मध्य प्रदेश के केसली नगर में 'नल-जल योजना' की बदहाली: ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ अन्याय

मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत आने वाले केसली नगर में सरकार की महत्वपूर्ण 'नल-जल योजना' गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। योजना के सुचारू रूप से चालू होने के बावजूद, नगर के घरों तक पानी नहीं पहुँच पा रहा है। इसका कारण कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि लाखों रुपये का बिजली बिल बकाया होना है। इस कारण बिजली विभाग आए दिन पंप की बिजली काट देता है।

ईमानदार उपभोक्ताओं के साथ अन्याय

नगर के जागरूक नागरिक, जो समय पर जल कर और संपत्ति कर जमा करते हैं, खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। चंद लापरवाह लोगों की वजह से पूरे वार्ड और मोहल्लों की जलापूर्ति ठप हो जाती है, जिससे नियमित भुगतान करने वालों को भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरसना पड़ता है।

वसूली अमले की सुस्ती और बढ़ता आर्थिक बोझ

स्थानीय निकाय केसली की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वसूली के लिए तैनात अमला सुस्त पड़ा हुआ है। वे सिर्फ उन्हीं घरों में जाते हैं जहां से टैक्स भरा जाता है, जबकि बकायादारों के प्रति कोई कार्रवाई नहीं की जाती।

  • लाखों की उधारी: वसूली में ईमानदारी न बरतने के कारण निकाय का बकाया बिल लाखों रुपये तक पहुँच गया है।
  • चुप्पी साधे जिम्मेदार: समय रहते कठोर कार्रवाई न होने से बिजली कटने की नौबत आ गई है।

सुविधा सबको चाहिए, लेकिन जिम्मेदारी किसी को नहीं

नगर में एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसने न तो मकान का टैक्स भरा है और न ही नल-जल योजना का बिल। ताज्जुब की बात यह है कि जब भी पानी की सप्लाई में कमी आती है, तो सबसे ज्यादा विरोध वही लोग करते हैं जो सालों से बकायादार हैं।

सख्त नियमों की आवश्यकता

केसली के बुद्धिजीवियों और जागरूक नागरिकों का मानना है कि अब समय आ गया है जब सरकार और प्रशासन को सख्त कदम उठाने चाहिए:

  • स्वच्छता और कर लिंकअप: सरकारी सुविधाओं को कर भुगतान से जोड़ना चाहिए।
  • वसूली अमले की जवाबदेही: वसूली में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए।
  • कनेक्शन विच्छेदन: केवल उन्हीं लोगों के कनेक्शन काटे जाएं जो बिल नहीं भर रहे हैं, ताकि पूरे मोहल्ले को परेशानी न हो।

केसली नगर को यदि जल संकट से उबारना है, तो निकाय को सख्ती दिखानी होगी और नागरिकों को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। जब तक हर व्यक्ति कर भुगतान को अपना कर्तव्य नहीं समझेगा, तब तक ऐसी बुनियादी सुविधाएं संकट में ही रहेंगी।