गुना। ग्रामीण विकास और अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुँचाने के उद्देश्य से गुना जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिले के मारकी महू ग्राम में आयोजित रात्रि चौपाल के दौरान कलेक्टर श्री किशोर कुमार कन्याल ने ग्रामीणों और कृषकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया। यह चौपाल केवल एक औपचारिक बैठक न रहकर, गाँव के सर्वांगीण विकास का एक रोडमैप बनकर उभरी, जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और कौशल विकास जैसे मूलभूत विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
1. गाँव को 'आदर्श पंचायत' बनाने का संकल्प
चौपाल की शुरुआत करते हुए कलेक्टर श्री कन्याल ने अपनी दूरदर्शी सोच को साझा किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन का मुख्य उद्देश्य मारकी महू को एक आदर्श पंचायत के रूप में विकसित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आदर्श गाँव केवल भौतिक संरचनाओं से नहीं, बल्कि वहाँ के निवासियों की आत्मनिर्भरता और जागरूकता से बनता है।
युवाओं के लिए कौशल विकास और स्वरोजगार: कलेक्टर ने विशेष रूप से युवाओं के भविष्य पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने जानकारी दी कि:
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क्षेत्र में स्थापित नई आईटीआई (ITI) के माध्यम से लगभग 120 बच्चों को विभिन्न ट्रेडों में तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया जा सकता है।
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इस प्रशिक्षण का उद्देश्य युवाओं को केवल नौकरी के योग्य बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें इस काबिल बनाना है कि वे स्वयं का व्यवसाय या लघु उद्योग शुरू कर सकें।
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कौशल विकास विभाग द्वारा आईटीआई के विभिन्न कोर्सों और उनसे मिलने वाले रोजगार के अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
2. “प्राकृतिक खेती अपनाएं, बीमारियों से बचें”
कृषि प्रधान क्षेत्र होने के नाते, चौपाल का एक बड़ा हिस्सा किसानों की समस्याओं और उनके समाधान पर केंद्रित रहा। कलेक्टर श्री कन्याल ने रासायनिक खेती के दुष्प्रभावों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
प्राकृतिक कृषि का महत्व: किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में यूरिया और विभिन्न रासायनिक खादों के अंधाधुंध उपयोग से ऐसा प्रतीत होता है कि उत्पादन बढ़ रहा है, लेकिन यह एक भ्रामक स्थिति है। वास्तविकता यह है कि इन रसायनों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता नष्ट हो रही है और समाज में बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों से निम्नलिखित आह्वान किए:
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प्राकृतिक खेती की ओर वापसी: रसायनों का त्याग कर प्राकृतिक खाद और पद्धति को अपनाएं।
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आधुनिक तकनीक का समन्वय: पारंपरिक ज्ञान के साथ आधुनिक कृषि यंत्रों और तकनीकों का उपयोग करें।
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विविधीकरण: केवल पारंपरिक फसलों तक सीमित न रहकर हॉर्टिकल्चर (बागवानी) और हाइब्रिड बीजों के उपयोग की ओर बढ़ें।
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सफल मॉडल: कलेक्टर ने देश के विभिन्न हिस्सों में कृषि के सफल मॉडलों के उदाहरण साझा किए, जिन्हें अपनाकर किसान अपनी आय को दोगुना कर सकते हैं।
3. ग्रामीणों से सीधा संवाद और समस्याओं का निवारण
रात्रि चौपाल की सबसे बड़ी विशेषता इसका संवादात्मक स्वरूप रहा। कलेक्टर ने बिना किसी औपचारिक बाधा के ग्रामीणों के बीच बैठकर उनकी बात सुनी।
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विशेषताओं पर चर्चा: ग्रामीणों ने अपने गाँव की सांस्कृतिक और भौगोलिक विशेषताओं के बारे में कलेक्टर को अवगत कराया।
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समस्याओं का समाधान: ग्रामीणों ने विकास कार्य, बिजली, पानी और बुनियादी ढांचे से जुड़ी अपनी समस्याओं को साझा किया। कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को इन समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।
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सुझावों का स्वागत: विकास की प्रक्रिया में ग्रामीणों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उनके सुझावों को भी प्राथमिकता दी गई।
4. विभिन्न विभागों द्वारा दी गई योजनाओं की जानकारी
कार्यक्रम में जिला प्रशासन के विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और किसानों के कल्याण हेतु संचालित योजनाओं का ब्यौरा प्रस्तुत किया:
1. कृषि और उद्यानिकी विभाग
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ड्रिप सिंचाई प्रणाली: गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई) के लाभ और उस पर मिलने वाली सब्सिडी के बारे में बताया गया।
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आधुनिक खेती: कम लागत में अधिक मुनाफे के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियों और उन्नत किस्म के हाइब्रिड बीजों के चयन पर मार्गदर्शन दिया गया।
2. पशुपालन विभाग
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पशुधन के स्वास्थ्य और विकास हेतु चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी गई। पशुपालकों को बताया गया कि कैसे डेयरी और अन्य संबंधित व्यवसायों के माध्यम से वे अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकते हैं।
3. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
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पंचायत स्तर पर चल रहे निर्माण कार्यों, मनरेगा और अन्य ग्राम विकास योजनाओं की समीक्षा की गई। ग्रामीणों को बताया गया कि वे कैसे इन योजनाओं का लाभ उठाकर गाँव के विकास में सहभागी बन सकते हैं।
4. स्वास्थ्य एवं कौशल विभाग
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स्वास्थ्य विभाग: सरकारी अस्पतालों में मिलने वाली निःशुल्क जाँच, दवाइयों और आयुष्मान भारत जैसी महत्वपूर्ण स्वास्थ्य योजनाओं के बारे में ग्रामीणों को जागरूक किया गया।
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कौशल विकास: आईटीआई के माध्यम से तकनीकी शिक्षा और स्वरोजगार के लिए मिलने वाली वित्तीय सहायता के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
5. स्व-सहायता समूह (SHG)
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विभिन्न सहायता समूहों द्वारा किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का प्रदर्शन किया गया। सफल मॉडलों की जानकारी देकर अन्य कृषकों और महिलाओं को समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया गया।
5. प्रशासनिक अधिकारियों की गरिमामय उपस्थिति
इस भव्य चौपाल कार्यक्रम में गुना जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी सम्मिलित हुए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
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श्री अभिषेक दुबे, मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जिला पंचायत।
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श्रीमती शिवानी पांडे, एसडीएम (SDM) गुना।
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विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारी।
चौपाल के अंत में कलेक्टर ने विश्वास दिलाया कि मारकी महू को एक मॉडल गाँव के रूप में स्थापित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन की इस पहल की सराहना की और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया।
image source:https://guna.mpinfo.org
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