बैतूल। जिले में स्थित ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण और जल संसाधन प्रबंधन को बेहतर बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने सक्रिय कदम उठाए हैं। इसी कड़ी में, बैतूल कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने बुधवार को प्रभातपट्टन तहसील का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने ऐतिहासिक शेरगढ़ किले के साथ-साथ वर्धा डैम का भी निरीक्षण किया। कलेक्टर ने मौके पर मौजूद अधिकारियों को ऐतिहासिक संरचनाओं के रखरखाव और किसानों तक सिंचाई के पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण निर्देश दिए।

ऐतिहासिक शेरगढ़ किले का अवलोकन

कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने सर्वप्रथम प्रभातपट्टन स्थित ऐतिहासिक शेरगढ़ किले का दौरा किया। यह किला क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने किले के इतिहास के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने किले की प्राचीन दीवारों, बावड़ियों और वहां मौजूद अन्य पुरातात्विक संरचनाओं का बारीकी से अवलोकन किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से इन संरचनाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में पूछा। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शेरगढ़ किले का संरक्षण समय की मांग है, इसलिए इसके रखरखाव और जीर्णोद्धार के लिए एक ठोस योजना तैयार की जाए ताकि भविष्य में इसे पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित किया जा सके। उन्होंने किले के पीछे बहने वाली वर्धा नदी की भौगोलिक स्थिति और उसके ऐतिहासिक महत्व के संबंध में भी संबंधित अधिकारियों से चर्चा की।

वर्धा डैम का निरीक्षण और सिंचाई व्यवस्था पर जोर

किले के बाद कलेक्टर डॉ. सोनवणे ने वर्धा डैम का निरीक्षण किया। यह डैम जिले के किसानों के लिए सिंचाई का मुख्य आधार है। यहाँ पहुंचकर उन्होंने डैम के पंप हाउस, मशीन ऑपरेटर कक्ष और सुरक्षा संबंधी अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर ने डैम से जुड़ी तकनीकी जानकारी लेते हुए अधिकारियों से सिंचाई के लिए पानी के वितरण की वर्तमान स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी।

कलेक्टर ने निर्देशित किया कि:

  • किसानों को पानी की उपलब्धता: यह सुनिश्चित किया जाए कि सिंचाई के लिए किसानों को आवश्यकतानुसार जल वितरण समय पर हो, ताकि उनकी फसलों को कोई नुकसान न हो।

  • तकनीकी रखरखाव: पंप हाउस और अन्य मशीनी कक्षों में किसी भी प्रकार की तकनीकी खामी नहीं होनी चाहिए। नियमित रूप से उपकरणों का रखरखाव सुनिश्चित किया जाए।

  • सुदृढ़ जल प्रबंधन: जल वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता बनाए रखने के निर्देश दिए गए ताकि डैम का जल स्तर और वितरण सही अनुपात में बना रहे।

प्रशासनिक जवाबदेही और भविष्य की रूपरेखा

कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे का यह दौरा प्रशासनिक संवेदनशीलता को दर्शाता है। एक ओर जहाँ उन्होंने ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता जाहिर की, वहीं दूसरी ओर कृषि क्षेत्र में जल संसाधन के महत्व को समझते हुए सिंचाई व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए।

बैतूल जिले में इस तरह के दौरों से जमीनी स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता में सुधार आता है और स्थानीय समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पाता है। अधिकारियों को स्पष्ट किया गया है कि वे समय-समय पर इन स्थलों का निरीक्षण करते रहें और यदि कोई समस्या आती है, तो उसे तत्काल उच्च अधिकारियों के संज्ञान में लाएं।

कलेक्टर के इस दौरे से क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों में एक सकारात्मक संदेश गया है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि यदि शेरगढ़ किले का संरक्षण और वर्धा डैम की व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण इसी प्रकार होता रहा, तो क्षेत्र का सर्वांगीण विकास तेजी से होगा।

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