बालाघाट जिले के बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और भविष्य को सुरक्षित करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। कलेक्टर श्री मृणाल मीना के कुशल निर्देशन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप के मार्गदर्शन में, 0 से 18 वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए एक 'विशेष नेत्र रोग शिविर' का आयोजन किया जा रहा है। यह स्वास्थ्य शिविर आगामी 26 मई, मंगलवार को आयोजित होगा, जिसमें जिले के बच्चों को नेत्र संबंधी गंभीर समस्याओं से निजात दिलाने के लिए नि:शुल्क परामर्श और उपचार प्रदान किया जाएगा।
शिविर का विवरण और समय सारणी
यह स्वास्थ्य शिविर बालाघाट शहर के मध्य स्थित जिला चिकित्सालय परिसर के डीईआईसी (DEIC) केंद्र में आयोजित किया जाएगा। शिविर का समय सुबह 10 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक निर्धारित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे समय सीमा का ध्यान रखें ताकि अधिक से अधिक बच्चे इस स्वास्थ्य सुविधा का लाभ उठा सकें।
इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें नागपुर और बालाघाट के ख्याति प्राप्त नेत्र रोग विशेषज्ञ अपनी सेवाएं देंगे। ये विशेषज्ञ बच्चों की आंखों की गहन जांच करेंगे और उन्हें उचित चिकित्सा परामर्श प्रदान करेंगे। शिविर का मुख्य उद्देश्य उन बच्चों की पहचान करना है जो जन्मजात या अन्य नेत्र संबंधी बीमारियों से जूझ रहे हैं, ताकि समय रहते उनका उपचार संभव हो सके।
किन समस्याओं का होगा उपचार?
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, यह शिविर विशेष रूप से उन बच्चों के लिए वरदान साबित होगा जो निम्नलिखित जटिल नेत्र रोगों से पीड़ित हैं:
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जन्मजात मोतियाबिंद: नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों में पाई जाने वाली मोतियाबिंद की समस्या।
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आरओपी (ROP): समय से पूर्व जन्मे बच्चों में होने वाली रेटिनोपैथी की समस्या।
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भेंगापन या तिरछापन: आंखों के संरेखण में कमी के कारण होने वाला भेंगापन।
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टॉसिस (Ptosis): पलकों का नीचे लटकना या पूरी तरह न खुल पाना।
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कॉर्निया एवं रेटिना संबंधी विकार: आंखों के कॉर्निया और रेटिना से जुड़ी गंभीर बीमारियां।
अभिभावकों के लिए आवश्यक निर्देश
शिविर में आने वाले अभिभावकों को कुछ दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य है ताकि पंजीकरण और उपचार की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल सके। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, निम्नलिखित दस्तावेज साथ होना आवश्यक है:
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पुरानी जांच रिपोर्ट: यदि बच्चे की पहले कोई जांच हुई हो, तो उसकी फाइल।
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आयुष्मान कार्ड: सरकारी योजना के लाभ हेतु।
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जन्म प्रमाण पत्र: आयु की पुष्टि के लिए।
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पासपोर्ट साइज फोटो: दो फोटो अनिवार्य हैं।
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माता-पिता के दस्तावेज: माता-पिता का [Aadhaar Redacted] कार्ड (पहचान पत्र) साथ लाना अनिवार्य है।
उपचार और सर्जरी की व्यवस्था
इस शिविर में विशेषज्ञों द्वारा जिन बच्चों को चिन्हित किया जाएगा, उनके उपचार के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है। शिविर में चयनित बच्चों को मध्यप्रदेश शासन द्वारा पंजीकृत उन अस्पतालों में भेजा जाएगा जो बच्चों के नेत्र उपचार के लिए विशेषज्ञता रखते हैं। इन अस्पतालों में बच्चों की सर्जरी और उपचार पूरी तरह से नि:शुल्क (Free of cost) किया जाएगा। यह सरकार की एक बड़ी कल्याणकारी योजना है, जिसका लक्ष्य गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों को आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं सुलभ कराना है।
अधिक जानकारी हेतु संपर्क केंद्र
किसी भी प्रकार की शंका या पंजीकरण संबंधी जानकारी के लिए, विभाग ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। अभिभावक डीईआईसी, जिला चिकित्सालय बालाघाट के निम्नलिखित मोबाइल नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
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9340320828
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7648822306
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8103256272
स्वास्थ्य विभाग की यह पहल बालाघाट जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है। आंखों की रोशनी अनमोल है, और यदि किसी बच्चे में जन्मजात या विकासशील नेत्र संबंधी समस्याएं हैं, तो उनका सही समय पर उपचार करना अत्यंत आवश्यक है। सभी अभिभावकों से निवेदन है कि वे जागरूक नागरिक का परिचय देते हुए अपने बच्चों की आंखों की जांच इस शिविर में जरूर करवाएं। यह प्रयास न केवल बच्चों को भविष्य के अंधेपन से बचाएगा, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ और उज्ज्वल जीवन जीने में भी मदद करेगा।
Image source: gemini ai

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