बैतूल जिले में प्रशासनिक कसावट और शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने बुधवार, 22 जुलाई 2026 को प्रभातपट्टन विकासखंड के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों का औचक भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने शासकीय योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन का बारीकी से जायजा लिया। कलेक्टर के इस दौरे का मुख्य केंद्र ग्राम रगड़गांव स्थित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला रही, जहां उन्होंने विद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण किया। इस दौरान सामने आई प्रशासनिक लापरवाहियों पर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल और कड़े प्रशासनिक निर्देश जारी किए, जिससे जिले के शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
रगड़गांव शाला का औचक निरीक्षण और शैक्षणिक गुणवत्ता की परख
बुधवार को निर्धारित समयानुसार बैतूल जिले के प्रभातपट्टन विकासखंड के ग्राम रगड़गांव पहुंचे कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे सीधे प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में दाखिल हुए। उन्होंने स्कूल के कक्षाओं का मुआयना किया और बच्चों की पठन-पाठन शैली को खुद परखा।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने केवल कागजी दावों पर भरोसा न करते हुए सीधे विद्यार्थियों से संवाद स्थापित किया। उन्होंने बच्चों के साथ आत्मीय माहौल में बातचीत की और शिक्षकों से कुल दर्ज छात्र-संख्या तथा प्रतिदिन उपस्थित रहने वाले विद्यार्थियों का पूरा विवरण मांगा। बच्चों की बौद्धिक क्षमता और बुनियादी शिक्षा के स्तर को जांचने के लिए कलेक्टर ने विद्यार्थियों से कविताएं सुनीं। इसके साथ ही, गणितीय कौशल की परीक्षा लेते हुए बच्चों से जोड़, घटाव, गुणा और भाग से जुड़े कई सवाल पूछे।
कलेक्टर के इन सवालों का बच्चों ने उत्साहपूर्वक उत्तर दिया। विद्यालय के कुछ विद्यार्थियों ने अपनी बुद्धिमत्ता और उत्कृष्ट प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। विशेष रूप से छात्राओं में लावण्या और दीपा तथा छात्र वीर ने गणित और पठन में बेहतरीन प्रदर्शन किया। कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने इन मेधावी बच्चों की खुलकर सराहना की और उनका उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
आधारभूत शिक्षा (फाउंडेशन लर्निंग) पर विशेष जोर
बच्चों की शैक्षणिक प्रगति का जायजा लेने के बाद कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने विद्यालय के शिक्षकों को अत्यंत महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बच्चों की आधारभूत शिक्षा यानी 'फाउंडेशन लर्निंग' पर विशेष ध्यान दिया जाना आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
कलेक्टर ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि प्राथमिक कक्षाओं के स्तर पर ही बच्चों की नींव मजबूत की जानी चाहिए। यदि शुरुआती कक्षाओं में ही बच्चे का बेस मजबूत होगा, तो वह भविष्य की उच्च कक्षाओं की जटिल पढ़ाई को आसानी से समझ सकेगा। उन्होंने शिक्षकों को हिदायत दी कि वे बच्चों को रटने की प्रवृत्ति से दूर करें और तार्किक रूप से सीखने के लिए प्रेरित करें, ताकि बैतूल जिले के ग्रामीण अंचल के नौनिहाल शैक्षणिक प्रतिस्पर्धा में पीछे न रहें।
तीन साल से अनुपस्थित शिक्षक पर टर्मिनेशन के सख्त निर्देश
निरीक्षण के दौरान स्कूल के रजिस्टर और स्टाफ विवरण की जांच करने पर एक चौंकाने वाला और गंभीर मामला सामने आया। अभिलेखों के अनुसार, विद्यालय में पदस्थ शिक्षिका जयवंती अहाके पिछले तीन लंबे वर्षों से स्कूल से पूरी तरह अनुपस्थित चल रही थीं।
बिना किसी आधिकारिक सूचना या वैध अवकाश के इतने लंबे समय तक गायब रहने और ड्यूटी से नदारद रहने के इस मामले को कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने बेहद गंभीरता से लिया। इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने संबंधित शिक्षक के विरुद्ध तत्काल विभागीय जांच पूरी कर उन्हें टर्मिनेट (सेवा से बर्खास्त) करने के सख्त निर्देश दिए।
इसके साथ ही, कलेक्टर ने इस गंभीर लापरवाही को इतने लंबे समय तक दबाकर रखने और प्रकरण को अनावश्यक रूप से लंबित रखने वाले संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने निर्देश दिए कि इस पूरे मामले में संलिप्त पाए जाने वाले अधिकारियों के विरुद्ध भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की प्रशासनिक लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो सके।
विद्यालय परिसर और बुनियादी सुविधाओं का जायजा
शैक्षणिक गतिविधियों के बाद कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने पूरे विद्यालय परिसर का पैदल भ्रमण किया और वहां उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की जमीनी हकीकत परखी। इस दौरान उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया:
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पेयजल व्यवस्था: विद्यालय में बच्चों के लिए उपलब्ध पेयजल स्रोतों की जांच की गई और गर्मियों तथा अन्य मौसमों में शुद्ध पानी की निरंतरता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
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शौचालय की स्थिति: निरीक्षण के दौरान यह खामी पाई गई कि विद्यालय के शौचालय में पानी की आधुनिक टंकी नहीं थी। इस पर तत्काल संज्ञान लेते हुए कलेक्टर ने पंचायत एवं शिक्षा विभाग को तुरंत समन्वय स्थापित कर शौचालय में पानी की टंकी की समुचित व्यवस्था करवाने के निर्देश दिए।
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विद्युत व्यवस्था: कक्षाओं में पर्याप्त रोशनी और सुचारू बिजली आपूर्ति की स्थिति का जायजा लिया गया। उन्होंने निर्देश दिए कि विद्यालय में बिजली व्यवस्था हर हाल में सुचारू रहनी चाहिए ताकि किसी भी स्थिति में विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
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मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की गुणवत्ता: कलेक्टर ने मध्यान्ह भोजन कक्ष का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने रसोई में जाकर यह जानकारी ली कि भोजन निर्धारित शासकीय मेन्यू के अनुसार तैयार हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही उन्होंने खुद दाल और सब्जी की गुणवत्ता की जांच की और रसोइयों तथा प्रभारियों को उच्च गुणवत्तायुक्त एवं पौष्टिक भोजन ही बच्चों को परोसने के कड़े निर्देश दिए।
ढांचागत सुधार और मरम्मत के निर्देश
ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने पंचायत और संबंधित निर्माण विभागों को कई त्वरित निर्देश प्रदान किए।
विद्यालय परिसर की सुरक्षा और सुव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए, पंचायत को तत्काल प्रभाव से स्कूल परिसर में बाउंड्री वॉल का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, बारिश और कीचड़ के मौसम में विद्यार्थियों को स्कूल आने-जाने में किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए परिसर और पहुंच मार्ग पर पेविंग ब्लॉक लगाने के निर्देश भी दिए गए।
भ्रमण के दौरान परिसर में एक भवन अत्यधिक जर्जर अवस्था में पाया गया। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्देशित किया कि इस जर्जर और खतरनाक भवन को तत्काल प्रभाव से गिराया (ध्वस्त किया) जाए, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय दुर्घटना से बचा जा सके।
निष्कर्ष
बैतूल जिले के प्रभातपट्टन विकासखंड के रगड़गांव स्कूल का यह औचक निरीक्षण यह स्पष्ट करता है कि जिला प्रशासन ग्रामीण शिक्षा की गुणवत्ता और स्कूलों में अनुशासन को लेकर बेहद गंभीर है। कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे द्वारा उठाए गए कड़े कदम—चाहे वह तीन साल से गायब शिक्षक को बर्खास्त करने का निर्देश हो, आधारभूत शिक्षा पर जोर देना हो, या फिर विद्यालय की भौतिक और मूलभूत कमियों को तुरंत दूर करवाना हो—यह जिले के शैक्षणिक ढांचे में सुधार की एक मजबूत बानगी पेश करते हैं। इस प्रकार के प्रशासनिक दौरों से न केवल लापरवाह कर्मियों में भय व्याप्त होता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में व्यवस्थाएं भी तेजी से पटरी पर आती हैं।
image source : https://betul.mpinfo.org
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