आमला (बैतूल)। प्रदेश सरकार एक ओर "स्कूल चले अभियान", छात्रवृत्ति, साइकिल वितरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जैसी योजनाओं के माध्यम से सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने का दावा कर रही है, वहीं बैतूल जिले के आमला स्थित बेसिक शासकीय कन्या हाई स्कूल की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। विद्यालय में पीने के पानी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से छात्राओं को प्यास बुझाने के लिए स्कूल परिसर से बाहर जाना पड़ रहा है। कई छात्राएं स्कूल गेट के बाहर राहगीरों से पानी मांगती भी दिखाई दीं, जिससे शिक्षा व्यवस्था और छात्राओं की सुरक्षा दोनों पर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।
जानकारी के अनुसार स्कूल गेट के सामने न्यू मार्केट की मुख्य सड़क पर स्थापित वाटर कूलर मशीन ही छात्राओं के लिए पानी का एकमात्र सहारा बनी हुई है। विद्यालय परिसर में पर्याप्त पेयजल उपलब्ध नहीं होने के कारण 9वीं से 12वीं तक की छात्राएं बार-बार स्कूल से बाहर निकलकर इसी मशीन से पानी पीने पहुंचती हैं। कई बार उन्हें वहां मौजूद लोगों से भी पानी मांगना पड़ता है, जो किसी भी सरकारी विद्यालय के लिए चिंताजनक स्थिति है।
*सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में*
मामला केवल पेयजल तक सीमित नहीं है। विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर कोई गेटकीपर या सुरक्षा कर्मचारी तैनात नहीं है। न्यू मार्केट क्षेत्र दिनभर व्यस्त और भीड़भाड़ वाला रहता है। स्कूल लगने और छुट्टी के समय यहां भारी आवाजाही रहती है। ऐसे में छात्राओं का बार-बार विद्यालय से बाहर निकलना सुरक्षा की दृष्टि से भी गंभीर चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पूर्व में छेड़छाड़ और साइबर अपराध जैसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं, इसलिए छात्राओं को स्कूल परिसर के भीतर ही सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
*कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना*
घटना को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व सदस्य एडवोकेट रमेश दामले ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, डिजिटल शिक्षा, छात्रवृत्ति और साइकिल वितरण की बात तो करती है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पीने के पानी जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यदि आदिम जाति छात्रावास में ठंडे पानी की मशीन स्थापित की जा सकती है तो शासकीय कन्या हाई स्कूल में भी ऐसी व्यवस्था तत्काल की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि विद्यालय परिसर के भीतर स्वच्छ पेयजल की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि छात्राओं को पानी पीने के लिए स्कूल के बाहर न जाना पड़े और उनकी सुरक्षा भी बनी रहे।
*प्राचार्य से नहीं हो सका संपर्क*
मामले में स्कूल का पक्ष जानने के लिए प्राचार्य प्रमिला सावले से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
*इनका कहना है*
"प्राचार्य महोदया द्वारा पेयजल व्यवस्था के संबंध में नगर पालिका के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को आवेदन दिया गया है।"
*धीरेंद्र साहू, शिक्षा खंड अधिकारी, आमला*
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