गांव के श्मशान भूमि पर अतिक्रमण: ग्रामीणों को न्याय की आस
उचेहरा: जब गांव के मुखिया ही इस तरह के कार्य में संलग्न हों, तो ग्राम के समग्र विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है? श्यामनगर के श्मशान भूमि के अतिक्रमण की समस्या को लेकर ग्रामीणों ने कलेक्टर की जनसुनवाई में गुहार लगाई थी, लेकिन अभी तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। दो बार जनसुनवाई में आवेदन देने के बावजूद श्मशान भूमि का अतिक्रमण नहीं हटाया गया है, जबकि पूरा मामला तहसीलदार के संज्ञान में है।
जनसुनवाई में उठाई गई मांगें
ग्रामीणों ने पहले 16-12-25 और फिर 13-1-26 को जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में लिखित आवेदन देकर श्मशान भूमि के अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी। कहा जाता है कि श्यामनगर की करीब 10 हजार की बस्ती में एकमात्र श्मशान भूमि है, जिसका रकवा 0.784 हे0 है। वर्ष 2013-14 में यहां 4 लाख की लागत से चबूतरा, कुआं और टिन्च का निर्माण कराया गया था।
ग्राम पंचायत श्यामनगर की सरपंच राधाबाई कुशवाहा, उनके पति लक्ष्मीदीन कुशवाहा और जेठ स्वामीदीन कुशवाहा पर आरोप है कि उन्होंने दबंगई से श्मशान भूमि के आधे से ज्यादा हिस्से पर अतिक्रमण कर बाउंड्रीबाल बनाकर खेती शुरू कर दी है।
ग्रामीणों की चिंता
ग्रामीणों का कहना है कि ये लोग अपराधिक प्रवृत्ति के हैं और इनके खिलाफ बोलने में गांव वाले डरते हैं। इसी डर के चलते कोई इनके विरुद्ध आवाज़ नहीं उठाता। ग्रामीणों ने प्रशासन से अतिक्रमित भूमि को जल्द से जल्द मुक्त कराने की अपील की है।
प्रशासन का पक्ष
तहसीलदार ज्योति पटेल ने कहा, "मामला मेरे संज्ञान में है। मैंने मौके पर निरीक्षण किया था और वहां अतिक्रमण पाया गया। जैसे ही पटवारी की रिपोर्ट आती है, दल बल के साथ बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।"
ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या का समाधान करेगा और श्मशान भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराएगा।

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