पानी की तलाश में भटकते समय कुएं में गिरा चीतल, ग्रामीणों ने दी सूचना
गढाकोटा । गर्मी के साथ ही वन्य प्राणी पानी की तलाश में जंगलों से खेतों की में ओर रुख करने लगे हैं। इससे इनके जलस्रोतों में गिरने के समाचार आने लगे हैं। ऐसा ही मामला रविवार को गढ़ाकोटा वन परिक्षेत्र के तहत आने वाले दरारिया मुर्गा क्षेत्र में सामने आया। यहां एक चीतल खेत में बने कुएं में गिर गया। ग्रामीणों की सूचना व वन विभाग की तत्परता घायल चीतल को मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया गया। जानकारी के अनुसार, ग्राम दरारिया मुर्गा क्षेत्र के ग्रामीणों ने खेत के पास बने एक गहरे कुएं में चीतल को गिरते हुए देखा। वन्य प्राणी को संकट में पाकर ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए इसकी सूचना गढ़ाकोटा वन विभाग के ने अधिकारियों को दी।
सूचना मिलते ही वन विभाग का अमला साजो-सामान के साथ तत्काल मौके पर पहुंच गया। ग्रामीणों ने बताया कि चीतल पानी की तलाश में खेत की ओर आया था। जो कुऐ में गिर गया जिसकी सूचना तत्काल दी गई। रेस्क्यू के तुरंत बाद घायल चीतल को पशु चिकित्सालय गढ़ाकोटा ले जाया गया। जहां चीतल का उपचार जारी है और उसे डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जैसे ही चीतल पूरी तरह स्वस्थ हो जाएगा,उसे वापस जंगल में छोड़ दिया जायेगा।
चुनौतीपूर्ण रहा रेस्क्यू ऑपरेशन
कुआं गहरा होने के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में सावधानी बरतना जरूरी था। वन विभाग की टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए रेस्क्यू उपकरणों और रस्सियों की मदद से उपचार और पुनर्वास उसके प्राकृतिक आवास यानी जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया जाएगा। ग्रामीणों द्वारा समय पर दी गई सूचना ने एक बेजुबान की जान बचा ली। रेंजर ने कहा कि वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। कड़ी मशक्कत के बाद चीतल को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, कुएं की गहराई में गिरने के कारण चीतल को शरीर पर चोटें आई हैं। जिसका उपचार किया जा रहा है।
अभी और बढ़ेगी समस्या
सागर जिले में गर्मी के दिनों में इस तरह की घटनाएं आम हैं। गर्मी के मौसम में नदी,नालों से लेकर तालाब तलैया का पानी सूख जाता है। इस स्थिति में गांव के लोगों को भी एक-दो किमी दूर से पीने का पानी भरकर लाना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर जंगल में रहने वाले वन्य प्राणियों भी पानी की तलाश में गांवों की ओर भी
आते हैं। सागर जिले के बंडा, रहली,राहतगढ़,देवरी सहित रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से लगे क्षेत्रों से हर वर्ष इनके कुओं में गिरने की खबरें भी आती हैं। हालांकि टाइगर रिजर्व में विभाग के द्वारा पानी के पौंड बनवाए जाते हैं, जिनमें पानी डाला इंस जाता है। वहीं कुछ जागरूक नागरिक भी जंगल से सटे इलाकों में जंगली जानवरों,पशु व पक्षियों की प्यास बुझाने इंतजाम में करते हैं, जिससे वन्य प्राणियों व पक्षियों को प्यास बुझाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। दिन वहीं वन अधिकारियों का कहना है कि वे पानी के इंतजाम करते हैं।

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