आमला। पुलिस का नाम आते ही लोगों के मन में कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की छवि बनती है, लेकिन कई बार पुलिस ऐसी मानवीय मिसाल भी पेश करती है जो समाज में विश्वास और संवेदना को मजबूत करती है। ऐसा ही एक सराहनीय कार्य जीआरपी थाना आमला ने "ऑपरेशन हमदर्द" के तहत कर दिखाया। जीआरपी की सतर्कता, संवेदनशीलता और अथक प्रयासों से करीब 10 वर्षों से अपने परिवार से बिछड़े बिहार निवासी मो. कौशर को उसके परिजनों से सकुशल मिलवा दिया गया।

रेल पुलिस भोपाल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक राजाबाबू सिंह के निर्देशन, पुलिस अधीक्षक रेल अंकित जायसवाल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतू डाबर तथा उप पुलिस अधीक्षक महेन्द्र सिंह कुल्हारा के मार्गदर्शन में जीआरपी आमला द्वारा रेलवे स्टेशन पर लगातार ऑपरेशन हमदर्द चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान 9 जुलाई 2026 को स्टेशन पर गश्त के समय पुलिस टीम को एक व्यक्ति फटे-पुराने कपड़ों में लावारिस अवस्था में मिला। उसकी मानसिक और शारीरिक स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उसे अपने संरक्षण में लिया तथा भोजन और पानी उपलब्ध कराया।

पूछताछ में उसने अपना नाम मो. कौशर पिता घुरो मियां (उम्र 50 वर्ष) निवासी ग्राम मझौला, थाना मझौला, जिला बेगूसराय (बिहार) बताया। उसने बताया कि वह लगभग 8 से 10 वर्षों से घर से दूर भटक रहा है और अलग-अलग स्थानों पर भीख मांगकर जीवन-यापन कर रहा है। उसके पास कोई पहचान पत्र या दस्तावेज नहीं था, जिससे उसकी पहचान करना आसान नहीं था।

*तकनीक और सूझबूझ से मिला परिवार का सुराग*

थाना प्रभारी प्रमोद पाटिल के निर्देशन में पुलिस टीम ने हार नहीं मानी। गूगल के माध्यम से बिहार के मझौला थाना का संपर्क नंबर प्राप्त कर थाना प्रभारी फैसल अंसारी से संपर्क किया गया। मो. कौशर की फोटो और वीडियो भेजे गए। थाना प्रभारी ने स्थानीय पार्षद इरशाद खान से संपर्क कराया, जिन्होंने फोटो देखकर बताया कि यह व्यक्ति उनके गांव का ही रहने वाला है।

इसके बाद वीडियो कॉल के माध्यम से मो. कौशर की बात उसके भाई मो. अली हसन और अन्य परिजनों से कराई गई। वर्षों बाद अपने बिछड़े भाई को सामने देखकर परिजन भावुक हो उठे। भाई ने रोते हुए उसकी पहचान की पुष्टि की और तुरंत बिहार से आमला के लिए रवाना हो गया।

*मानवीयता का परिचय, नए कपड़े पहनाए और कराया भोजन*

परिजनों के आमला पहुंचने तक जीआरपी ने मो. कौशर को अपने संरक्षण में रखा। उसे नहलाकर नए वस्त्र पहनाए गए, सम्मानपूर्वक भोजन कराया गया और उसकी पूरी देखभाल की गई। 10 जुलाई 2026 को उसका भाई मो. अली हसन आमला पहुंचा। आवश्यक पहचान और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद जीआरपी ने मो. कौशर को सकुशल उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया।

करीब एक दशक बाद हुए इस भावुक मिलन ने वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम कर दीं। पुलिस के इस मानवीय कार्य की हर ओर सराहना हो रही है।

*इन पुलिसकर्मियों की रही महत्वपूर्ण भूमिका*

इस सराहनीय कार्य में थाना प्रभारी उनि. प्रमोद पाटिल, प्रधान आरक्षक अतर सिंह, रविश कुमार, कुलदीप लोटे, आरक्षक खुशरु नरें, सोनेश राठौर, संदीप जगदेव, कमलेश, महिला आरक्षक पूजा, आरक्षक सनोज धुर्वे तथा विजय इवने की महत्वपूर्ण एवं प्रशंसनीय भूमिका रही।

*जीआरपी आमला का यह कार्य केवल एक व्यक्ति को उसके परिवार से मिलाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह साबित करता है कि संवेदनशील पुलिसिंग समाज में भरोसा, मानवता और रिश्तों को जोड़ने का भी माध्यम बन सकती है।*