गई और इन मामलों को प्राथमिकता से सुलझाने को कहा गया।

कृषि विभाग और ई-टोकन व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत वर्तमान में खरीफ सीजन चल रहा है, ऐसे में किसानों को कृषि संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति सुगम तरीके से होना शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस महत्वपूर्ण पहलू पर जोर देते हुए संभागायुक्त श्री सिंह ने कृषि विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि 'ई-टोकन पोर्टल' पर आ रही सभी तकनीकी खामियों और समस्याओं को तुरंत प्रभाव से दूर किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं और कृषि सेवाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े। उन्होंने विशेष रूप से यह हिदायत दी कि खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण समय में किसानों को उन्नत किस्म के बीज, पर्याप्त उर्वरक (खाद) और अन्य आवश्यक कृषि आदानों (Agricultural Inputs) की उपलब्धता में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। जिले में सभी संबंधित व्यवस्थाएं पूरी तरह से चुस्त-दुरुरुस्त और सुचारू रूप से संचालित होनी चाहिए ताकि अन्नदाताओं को असुविधा न हो।

स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में बालाघाट जिले का उत्कृष्ट प्रदर्शन विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं के मोर्चे पर बालाघाट जिले के लिए एक बेहद उत्साहजनक और सकारात्मक तस्वीर सामने आई। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा में यह बात विशेष रूप से उभरकर आई कि गर्भवती महिलाओं के एएनसी (ANC - Antenatal Care) पंजीयन के मामले में बालाघाट जिला पूरे संभाग में सबसे बेहतर प्रदर्शन करते हुए अव्वल स्थान पर रहा है। इस उपलब्धि के लिए जिला प्रशासन की सराहना की गई। इसके साथ ही बैठक में मॉडरेट एवं सिवियर एनीमिक (खून की कमी से जूझ रही) महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति, राष्ट्रीय स्तर पर चलाई जा रही निक्षय पोषण योजना, कुपोषण से निपटने के लिए पोषण बास्केट वितरण, तथा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की जिलेवार प्रगति का भी बारीकी से आकलन किया गया, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और अधिक सुधारा जा सके।

महिला एवं बाल विकास विभाग के तहत कुपोषण मुक्ति और आंगनवाड़ी पंजीयन पर जोर महिला एवं बाल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण स्तर को लेकर कमिश्नर ने बहुत ही सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी किए। बैठक में चर्चा के दौरान 'सीएम बाल आरोग्य संवर्धन कार्यक्रम' की विस्तृत समीक्षा की गई। इस कार्यक्रम के तहत कुपोषण के खिलाफ जंग में SAM (Severe Acute Malnutrition), MAM (Moderate Acute Malnutrition) एवं SUW श्रेणी के अंतर्गत आने वाले सभी गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों का प्रतिदिन नियमित रूप से पंजीयन सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए गए, ताकि उन पर विशेष चिकित्सीय व पोषण संबंधी ध्यान दिया जा सके। इसके अलावा, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के सभी आंगनवाड़ी केंद्रों में 3 वर्ष से लेकर 6 वर्ष तक की आयु वर्ग के शत-प्रतिशत बच्चों का अनिवार्य रूप से पंजीयन सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया गया, ताकि शुरुआती स्तर पर ही बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास की मजबूत नींव रखी जा सके।

छात्रवृत्ति वितरण और प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की प्रगति अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के विद्यार्थियों के कल्याण से जुड़े मामलों पर चर्चा करते हुए जनजातीय कार्य विभाग के कार्यों की समीक्षा की गई। इस दौरान एससी-एसटी छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया और उसकी प्रगति पर संभागायुक्त ने संतोष व्यक्त किया। बैठक में यह तथ्य सामने आया कि संभाग के सभी जिलों ने छात्रों के समय पर छात्रवृत्ति लाभ पहुंचाने की दिशा में काफी बेहतर और सराहनीय कार्य किया है। वहीं दूसरी ओर, नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत शहरी क्षेत्रों के रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं को आर्थिक संबल प्रदान करने वाली 'प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना' की भी जिलेवार प्रगति की समीक्षा की गई। योजना के तहत शहरी निकायों के प्रदर्शन का आकलन करते हुए पात्र हितग्राहियों को शत-प्रतिशत लाभान्वित करने के निर्देश दिए गए।

श्रम विभाग के तहत संबल योजना के लंबित मामलों पर जवाब-तलब असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए बनाई गई अत्यंत महत्वपूर्ण 'संबल योजना' की समीक्षा के दौरान कुछ कमियां सामने आईं। श्रम विभाग के कार्यों की समीक्षा करते समय कमिश्नर श्री धनंजय सिंह का रुख काफी सख्त रहा। उन्होंने संबल योजना के अंतर्गत 100 दिनों से भी अधिक समय से लंबित पड़े मामलों को लेकर संबंधित अधिकारियों से कड़ा जवाब-तलब किया। संभागायुक्त ने दो टूक शब्दों में निर्देश दिए कि संबल योजना के तहत अटके हुए ऐसे सभी मामलों को अगले 15 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर हर हाल में निराकृत किया जाए, ताकि संकट में फंसे श्रमिक परिवारों को शासन की इस कल्याणकारी योजना का लाभ मिलने में और अधिक विलंब न हो।

जनकल्याणकारी योजनाओं में प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता पर विशेष जोर बैठक के अंतिम चरण में समग्र रूप से शासन की नीतियों और कार्यक्रमों की चर्चा करते हुए कमिश्नर श्री सिंह ने इस बात पर सबसे अधिक जोर दिया कि प्रशासन की रीढ़ उसकी जवाबदेही होती है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में यह रेखांकित किया कि शासन द्वारा जितनी भी जनकल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, उनका वास्तविक और समयबद्ध लाभ अंतिम छोर पर खड़े पात्र हित तक पहुँचना ही चाहिए। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में जुड़े समस्त जिलों के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे पूरी संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। प्रशासनिक लापरवाही के लिए अब किसी भी स्तर पर कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, और सभी अधिकारी लंबित प्रकरणों के त्वरित निराकरण के लिए मिशन मोड में कार्य करें।

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