कटनी। भारत को वर्ष 2025 तक टीबी (तपेदिक) मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने एक अत्यंत प्रभावी डिजिटल कदम उठाया है। इसी क्रम में 'टीबी मुक्त भारत' (ई-संगिनी) ऐप को एक सशक्त माध्यम के रूप में पेश किया गया है। कटनी जिले में इस राष्ट्रीय अभियान को प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने विशेष पहल की है। उन्होंने जिले में इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के व्यापक प्रचार-प्रसार और आम नागरिकों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
टीबी जैसी गंभीर बीमारी का उन्मूलन केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए सामुदायिक स्तर पर जनभागीदारी और जागरूकता की आवश्यकता है। 'टीबी मुक्त भारत' ऐप इसी दिशा में नागरिकों, मरीजों, स्वयंसेवकों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच एक सेतु का कार्य कर रहा है।
'टीबी मुक्त भारत' ऐप: एक समग्र डिजिटल समाधान
'टीबी मुक्त भारत' ऐप को इस प्रकार विकसित किया गया है कि यह एक ही डिजिटल मंच पर स्वास्थ्य सेवाओं और टीबी संबंधी जानकारी को सुलभ बनाता है। यह ऐप राष्ट्रीय तपेदिक उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के लिए एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। ऐप की प्रमुख विशेषताओं में शामिल हैं:
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विस्तृत जानकारी का भंडार: यह ऐप टीबी के शुरुआती लक्षणों, संक्रमण से बचाव के उपायों, जाँच की सुविधा और उपचार प्रक्रिया के बारे में संपूर्ण एवं सटीक जानकारी प्रदान करता है।
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मरीजों के लिए सहायता: टीबी मरीजों को निक्षय मित्रों और स्वयंसेवकों से सीधे जोड़ने में यह ऐप मददगार है, जिससे मरीजों को मानसिक और सामाजिक संबल प्राप्त होता है।
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उपचार की निगरानी: ऐप के माध्यम से मरीजों के पोषण किट के वितरण का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा सकता है और दवा के नियमित सेवन की निगरानी में भी यह सहायक सिद्ध होता है।
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पारदर्शिता: यह डिजिटल प्लेटफॉर्म सेवाओं की पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिससे स्वास्थ्य कार्यक्रमों का लाभ सीधे अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचता है।
कलेक्टर के निर्देश: जनआंदोलन बनेगा टीबी उन्मूलन अभियान
कटनी जिले में टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को गति देने के लिए कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने इसे 'जनआंदोलन' के रूप में विकसित करने का आह्वान किया है। उन्होंने सभी विभागों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए हैं ताकि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से टीबी की सटीक जानकारी हर नागरिक की पहुँच में हो।
कलेक्टर श्री तिवारी का मानना है कि यह ऐप न केवल स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का माध्यम है, बल्कि यह टीबी मरीजों की देखभाल को सुदृढ़ करने वाला एक व्यावहारिक उपकरण भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि निक्षय मित्रों और स्वयंसेवकों के साथ मरीजों का जुड़ाव उपचार की सफलता दर को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है।
जनभागीदारी से सफलता की राह
अभियान को जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने के लिए कलेक्टर ने त्रिस्तरीय रणनीति पर जोर दिया है:
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व्यापक सहभागिता: इस मुहिम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, आशा एवं आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, एएनएम (ANM), एनएसएस/एनसीसी स्वयंसेवक, माय भारत वॉलंटियर्स, जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों को शामिल किया गया है।
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ऑन-स्पॉट डाउनलोड: प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर विशेष 'ऐप डाउनलोड अभियान' चलाया जाएगा। विभिन्न शिविरों और बैठकों के दौरान स्थल पर ही नागरिकों के फोन में ऐप डाउनलोड करवाकर उन्हें इसके उपयोग से अवगत कराया जाएगा।
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QR कोड का उपयोग: जनसामान्य को जागरूक करने के लिए QR कोड और डाउनलोड लिंक का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि तकनीकी बाधाओं को दूर किया जा सके।
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टीबी चैंपियंस की भूमिका: जो मरीज टीबी को मात दे चुके हैं, उन 'टीबी चैंपियंस' को भी इस अभियान का हिस्सा बनाया जाएगा ताकि वे दूसरों को उपचार के लिए प्रेरित कर सकें।
कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे 'टीबी मुक्त भारत' ऐप को न केवल स्वयं डाउनलोड करें, बल्कि अपने आसपास के लोगों को भी ऐसा करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनभागीदारी ही टीबी उन्मूलन की सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है। कटनी जिले में इस डिजिटल सशक्तिकरण के माध्यम से टीबी मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।
Image Source: https://katni.mpinfo.org
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