सारनी। पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में कार्यरत महिला मजदूरों के साथ कथित आर्थिक शोषण, वेतन कटौती और ठेकेदार द्वारा दबाव बनाए जाने का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। लंबे समय से अपने अधिकारों और मेहनताना के लिए संघर्ष कर रहीं महिला मजदूरों ने अब जिला प्रशासन से सीधी न्याय की मांग की है। इसी क्रम में पीड़ित महिला मजदूरों ने जिला कलेक्टर कार्यालय बैतूल पहुंचकर अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रखी और पूरे मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की।
महिला मजदूरों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा उन्हें वेतन का भुगतान तो किया जाता है, लेकिन बाद में उस राशि का बड़ा हिस्सा वापस करने के लिए दबाव बनाया जाता है। मजदूरों के अनुसार उन्हें “एक देकर ढाई हिस्सा वापस लेने” जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, जो खुला आर्थिक शोषण है। मजदूरों ने कहा कि मेहनत से कमाई गई मजदूरी पर इस तरह का दबाव न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि श्रम कानूनों और मानवीय अधिकारों का भी खुला उल्लंघन है।
इस मामले को और गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि घटना से संबंधित वीडियो फुटेज भी सामने आया है, जिसमें कथित रूप से महिला मजदूरों से पैसा वापस लेते हुए देखा जा सकता है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया है और प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम ने मजदूरों के आरोपों को और मजबूत कर दिया है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल बना हुआ है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर नरेन्द्र सूर्यवंशी ने संज्ञान लिया है और एक बार फिर केंद्रीय श्रम अधिकारी को पूरे प्रकरण की जानकारी देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि प्रशासनिक स्तर पर संज्ञान लिए जाने के बावजूद मजदूरों का कहना है कि अब तक उन्हें वास्तविक राहत नहीं मिल सकी है। उनका आरोप है कि कई दौर की बैठकों, आश्वासनों और चर्चाओं के बाद भी बकाया वेतन भुगतान और शोषण की समस्या जस की तस बनी हुई है।
मजदूरों के अनुसार यह विवाद कोई नया नहीं है, बल्कि 4 फरवरी से लगातार यह मुद्दा विभिन्न स्तरों पर उठाया जा रहा है। कई बार प्रबंधन, ठेकेदार और आंदोलनरत मजदूरों के बीच बैठकों का दौर चला, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। महिला मजदूरों का कहना है कि उन्हें बार-बार भरोसा दिलाया गया कि उनकी समस्या का समाधान होगा, लेकिन अब तक न तो बकाया राशि का भुगतान हुआ और न ही शोषण के आरोपों पर कोई ठोस कार्रवाई सामने आई।
स्थिति अब धीरे-धीरे तनावपूर्ण होती जा रही है। मजदूरों का कहना है कि एक ओर उन्हें काम से रोका जा रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रबंधन उन्हीं मजदूरों पर काम बाधित करने और खदान संचालन प्रभावित करने के आरोप लगा रहा है। इससे मजदूरों में और अधिक असंतोष बढ़ रहा है। महिला मजदूरों ने कहा कि वे केवल अपना हक और मेहनत की पूरी मजदूरी मांग रही हैं, लेकिन उनकी जायज मांगों को अनदेखा किया जा रहा है।
महिला मजदूरों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सामने आए वीडियो की गंभीरता से जांच हो, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और मजदूरों को उनका बकाया वेतन तत्काल दिलाया जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि भविष्य में किसी भी मजदूर, विशेषकर महिला श्रमिकों, के साथ इस प्रकार की जबरदस्ती, धमकी या आर्थिक शोषण न हो, इसके लिए ठोस व्यवस्था बनाई जाए।
इस पूरे मामले ने पाथाखेड़ा क्षेत्र की कोयला खदानों में काम कर रहे श्रमिकों की स्थिति और उनके श्रम अधिकारों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है और पीड़ित महिला मजदूरों को कब तक न्याय मिल पाता है।

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