बड़वानी, 11 मई 2026: मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में प्रशासनिक कार्यों में कसावट लाने, जन-कल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से लागू करने और शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गया है। सोमवार को बड़वानी कलेक्ट्रेट सभागृह में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह की अध्यक्षता में समय-सीमा (टीएल) और अंतर्विभागीय समन्वय बैठक का एक महत्वपूर्ण आयोजन किया गया।

इस वृहद बैठक में जिले के विकास कार्यों, विभिन्न विभागीय योजनाओं की अद्यतन प्रगति और आम जनता से जुड़ी रोजमर्रा की समस्याओं के त्वरित निराकरण को लेकर गहन और बिंदुवार समीक्षा की गई। बैठक की शुरुआत में ही कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने बेहद स्पष्ट और सख्त लहजे में बड़वानी जिले के सभी आला अधिकारियों को निर्देशित किया कि उन्हें शासन द्वारा सौंपे गए शासकीय दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा, पारदर्शिता और जवाबदेहिता (Accountability) के साथ सुनिश्चित करना होगा। शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही, लेटलतीफी या उदासीनता को जिला प्रशासन द्वारा बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

बैठक को सुव्यवस्थित रूप से संचालित करते हुए कलेक्टर ने विभिन्न विभागों के कामकाज की गहन समीक्षा की और बड़वानी जिले के विकास को गति देने के लिए निम्नलिखित महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए:

1. जल संचय जन भागीदारी एवं 'जल गंगा संवर्धन अभियान 2026'

बड़वानी जिले की भौगोलिक स्थिति, आगामी मानसून की तैयारियों और गर्मियों के मौसम को देखते हुए जल संरक्षण वर्तमान में प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है।

  • प्रगतिरत कार्यों की सघन समीक्षा: कलेक्टर ने 'जल संचय जन भागीदारी' और 'जल गंगा संवर्धन अभियान 2026' के तहत बड़वानी जिले के विभिन्न विकासखंडों में चल रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की।

  • तालाब गहरीकरण और बोरी बंधान: भू-जल स्तर को बढ़ाने और बारिश के पानी को सहेजने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में पुराने तालाबों के गहरीकरण, नदियों और छोटे नालों पर बोरी बंधान (चेक डैम) के निर्माण कार्य को युद्ध स्तर पर और समय-सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए गए।

  • हैंडपंप रिचार्ज और सीएसआर फंड का उपयोग: पुराने और ग्रीष्मकाल में सूख जाने वाले हैंडपंपों को वैज्ञानिक पद्धति से रिचार्ज करने की तकनीक पर जोर दिया गया। इसके साथ ही, कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के तहत औद्योगिक घरानों व संस्थाओं के सहयोग से जल संरक्षण के जो भी प्रोजेक्ट्स बड़वानी जिले में प्रस्तावित हैं, उन्हें जल्द से जल्द धरातल पर उतारने का अल्टीमेटम दिया गया।

2. ग्रीष्मकाल में पेयजल व्यवस्था और संकट प्रबंधन (विशेषकर पाटी क्षेत्र)

गर्मी के बढ़ते प्रकोप के बीच बड़वानी जिले के किसी भी शहरी या ग्रामीण हिस्से में पेयजल का हाहाकार न मचे, इसके लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग को कड़े और स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

  • दुर्गम क्षेत्रों पर विशेष फोकस: बड़वानी जिले का पाटी विकासखंड एक पहाड़ी और दुर्गम भौगोलिक संरचना वाला आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। कलेक्टर ने विशेष रूप से पाटी क्षेत्र का जिक्र करते हुए निर्देशित किया कि जहां सामान्य बोरवेल मशीनें नहीं पहुंच पाती हैं, वहां आधुनिक 'क्रॉलर मशीन' (Crawler Machine) के माध्यम से बोरवेल खनन करवाकर हर हाल में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।

  • लक्ष्य का पुनः सर्वेक्षण: कलेक्टर ने पीएचई विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे जल संकट वाले संभावित क्षेत्रों का तुरंत पुनः सर्वेक्षण (Re-survey) करें और अपने निर्धारित लक्ष्यों में आवश्यकतानुसार बढ़ोतरी करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि इस भीषण गर्मी में आम जनमानस और मवेशियों को पानी के लिए दर-दर भटकना न पड़े।

3. कृषि, उपार्जन प्रबंधन एवं किसान कल्याण योजनाएं

कृषि प्रधान बड़वानी जिले में किसानों की समस्याओं के समाधान और कृषि कार्यों को सुचारू बनाने के लिए कृषि विभाग, खाद्य विभाग एवं संबंधित एजेंसियों को अलर्ट मोड पर रहने को कहा गया है।

  • फसल उपार्जन और त्वरित उठाव: वर्तमान में चल रहे रबी उपार्जन के तहत, उपार्जन केंद्रों पर किसानों से खरीदे गए गेहूं का तत्काल प्रभाव से उठाव (Lifting) सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि खुले में रखा हजारों क्विंटल अनाज बेमौसम बारिश या मौसम की मार से खराब न हो।

  • किसानों का भुगतान: चना और मक्का बेचने वाले किसानों को उनका उचित मूल्य और भुगतान तय समय-सीमा के भीतर उनके बैंक खातों में सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिले के समस्त अनुविभागीय दंडाधिकारियों (SDM) को इस पूरी प्रक्रिया की नियमित मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है।

  • आगामी खरीफ फसल की तैयारी: आगामी खरीफ फसलों की बोवनी के समय किसानों को खाद-बीज के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए कृषि विभाग को उर्वरक (Fertilizers) का अग्रिम उठाव कर पर्याप्त भंडारण करने और किसानों को बोनी हेतु उन्नत किस्म के बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के पूर्व-निर्देश दिए गए।

4. राजस्व प्रकरणों का त्वरित निराकरण और डिजिटल ई-गवर्नेंस

राजस्व विभाग के वर्षों से लंबित मामलों के कारण आम जनता और किसानों को होने वाली परेशानियों को देखते हुए कलेक्टर ने जिले के सभी राजस्व अधिकारियों (एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार) की पेंच कसी।

  • लंबित मामलों का निपटारा: जमीन से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए नामांतरण (Mutation), बंटवारा (Partition) और सीमांकन (Demarcation) जैसे मामलों का निराकरण लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत एक निश्चित समय-सीमा में करने के सख्त निर्देश दिए गए।

  • शत-प्रतिशत ई-केवाईसी (e-KYC): केंद्र और राज्य सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं जैसे— पीएम किसान सम्मान निधि योजना, स्वामित्व योजना (Swamitva Yojana) और फार्मर आईडी (Farmer ID) के तहत बड़वानी जिले के सभी पात्र हितग्राहियों का शत-प्रतिशत ई-केवाईसी जल्द से जल्द पूरा करने को कहा गया। इससे यह सुनिश्चित होगा कि अपात्र लोग व्यवस्था से बाहर हों और वास्तविक हितग्राहियों को बिना किसी बिचौलिए के सीधा लाभ मिल सके।

5. स्वास्थ्य सेवाएं: मातृ-शिशु मृत्यु दर पर नियंत्रण और पोषण 2.0

बड़वानी जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ करने और कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग को आपसी समन्वय (Joint Effort) से काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

  • मातृ-शिशु मृत्यु दर (MMR/IMR) पर रोकथाम: इस अत्यंत संवेदनशील विषय पर विशेष ध्यान केंद्रित करते हुए कलेक्टर श्रीमती सिंह ने कहा कि कम वजन वाली (High-risk) और एनीमिक गर्भवती महिलाओं का चिह्नांकन गर्भावस्था की शुरुआत में ही (ANC पंजीयन के समय) कर लिया जाए।

  • नियमित स्वास्थ्य जांच: यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी गर्भवती महिलाओं की कम से कम 4 एएनसी (Antenatal Care) जांच अनिवार्य रूप से समय पर हों।

  • सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0: 'सक्षम आंगनवाड़ी' और 'पोषण 2.0' अभियान के तहत बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को आवश्यक गुणवत्तापूर्ण पोषण आहार का वितरण सुनिश्चित किया जाए। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर महिलाओं को पोषण और स्वच्छता के प्रति जागरूक करने हेतु काउंसलिंग के निर्देश दिए गए।

  • कुपोषित बच्चों की सघन ट्रैकिंग: कम वजन (Low Birth Weight) वाले नवजात बच्चों की उचित ट्रैकिंग की जाए। जो कुपोषित बच्चे पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) से इलाज के बाद अपने घर लौटते हैं और उनके स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं दिखता है, उनके लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) टीम के साथ मिलकर एक सघन जांच और उपचार अभियान चलाने पर विशेष जोर दिया गया।

6. शिक्षा विभाग की तैयारियां और सामाजिक न्याय (पेंशन योजनाएं)

बड़वानी के नौनिहालों के भविष्य को संवारने के लिए नये शिक्षा सत्र की शुरुआत और जिले के कमजोर व वंचित वर्गों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के विषय पर भी विस्तार से चर्चा और समीक्षा की गई।

  • स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र: शिक्षा विभाग के जिला अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि आगामी नए शैक्षणिक सत्र के लिए बच्चों के प्रवेश और स्कूल नामांकन अभियान (School Enrollment) को पूरी गति दी जाए।

  • सामग्री का समयबद्ध वितरण: सरकारी स्कूलों में दर्ज बच्चों को समय पर निःशुल्क पाठ्य-पुस्तकें, स्कूल यूनिफॉर्म (गणवेश) और बालिकाओं को साइकिल वितरण का कार्य बिना किसी देरी या लापरवाही के पूरा किया जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई सुचारू रूप से शुरू हो सके।

  • पेंशन और सामाजिक सुरक्षा का लाभ: श्रम विभाग और सामाजिक न्याय विभाग को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया कि मुख्यमंत्री जन कल्याण (संबल) योजना, आदिवासी क्षेत्रों में गंभीर रूप से पाई जाने वाली सिकल सेल (Sickle Cell) बीमारी से पीड़ित मरीजों की आर्थिक सहायता/पेंशन और वृद्धावस्था पेंशन के जितने भी नए या लंबित प्रकरण हैं, उनका त्वरित गति से निराकरण किया जाए।

बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की रही प्रमुख उपस्थिति: बड़वानी कलेक्ट्रेट सभागृह में आयोजित इस महत्वपूर्ण समय-सीमा और समन्वय बैठक में जिला प्रशासन के आला अधिकारी मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सुश्री काजल जावला, सहायक कलेक्टर श्री माधव अग्रवाल, अपर कलेक्टर (ADM) श्री सोहन कनाश, और संयुक्त कलेक्टर श्री रवि वर्मा सहित जिले के सभी प्रमुख विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। इसके अलावा, बड़वानी जिले के दूरस्थ अनुविभागीय (Sub-divisional) एवं विकासखण्ड (Block) स्तर के समस्त अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार, जनपद सीईओ एवं कर्मचारीगण वीडियो कांफ्रेंसिंग (Video Conferencing) के माध्यम से इस बैठक में वर्चुअली शामिल हुए और कलेक्टर के निर्देशों से अवगत हुए।

अंत में यह स्पष्ट किया गया कि इन सभी निर्देशों के पालन का प्रतिवेदन आगामी समय-सीमा बैठक में प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।

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