मध्य प्रदेश के मैहर जिले में सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में एक अत्यंत सराहनीय और ऐतिहासिक कार्य को गति दी जा रही है। भारत सरकार के ‘ज्ञान भारतम’ (Gyan Bharatam) एप के माध्यम से मैहर की अमूल्य प्राचीन पाण्डुलिपियों को डिजिटल स्वरूप में सुरक्षित करने का अभियान तेजी से चल रहा है। मैहर कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी के मार्गदर्शन और निर्देशन में संचालित इस पहल ने न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। इस अभियान का मूल उद्देश्य हमारी प्राचीन ज्ञान परंपरा, हस्तलिखित ग्रंथों और सांस्कृतिक विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है।

मैहर में पाण्डुलिपि संरक्षण का डिजिटल अभियान

मैहर जिले को ‘ज्ञान भारतम’ एप के सॉफ्टवेयर में आधिकारिक रूप से 15 जून 2026 को शामिल किया गया था। तब से लेकर अब तक, बहुत ही कम समय में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से 90 से अधिक प्राचीन पाण्डुलिपियों को सफलतापूर्वक एप पर अपलोड किया जा चुका है।

इस महत्वपूर्ण कार्य में समाज के विभिन्न वर्गों का अभूतपूर्व सहयोग प्राप्त हो रहा है। विशेष रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों से प्राप्त सहयोग ने इस कार्य को सुलभ बनाया है:

  • धार्मिक संस्थान: जिले के विभिन्न मठों और मंदिरों के पास सुरक्षित प्राचीन ग्रंथों को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है।

  • ट्रस्ट एवं संस्थाएं: सार्वजनिक ट्रस्टों ने अपने पास उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों को संरक्षण के लिए सौंपा है।

  • व्यक्तिगत संग्राहक: कई ऐसे परिवार और व्यक्ति हैं जिन्होंने वर्षों से इन पांडुलिपियों को अपनी निजी धरोहर के रूप में सहेज कर रखा था।

  • प्रशासनिक सक्रियता: शासकीय कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन की टीम निरंतर जनजागरूकता फैलाकर लोगों को इस अभियान से जोड़ रही है।

संरक्षण की प्रक्रिया और पाण्डुलिपियों का चयन

‘ज्ञान भारतम’ एप की एक विशिष्ट शर्त है, जिसके तहत केवल उन्हीं पाण्डुलिपियों को प्राथमिकता दी जा रही है जो 75 वर्ष से अधिक पुरानी हैं। इस अभियान के दौरान ऐसी पांडुलिपियां भी प्रकाश में आई हैं, जो सैकड़ों वर्ष पुरानी हैं और जो हमारी प्राचीन भाषा, लिपि और ज्ञान की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं।

हाल ही में बद्री प्रसाद पाण्डेय एवं अरुण कुमार पयासी ने कलेक्टर मैहर से भेंट की। इस दौरान उन्होंने एप में अब तक अपलोड की गई पाण्डुलिपियों का विस्तृत अवलोकन कराया। उन्होंने मैहर कलेक्टर के समक्ष इन ग्रंथों के व्यापक संरक्षण और भविष्य की कार्ययोजनाओं के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। कलेक्टर ने इस कार्य की सराहना करते हुए इसे मैहर की गौरवशाली परंपरा को बचाने का एक सशक्त माध्यम बताया।

मैहर की प्रमुख संरक्षित प्राचीन पाण्डुलिपियां

इस अभियान के दौरान मैहर जिले से कई दुर्लभ ग्रंथ प्राप्त हुए हैं, जो न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि ऐतिहासिक अनुसंधान के लिए भी अमूल्य हैं। संरक्षित की गई प्रमुख पाण्डुलिपियों में शामिल हैं:

  1. सोनभद्र का महात्म: यह बृहद ब्रह्म पुराण का एक महत्वपूर्ण अंश है।

  2. धार्मिक ग्रंथ: श्रीमद भागवत महापुराण हस्तलिपि, वाल्मीकि रामायण (हस्तलिपि और बघेली संस्करण), एवं श्री महाभारत वन पर्व।

  3. ज्योतिष एवं शास्त्र: दशा चिंतामणि (हस्तलिपि संवत 1906), अथ प्रश्न जाति पूर्वक काल ज्ञान, अथ जातका भरणम।

  4. अन्य ऐतिहासिक कृतियां: महिदेव रत्नमाला, गंगाष्टक (हस्तलिपि संवत 1902), और तांबेइत्युप नामक गोपालस्य।

ये सभी पाण्डुलिपियां उस समय की लेखन शैली, स्याही के प्रयोग और कागज की गुणवत्ता को समझने के लिए भी शोध का विषय हैं।

सांस्कृतिक संरक्षण के लाभ और भविष्य की दृष्टि

मैहर में संचालित यह अभियान मात्र एक एप पर अपलोड करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके व्यापक अर्थ हैं:

  • ऐतिहासिक साक्ष्य: इन पाण्डुलिपियों के डिजिटल होने से भविष्य में इतिहासकार और शोधार्थी मैहर के सांस्कृतिक और धार्मिक इतिहास को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे।

  • जनजागरूकता: इस अभियान के कारण स्थानीय लोगों में अपनी पुरानी वस्तुओं और ग्रंथों को फेंकने के बजाय उन्हें सहेजने की प्रवृत्ति विकसित हुई है।

  • संरक्षण की संस्कृति: जब समाज के लोग अपनी निजी प्रतियों को प्रशासन के साथ मिलकर साझा करते हैं, तो एक सामूहिक जिम्मेदारी का भाव उत्पन्न होता है।

  • राष्ट्रीय पहचान: ज्ञान भारतम के जरिए मैहर की ये दुर्लभ पांडुलिपियां अब राष्ट्रीय पटल पर उपलब्ध होंगी, जिससे जिले की सांस्कृतिक पहचान और अधिक सशक्त होगी।

निष्कर्ष और आगे की राह

मैहर प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि यदि हम अपनी जड़ों को नहीं सहेजेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां अपने समृद्ध अतीत से वंचित रह जाएंगी। कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी के निर्देशन में मैहर जिला इस दिशा में एक अनुकरणीय कार्य कर रहा है। आने वाले समय में जिले के अन्य सुदूर क्षेत्रों में भी ऐसे और भी दुर्लभ ग्रंथों के मिलने की संभावना है, जिन्हें इसी तरह के वैज्ञानिक और डिजिटल तरीकों से संरक्षित किया जाएगा।

यह अभियान न केवल पाण्डुलिपियों को सड़ने-गलने से बचा रहा है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित डिजिटल आवरण भी प्रदान कर रहा है जो अनंत काल तक सुरक्षित रहेगा। मैहर की जनता का इस पहल में बढ़-चढ़कर भाग लेना यह सिद्ध करता है कि अपनी संस्कृति के प्रति मैहर के लोगों का लगाव आज भी अडिग है।

Image source: https://maihar.mpinfo.org