छतरपुर : मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में सुशासन और जन-सेवा के संकल्प को चरितार्थ करते हुए छतरपुर जिले के नौगांव जनपद अंतर्गत ग्राम अलीपुरा में एक ऐतिहासिक रात्रि चौपाल का आयोजन किया गया। कलेक्टर पार्थ जैसवाल के नेतृत्व में आयोजित इस चौपाल ने न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को सुना, बल्कि शासन और जनता के बीच की दूरी को पाटने का भी काम किया। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय अलीपुरा के परिसर में आयोजित इस शिविर में देर रात तक प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय रही, जहां एक-एक ग्रामीण की फरियाद को गंभीरता से सुना गया।

जन-संवाद का नया अध्याय: रात्रि चौपाल की संकल्पना

लोकतंत्र में जनता की भागीदारी और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान ही सुशासन की असली पहचान है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने अलीपुरा में रात्रि चौपाल का आयोजन किया। आमतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग दिन के समय अपने खेतों या मजदूरी में व्यस्त रहते हैं, जिसके कारण वे कार्यालयों के चक्कर नहीं काट पाते। रात्रि चौपाल की इस पहल ने उन ग्रामीणों को एक मंच प्रदान किया, जो अपनी बात सक्षम अधिकारियों तक नहीं पहुंचा पा रहे थे। इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि यहां केवल कागजी कार्यवाही नहीं हुई, बल्कि मौके पर मौजूद अधिकारियों को तत्काल निराकरण के निर्देश दिए गए।

प्रशासनिक अमले और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति

इस रात्रि चौपाल में केवल प्रशासनिक अधिकारी ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई। क्षेत्रीय विधायक कामाख्या प्रताप सिंह ने ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी समस्याओं को समझा और प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर उनके समाधान की दिशा में प्रयास किए। विधायक की उपस्थिति ने ग्रामीणों में यह विश्वास जगाया कि सरकार और प्रशासन उनके कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उनके साथ जिला पंचायत सीईओ नमः शिवाय अरजरिया, एसडीएम जीएस पटेल सहित विभिन्न विभागों के जिला और विकासखंड स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे।

रात्रि चौपाल के मुख्य आकर्षण और प्रमुख मुद्दे

शिविर के दौरान राजस्व, विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े सैकड़ों आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने स्वयं एक-एक ग्रामीण से सीधे संवाद किया। चौपाल में निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया:

1. राजस्व संबंधी प्रकरणों का निस्तारण: ग्रामीणों ने नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और पट्टे से संबंधित शिकायतें दर्ज कराईं। कलेक्टर ने राजस्व विभाग के अमले को निर्देशित किया कि लंबित प्रकरणों को समय सीमा के भीतर निपटाया जाए और किसी भी ग्रामीण को अनावश्यक परेशानी न हो।

2. आधार और राशन कार्ड की समस्याएं: कई ग्रामीणों ने राशन कार्ड में नाम जुड़वाने और आधार कार्ड की त्रुटियों को लेकर अपनी बात रखी। मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को पात्रता पर्ची और राशन वितरण की विसंगतियों को दूर करने के आदेश दिए गए।

3. प्रधानमंत्री आवास योजना: आवास योजना की किस्तों के भुगतान और नए सर्वेक्षण में नाम जोड़ने की मांग भी प्रमुखता से उठी। जिला पंचायत सीईओ ने ग्राम पंचायत सचिवों को निर्देशित किया कि पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ पारदर्शी तरीके से मिलना सुनिश्चित करें।

4. बिजली और पानी की आपूर्ति: गर्मी के मौसम को देखते हुए पेयजल की उपलब्धता और विद्युत आपूर्ति में आ रही बाधाओं पर ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त की। कलेक्टर ने पीएचई विभाग और बिजली कंपनी के अधिकारियों को तत्काल सुधार के निर्देश दिए।

5. शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं: स्कूल परिसर में आयोजित इस चौपाल में स्थानीय स्कूल की व्यवस्थाओं और स्वास्थ्य केंद्र की कार्यप्रणाली पर भी चर्चा हुई। कलेक्टर ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर दिया।

अधिकारियों की जवाबदेही और कड़े निर्देश

कलेक्टर पार्थ जैसवाल ने चौपाल में स्पष्ट किया कि जन-सेवा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत दी कि जो आवेदन इस शिविर में प्राप्त हुए हैं, उनका निराकरण केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर दिखना चाहिए। एसडीएम और जनपद सीईओ को इन आवेदनों की नियमित मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कलेक्टर ने कहा कि प्रशासन का लक्ष्य है कि अंतिम छोर के व्यक्ति को भी शासन की योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिले।

विधायक कामाख्या प्रताप सिंह का संबोधन

चौपाल को संबोधित करते हुए क्षेत्रीय विधायक कामाख्या प्रताप सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार प्रशासन अब जनता के द्वार पर आ रहा है। उन्होंने अलीपुरा क्षेत्र के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से जनता का सरकारी तंत्र पर भरोसा बढ़ता है। उन्होंने कलेक्टर पार्थ जैसवाल की इस पहल की सराहना की और ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि उनकी हर समस्या का समाधान करना उनकी प्राथमिकता है।

ग्रामीणों में उत्साह और संतोष का भाव

अलीपुरा और आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे पुरुष और महिलाओं ने इस आयोजन की प्रशंसा की। ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार उन्होंने किसी कलेक्टर को इतनी रात तक उनके बीच बैठकर उनकी छोटी-छोटी समस्याओं को सुनते देखा है। यह सीधे संवाद की प्रक्रिया भ्रष्टाचार और लेटलतीफी को खत्म करने में कारगर सिद्ध होगी। शिविर के अंत तक सैकड़ों आवेदनों का पंजीकरण किया गया और कई मामलों में तो मौके पर ही आदेश जारी कर दिए गए।

भविष्य की रणनीति और सुशासन का मॉडल

मध्य प्रदेश के इस क्षेत्र में रात्रि चौपाल का यह मॉडल अब अन्य तहसीलों और गांवों में भी लागू किए जाने की योजना है। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के 'राजस्व एवं जन समस्या निवारण शिविर' न केवल शिकायतों का निपटारा करते हैं, बल्कि सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का भी सशक्त माध्यम बनते हैं। अलीपुरा की यह रात्रि चौपाल आने वाले समय में जिले के अन्य क्षेत्रों के लिए एक प्रेरणा बनेगी, जहां जनता और प्रशासन मिलकर क्षेत्र के विकास की नई इबारत लिखेंगे।

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