मंडी में बहा किसानों का गेहूं, अन्नदाताओं की मेहनत पर पानी, बेमौसम बारिश का कहर
गढाकोटा । सागर जिले में बेमौसम बारिश ने ऐसा कहर बरपाया कि अन्नदाताओं की सालभर की मेहनत कुछ ही घंटों में पानी में बह गई। सोमवार के दिन गढ़ाकोटा कृषि उपज मंडी में हालात इतने भयावह हो गए कि किसानों का गेहूं नालियों में बहता नजर आया। गढ़ाकोटा तहसील में करीब तीन घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने मंडी परिसर को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। खुले में रखा हजारों क्विंटल गेहूं बारिश के पानी में भीग गया। निकासी की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मंडी में पानी भर गया और देखते ही देखते अनाज की बोरियां पानी में तैरने लगीं।
स्थिति इतनी खराब हो गई कि कई जगहों पर गेहूं नालियों के साथ बहता दिखाई दिया। अपनी आंखों के सामने मेहनत को यूं बहते देख किसानों का दर्द छलक पड़ा। कई किसान मायूस होकर सिर पकड़कर बैठ गए। इस बीच किसानों ने व्यापारियों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि फसल का सौदा पहले ही हो चुका था और व्यापारी गेहूं खरीद चुके थे, केवल तौल बाकी थी। लेकिन जैसे ही अनाज भीगा, व्यापारियों ने उसे लेने से साफ इनकार कर दिया।
किसानों का कहना है कि जब सौदा तय हो गया था, तो जिम्मेदारी भी साझा होनी चाहिए थी। लेकिन अब व्यापारी पीछे हट रहे हैं, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है एक तरफ कुदरत का कहर, दूसरी तरफ बाजार की बेरुखी। मंडी प्रबंधन की तैयारियों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। अगर पानी निकासी की बेहतर व्यवस्था होती, तो शायद इतना नुकसान टाला जा सकता था। अब पीड़ित किसान प्रशासन और सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि तुरंत सर्वे कर नुकसान का आकलन किया जाए और उचित मुआवजा दिया जाए, ताकि उनकी टूटी उम्मीदों को सहारा मिल सके। बड़ा सवाल यही है क्या अन्नदाता की मेहनत का मोल मिलेगा या फिर हर बार की तरह वे ही नुकसान उठाते रहेंगे

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