कटनी जिले के जिला चिकित्सालय में व्याप्त जलभराव और गंदगी की समस्या के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। कलेक्टर आशीष तिवारी द्वारा अस्पताल परिसर का औचक निरीक्षण करने के कुछ ही घंटों के भीतर ड्रेनेज सुधार कार्य को धरातल पर उतार दिया गया है। कलेक्टर ने अस्पताल की अव्यवस्थाओं पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मरीजों के स्वास्थ्य से जुड़े इस संवेदनशील संस्थान में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन की इस त्वरित कार्रवाई से न केवल अस्पताल प्रबंधन में हड़कंप मच गया है, बल्कि मरीजों और उनके परिजनों को भी राहत की उम्मीद जगी है।

कलेक्टर की नाराजगी और तत्काल निर्देश

शुक्रवार की सुबह कलेक्टर आशीष तिवारी जब जिला चिकित्सालय के औचक निरीक्षण पर पहुंचे, तो उन्होंने परिसर की बदहाल स्थिति को स्वयं देखा। अस्पताल की नालियां पूरी तरह जाम थीं और ड्रेनेज प्रणाली ध्वस्त होने के कारण परिसर में जलभराव की स्थिति बनी हुई थी। स्वच्छता के अभाव में फैली गंदगी को देखकर कलेक्टर ने मौके पर ही मौजूद अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जिला चिकित्सालय जैसे संवेदनशील संस्थान में जलभराव और गंदगी की स्थिति किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

कलेक्टर ने लोक निर्माण विभाग की परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू) और अस्पताल प्रशासन को संयुक्त जिम्मेदारी सौंपते हुए निर्देश दिए कि अगले तीन दिनों के भीतर जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान निकाला जाए। उन्होंने वर्षा ऋतु को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा कि भविष्य में अस्पताल परिसर में जलभराव की पुनरावृत्ति न हो।

तकनीकी अमला मैदान में, कार्य योजना तैयार

कलेक्टर के निर्देशों का असर कुछ ही घंटों के भीतर दिखाई देने लगा। शुक्रवार को ही मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के डिप्टी जनरल मैनेजर मानवेन्द्र सिंह, एसडीओ अभिराज सिंह और विभागीय इंजीनियरों की एक टीम ने अस्पताल परिसर का सघन तकनीकी सर्वेक्षण किया। टीम ने परिसर के जल निकासी मार्गों, नालियों की ढाल, और जल प्रवाह की दिशा का सूक्ष्म परीक्षण किया।

सर्वेक्षण के दौरान टीम ने उन सभी संवेदनशील स्थानों को चिन्हांकित किया जहां पानी का जमाव सबसे अधिक होता है। इंजीनियरों की टीम ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है, जिसके तहत अवरुद्ध नालियों को खोलने, उनका आकार बढ़ाने और ड्रेनेज नेटवर्क को तकनीकी मानकों के अनुरूप विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। संबंधित निर्माण एजेंसी और ठेकेदार को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि कार्य को पूरी गुणवत्ता के साथ और निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए।

स्थायी और वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था की परिकल्पना

अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन का उद्देश्य केवल तात्कालिक जल निकासी करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी स्थायी और वैज्ञानिक ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करना है, जो सालों-साल तक कारगर रहे। पीआईयू के अधिकारियों के अनुसार, अस्पताल परिसर में ढाल को दुरुस्त किया जाएगा ताकि बारिश का पानी कहीं भी न रुके और सीधे ड्रेनेज पाइपलाइन के जरिए बाहर निकल जाए।

इस सुधार कार्य के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि अस्पताल परिसर की स्वच्छता बनी रहे, ताकि आने वाले मरीजों, उनके परिजनों और चिकित्सकों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। जलभराव के कारण होने वाली सीलन और गंदगी से अस्पताल में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है, जिसे देखते हुए इस ड्रेनेज सुधार कार्य को 'हाई प्रायोरिटी' पर रखा गया है।

मरीजों और परिजनों को मिलेगी बड़ी राहत

जिला चिकित्सालय में प्रतिदिन हजारों की संख्या में मरीज उपचार के लिए आते हैं। जलभराव और गंदगी के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कभी-कभी अस्पताल के मुख्य द्वार और वार्डों के पास पानी जमा होने से आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता था। अब, कलेक्टर की इस पहल और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के बाद मरीजों को एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण मिलने की उम्मीद बंधी है।

स्थानीय निवासियों और मरीजों के परिजनों ने कलेक्टर की इस सख्ती का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन का यह कदम जिला चिकित्सालय की साख को बचाने और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए अत्यंत आवश्यक था।

भविष्य के लिए प्रशासन का कड़ा संदेश

कलेक्टर आशीष तिवारी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिले के सरकारी संस्थानों में स्वच्छता और रखरखाव के मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। ड्रेनेज सुधार के अलावा, अन्य आवश्यक मरम्मत कार्यों के लिए भी समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाएगी। निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों को भविष्य में ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी भी दी गई है।

अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया है कि आगामी दिनों में अस्पताल की सफाई व्यवस्था और रखरखाव के लिए एक बेहतर 'स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर' (SOP) तैयार किया जाएगा, ताकि व्यवस्थाएं सुचारू रूप से बनी रहें। ड्रेनेज सुधार का यह कार्य युद्धस्तर पर जारी है और उम्मीद है कि अगले कुछ ही दिनों में जिला चिकित्सालय का परिसर जलभराव की समस्या से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा।

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