बुरहानपुर जिले में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण को बढ़ाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे पौधारोपण अभियान के अंतर्गत रविवार का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। ऐतिहासिक असीरगढ़ किले के समीप इंदौर हाईवे के किनारे एक भव्य 'पलाश बीजारोपण अभियान' का आयोजन किया गया। इस महाअभियान का नेतृत्व डिप्टी कलेक्टर श्री राजेश पाटीदार ने किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य न केवल खाली पड़े क्षेत्रों में हरियाली फैलाना है, बल्कि पलाश जैसे औषधीय और पर्यावरणीय महत्व वाले वृक्षों के संरक्षण को बढ़ावा देना भी है।

अभियान में अधिकारियों और युवाओं की सक्रिय भागीदारी

इस विशाल बीजारोपण अभियान में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर स्कूली छात्रों तक ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभियान की मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • नेतृत्व: इस पूरे कार्यक्रम का सफल आयोजन और संचालन डिप्टी कलेक्टर श्री राजेश पाटीदार के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।

  • प्रशासनिक उपस्थिति: कार्यक्रम में डिप्टी कलेक्टर श्री भागीरथ वाखला, कृषि उपसंचालक श्री एम.एस. देवके और सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्री भरत जांचपुरे विशेष रूप से उपस्थित रहे।

  • जन-भागीदारी: अभियान में विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों, शिक्षकों, शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय के छात्रों और ट्रायम्फल आर्च एकेडमी के लगभग 150 विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ श्रमदान किया।

  • श्रमदान का जज्बा: सभी प्रतिभागियों ने गेती और फावड़ों की मदद से जमीन पर गड्ढे खोदे और उनमें वैज्ञानिक तरीके से पलाश के बीजों का रोपण किया।

पलाश का महत्व: बुरहानपुर की जलवायु के लिए अनुकूल

इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों ने पलाश के वृक्षों के महत्व पर विस्तृत चर्चा की। डिप्टी कलेक्टर श्री राजेश पाटीदार ने प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए कहा कि पलाश न केवल अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि इसके औषधीय गुण भी बेजोड़ हैं। उन्होंने बताया कि पलाश के बीज प्रकृति के कठिन से कठिन हालात में भी जीवित रहने की क्षमता रखते हैं।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पलाश का वृक्ष बुरहानपुर की स्थानीय जलवायु के लिए सबसे उपयुक्त है। यह कम पानी और विपरीत परिस्थितियों में भी न केवल स्वयं विकसित होता है, बल्कि अपने आसपास के पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) को भी मजबूत बनाता है। पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से पलाश का चयन एक दूरदर्शी निर्णय है, जो भविष्य में इस क्षेत्र को एक नई पहचान देगा।

पिछले सफलताओं से मिली प्रेरणा

इस अभियान के दौरान एक बहुत ही सकारात्मक पहलू देखने को मिला। प्रतिभागियों ने पिछले वर्ष धूपगट्टा और झिरी की पहाड़ियों पर किए गए बीजारोपण कार्यों का अवलोकन किया। जब उन्होंने वहां पलाश के उन बीजों को आज लहलहाते हुए छोटे पौधों के रूप में देखा, तो सभी के चेहरे खिल उठे। पिछले वर्ष की सफलता ने इस वर्ष के अभियान को और अधिक ऊर्जा प्रदान की। यह साबित करता है कि यदि सही दिशा में और सही समय पर प्रयास किया जाए, तो प्रकृति का संरक्षण करना कठिन नहीं है। इन लहलहाते पौधों को देखकर युवाओं में पर्यावरण के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना और भी अधिक प्रबल हुई।

पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प

कार्यक्रम के अंत में, सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से पर्यावरण संरक्षण और पौधों की सुरक्षा का संकल्प लिया। केवल बीज रोप देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सुरक्षा और देखभाल करना भी उतना ही आवश्यक है। अधिकारियों ने प्रतिभागियों को प्रेरित किया कि वे न केवल इस अभियान का हिस्सा बनें, बल्कि समय-समय पर आकर इन पौधों की वृद्धि की निगरानी भी करें।

बुरहानपुर प्रशासन का यह प्रयास स्थानीय स्तर पर एक जन-आंदोलन का रूप लेता जा रहा है। पर्यावरण के प्रति जागरूक बुरहानपुर की जनता का यह उत्साह आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुखद और स्वच्छ भविष्य की आधारशिला रखेगा। असीरगढ़ की ऐतिहासिक भूमि अब हरित क्रांति के एक नए अध्याय की गवाह बन रही है।

निष्कर्ष

30 हजार पलाश के बीजों का रोपण मात्र एक संख्या नहीं है, बल्कि यह आने वाले वर्षों में हजारों की संख्या में वृक्षों के उगने की उम्मीद है। प्रशासनिक इच्छाशक्ति और युवाओं की ऊर्जा का यह संगम पर्यावरण के क्षेत्र में एक अनुकरणीय उदाहरण है। बुरहानपुर प्रशासन की यह पहल न केवल जिले को हरा-भरा बनाएगी, बल्कि आने वाले समय में यहाँ की जैव विविधता (Biodiversity) को भी संरक्षित करेगी। ऐसे अभियानों की सफलता ही प्रकृति के प्रति हमारी कृतज्ञता को सिद्ध करती है।

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