कटनी जिले में वन अधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और पात्र हितग्राहियों को उनके अधिकार दिलाने की दिशा में जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी के निर्देशन में वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत लंबित एवं निरस्त दावों के पुनः परीक्षण के लिए पूरे जिले में एक व्यापक विशेष अभियान शुरू किया गया है। यह अभियान 1 जुलाई से प्रारंभ होकर 31 अक्टूबर 2026 तक निरंतर संचालित रहेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य वन भूमि पर आश्रित परिवारों और समुदायों को न्याय सुनिश्चित करना है।

अभियान का लक्ष्य और पृष्ठभूमि

वन अधिकार अधिनियम का मूल उद्देश्य उन जनजातीय समुदायों और अन्य परंपरागत वन निवासियों को भूमि का अधिकार प्रदान करना है, जो पीढ़ियों से वनों में निवास कर रहे हैं। कटनी जिले में पूर्व में 31 दिसंबर 2025 तक चले परीक्षण कार्यों के दौरान लगभग 87,233 दावे प्राप्त हुए थे, जिनमें से 20,994 दावों का निराकरण सफलतापूर्वक किया जा चुका है। वर्तमान में शेष बचे 66,239 दावों के निराकरण हेतु इस विशेष अभियान को पूरी प्राथमिकता के साथ चलाया जा रहा है।

अभियान के मुख्य बिंदु:

  • लंबित और निरस्त दावों पर फोकस: पूर्व में निरस्त किए गए दावों की समीक्षा कर उनका पुनः परीक्षण किया जाएगा।

  • नए दावों की स्वीकार्यता: अभियान के दौरान नवीन व्यक्तिगत (IFR) और सामुदायिक (CFR) वन अधिकार दावों को भी स्वीकार किया जाएगा।

  • प्रक्रिया में पारदर्शिता: दावों का परीक्षण पूरी तरह से पारदर्शी और नियमबद्ध तरीके से किया जाएगा।

तकनीकी और प्रक्रियात्मक कार्यप्रणाली

अभियान को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। दावों के निराकरण के लिए तकनीकी और मैनुअल, दोनों विधियों का उपयोग किया जाएगा:

  • पोर्टल के माध्यम से: व्यक्तिगत वन अधिकार दावों का परीक्षण और निराकरण अनिवार्य रूप से MPFRA Portal के माध्यम से डिजिटल रूप से किया जाएगा।

  • ऑफलाइन प्रक्रिया: सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन से संबंधित दावों का निराकरण शत-प्रतिशत ऑफलाइन मोड में किया जाएगा।

यह द्वि-स्तरीय प्रक्रिया सुनिश्चित करेगी कि प्रत्येक दावा सही साक्ष्यों और रिकॉर्ड के आधार पर जाँचा जाए, जिससे किसी भी पात्र हितग्राही का हक न छूटे।

ग्राम स्तर पर विशेष कैंप: जन-भागीदारी की भूमिका

कलेक्टर श्री आशीष तिवारी ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान की सफलता के लिए ग्रामीणों की भागीदारी अनिवार्य है। इसके लिए जिला प्रशासन ने एक व्यवस्थित कार्ययोजना तैयार की है:

  • ग्राम स्तरीय कैंप: जिले की प्रत्येक ग्राम पंचायत में विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे, जहाँ अधिकारी सीधे ग्रामीणों से संपर्क करेंगे।

  • पूर्व सूचना: ग्रामीणों को कैंप की तिथि और स्थान की जानकारी समय से पहले दी जाएगी ताकि वे अपने दावों से संबंधित आवश्यक दस्तावेज एकत्रित कर सकें।

  • समयबद्ध निराकरण: कलेक्टर ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे निर्धारित समय-सीमा के भीतर दावों का निस्तारण करें और किसी भी प्रकार की पेंडेंसी न रहने दें।

वन अधिकार और सामुदायिक सशक्तिकरण

यह अभियान न केवल भूमि पट्टे देने तक सीमित है, बल्कि यह सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन को भी सशक्त बनाता है। जब समुदाय को अपने वनों पर अधिकार मिलता है, तो वे पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आजीविका के साधनों के प्रति अधिक जागरूक और जिम्मेदार बनते हैं। कटनी जिले का प्रशासन इस अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित करना चाहता है कि वन अधिकार अधिनियम का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे।

ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे इस अवसर का लाभ उठाएं और यदि उनका पूर्व में कोई दावा निरस्त हुआ है या वे नया दावा प्रस्तुत करना चाहते हैं, तो संबंधित कैंप में अवश्य उपस्थित हों। प्रशासन की यह पहल वन निवासियों के जीवन में स्थिरता लाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने की एक सराहनीय कड़ी है।

निष्कर्ष

31 अक्टूबर तक चलने वाला यह विशेष अभियान कटनी जिले के विकास और सामाजिक न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। कलेक्टर श्री आशीष तिवारी का स्पष्ट मानना है कि यदि दावे का परीक्षण सही तरीके से हो, तो पात्र परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में आसानी होती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि आगामी चार महीनों में जिला प्रशासन शेष बचे 66,239 दावों के निराकरण में कितनी गति और सटीकता लाता है।

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