दमोह: दमोह शहर के हृदय स्थल में स्थित सिविल वार्ड क्रमांक 06, सुभाष कॉलोनी के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। वर्षों से वर्षा ऋतु के दौरान जलभराव और बाढ़ जैसी विभीषिका झेल रहे इस क्षेत्र की समस्या के स्थायी समाधान के लिए एक व्यापक कार्ययोजना तैयार कर ली गई है।
पूर्व मंत्री एवं वर्तमान दमोह विधायक श्री जयंत मलैया ने इस गंभीर जनसमस्या को प्राथमिकता देते हुए नगरीय प्रशासन एवं आवास मंत्री श्री कैलाश विजयवर्गीय को एक पत्र प्रेषित किया है। इस पत्र के माध्यम से उन्होंने सुभाष कॉलोनी में जलभराव की समस्या के निवारण हेतु आवश्यक बजट की मांग की है।
इस महत्वपूर्ण परियोजना और क्षेत्र की स्थिति का विस्तृत विवरण निम्नलिखित बिंदुओं में प्रस्तुत है:
1. समस्या की गंभीरता और भौगोलिक स्थिति
सुभाष कॉलोनी दमोह शहर का एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ विविधतापूर्ण बसावट है, लेकिन बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यहाँ के नागरिक प्रतिवर्ष संकट का सामना करते हैं।
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बसावट का स्वरूप: सुभाष कॉलोनी में पक्के मकानों के साथ-साथ बड़ी संख्या में कच्चे मकान भी मौजूद हैं। यहाँ के निवासी आर्थिक रूप से अलग-अलग पृष्ठभूमि से आते हैं, जिनके लिए जलभराव एक बड़ी आर्थिक और मानसिक क्षति का कारण बनता है।
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मुख्य बरसाती नाला: बस्ती के किनारे से एक मुख्य बरसाती नाला गुजरता है। यही नाला बारिश के मौसम में उफान पर आने के कारण पूरी कॉलोनी के लिए खतरे का सबब बन जाता है।
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स्थायी खतरा: नाले की क्षमता कम होने और रुकावटों के कारण बारिश का पानी रिहायशी इलाकों में घुस जाता है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो जाता है।
2. अतीत की भयावह स्मरणीय घटनाएं (वर्ष 2004-2005)
विधायक श्री जयंत मलैया ने अपने पत्र में अतीत की उन घटनाओं का भी उल्लेख किया है, जो इस समस्या की गंभीरता को प्रमाणित करती हैं:
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जलमग्न मकान: वर्ष 2004 और 2005 में दमोह में हुई भारी वर्षा के दौरान सुभाष कॉलोनी के निचले हिस्सों की स्थिति बेहद खराब हो गई थी। यहाँ के अधिकांश मकान पूरी तरह जलमग्न हो गए थे।
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रेस्क्यू ऑपरेशन: स्थिति इतनी नाजुक थी कि आपदा राहत टीम (Disaster Relief Team) को मैदान में उतरना पड़ा था। नावों के माध्यम से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को घरों से निकालकर सुरक्षित स्थानों तक पहुँचाया गया था।
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राहत शिविर: प्रभावित परिवारों के लिए प्रशासन द्वारा राहत शिविरों का आयोजन किया गया था, जहाँ उनके ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई थी।
3. प्रशासन द्वारा की गई अब तक की कार्रवाई
समस्या के समाधान के लिए केवल कागजी कार्यवाही ही नहीं, बल्कि धरातल पर भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं:
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संयुक्त सीमांकन: राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन और नगर पालिका की एक संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्र और नाले का विस्तृत सीमांकन (Demarcation) किया है।
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अतिक्रमण हटाना: नाले के प्रवाह में बाधा बन रहे अतिक्रमणों को चिन्हित कर उन्हें हटाया गया है, ताकि पानी की निकासी का मार्ग प्रशस्त हो सके।
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नाला खुदाई: नाले की आवश्यक चौड़ाई सुनिश्चित करने के लिए उसकी खुदाई का कार्य भी कराया गया है, जिससे वर्तमान में जल निकासी में कुछ सुधार हुआ है।
4. प्रस्तावित मास्टर प्लान: 5.43 करोड़ की कार्ययोजना
भविष्य में बाढ़ जैसी स्थिति दोबारा निर्मित न हो, इसके लिए मुख्य नगर पालिका अधिकारी, दमोह द्वारा एक वैज्ञानिक और विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है:
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प्रस्ताव की स्वीकृति: इस प्रस्ताव को तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति हेतु नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय, भोपाल भेजा गया है।
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परियोजना के दो मुख्य भाग:
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चौड़ीकरण: सुभाष कॉलोनी के मुख्य नाले का पूरी क्षमता के साथ चौड़ीकरण किया जाएगा।
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नया निर्माण: एलआईसी (LIC) ऑफिस के सामने से होते हुए सेंट्रल स्कूल तक एक नए अत्याधुनिक नाले का निर्माण प्रस्तावित है।
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कुल अनुमानित लागत: इन दोनों विकास कार्यों के लिए कुल 543.65 लाख रुपये (लगभग 5.43 करोड़ रुपये) का प्राक्कलन (Estimate) तैयार किया गया है।
5. जनसुरक्षा और आगामी लक्ष्य
विधायक श्री मलैया और स्थानीय प्रशासन का मुख्य उद्देश्य आगामी मानसून से पहले सुरक्षा तंत्र को मजबूत करना है:
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त्वरित स्वीकृति का अनुरोध: पत्र में सरकार से अनुरोध किया गया है कि जनहित और जनसुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए इस राशि को शीघ्र आवंटित किया जाए।
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समय सीमा: लक्ष्य यह है कि वर्षा ऋतु के प्रारंभ होने से पहले निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया जाए, ताकि इस वर्ष सुभाष कॉलोनी के नागरिकों को घर छोड़ने या नावों का सहारा लेने की आवश्यकता न पड़े।
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स्थायी राहत: यह योजना केवल तात्कालिक समाधान नहीं, बल्कि अगले कई दशकों तक जलभराव की समस्या को समाप्त करने के दृष्टिकोण से बनाई गई है।
निष्कर्ष:
दमोह विधायक श्री जयंत मलैया की यह पहल सुभाष कॉलोनी के हजारों निवासियों के लिए नई उम्मीद लेकर आई है। 5.43 करोड़ रुपये की यह योजना न केवल बुनियादी ढांचे का विकास करेगी, बल्कि नागरिकों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा भी सुनिश्चित करेगी। अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है, और उम्मीद जताई जा रही है कि नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय इस महत्वपूर्ण परियोजना को शीघ्र हरी झंडी देंगे, जिससे दमोह के इस वार्ड को 'जलभराव मुक्त' बनाया जा सके।
image source : https://damoh.mpinfo.org

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