गंजबासौदा। सरकारी व्यवस्थाओं पर जनता का भरोसा मजबूत करने की दिशा में गंजबासौदा एसडीएम श्रीमती अनुभा जैन ने एक ऐसी पहल की है, जिसकी हर तरफ प्रशंसा हो रही है। 'कथनी और करनी' के अंतर को पाटते हुए एसडीएम ने अपने बच्चों का नामांकन स्थानीय आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। उनका यह कदम उन अभिभावकों के लिए एक बड़ा संदेश है जो सरकारी केंद्रों की बजाय निजी प्ले-स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं।
निजी स्कूलों के दौर में सरकारी व्यवस्था पर जताया भरोसा
आज के दौर में जहाँ सक्षम परिवार और अधिकारी वर्ग अपने बच्चों को महंगे निजी स्कूलों और प्री-नर्सरी संस्थानों में भेजना शान समझते हैं, वहीं एक प्रशासनिक अधिकारी का अपने बच्चों को आंगनबाड़ी भेजना चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इस पहल से न केवल आंगनबाड़ी केंद्रों की छवि सुधरेगी, बल्कि आम जनमानस में भी सरकारी योजनाओं के प्रति विश्वास पैदा होगा।
"पहले खुद अपनाओ, फिर जनता को बताओ" का संदेश
एसडीएम अनुभा जैन के इस निर्णय को प्रशासन की "पहले खुद अपनाओ, फिर जनता को बताओ" की नीति के रूप में देखा जा रहा है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी स्वयं सरकारी तंत्र का हिस्सा बनते हैं, तो व्यवस्था की गुणवत्ता और निगरानी में स्वतः ही सुधार आता है।
ग्रामीणों का कहना है: "जब साहब के बच्चे आंगनबाड़ी में पढ़ेंगे, तो निश्चित रूप से वहां की शिक्षा, पोषण और सुविधाओं का स्तर और बेहतर होगा। यह हम सभी के लिए प्रेरणादायक है।"
आंगनबाड़ी केंद्रों में मिलती हैं ये सुविधाएं
विदित हो कि आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुविधाएं दी जाती हैं:
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प्रारंभिक शिक्षा: खेल-खेल में बच्चों को अक्षर और अंकों का ज्ञान।
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पौष्टिक आहार: बच्चों के शारीरिक विकास के लिए संतुलित भोजन और नाश्ता।
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स्वास्थ्य सेवा: नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, टीकाकरण और वजन की निगरानी।
सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच इस कदम को मील का पत्थर माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि एसडीएम की इस पहल के बाद क्षेत्र के अन्य लोग भी अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ेंगे, जिससे सरकारी शिक्षा और पोषण अभियान को नई गति मिलेगी।

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