मैहर जिले में शासन की कल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने और आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित समाधान करने के उद्देश्य से एक व्यापक 'जनकल्याण शिविर' का आयोजन किया गया। शुक्रवार को जनपद पंचायत मैहर के प्रांगण में आयोजित इस शिविर ने न केवल प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को कम किया, बल्कि रिकॉर्ड समय में सैकड़ों समस्याओं का निस्तारण करके एक मिसाल कायम की। मैहर की कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस शिविर में बड़ी संख्या में स्थानीय निवासियों ने भाग लिया और अपनी समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा।

शिविर का आयोजन और जन भागीदारी

जनकल्याण शिविर का मुख्य उद्देश्य शासकीय योजनाओं के लाभ को सीधे पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाना था। शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिन भर चले इस कार्यक्रम में कुल 892 आवेदन प्राप्त हुए। प्रशासन की मुस्तैदी का परिचय देते हुए, इनमें से 746 आवेदनों का निराकरण मौके पर ही कर दिया गया। यह उपलब्धि दर्शाती है कि मैहर जिला प्रशासन आम जनता की शिकायतों के प्रति कितना संवेदनशील है। शेष बचे 146 आवेदनों को भी प्रशासन ने गंभीरता से लिया है और उन्हें एक निश्चित समय-सीमा के भीतर हल करने का ठोस आश्वासन दिया गया है।

इस महत्वपूर्ण आयोजन में जन-प्रतिनिधियों की भी सक्रिय भागीदारी रही। जनपद अध्यक्ष श्रीमती आकाश विनोद लोधी, उपाध्यक्ष विकास त्रिपाठी, जनपद सदस्य दीपक सिंह, कामता प्रसाद शुक्ला, सुदामा साकेत सहित बड़ी संख्या में सरपंच और पंचायत प्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके अतिरिक्त, एसडीएम श्रीमती दिव्या पटेल और सीईओ श्री अशोक तिवारी सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिससे समस्याओं के मौके पर समाधान में बड़ी मदद मिली।

प्रशासन का सख्त रुख और जनहित में निर्देश

कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी ने शिविर के दौरान स्पष्ट किया कि राज्य शासन की मंशा है कि कोई भी पात्र हितग्राही सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। उन्होंने अपने संबोधन में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया:

  • पात्र हितग्राहियों का चिन्हांकन: कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविर का उपयोग केवल शिकायतों को सुनने के लिए नहीं, बल्कि पात्र व्यक्तियों को चिन्हित करने के लिए भी किया जाए।

  • अधिकारियों की जवाबदेही: शिविर में सभी अनुविभाग और विकासखंड स्तरीय विभाग प्रमुखों की उपस्थिति को अनिवार्य बनाया गया था। कलेक्टर ने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी जनकल्याण शिविर से नदारद पाया गया, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

  • जन-प्रतिनिधियों से सहयोग की अपील: कलेक्टर ने सरपंचों और जनपद सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्र में जाकर पात्र लोगों की पहचान करें और उन्हें इन शिविरों तक लाने में प्रशासन का सहयोग करें।

शिविर का महत्व: शासन और जनता का सीधा संवाद

जनकल्याण शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि इसमें सभी विभागों के अधिकारी एक ही छत के नीचे मौजूद थे। अक्सर लोगों को अपनी एक समस्या के समाधान के लिए कई कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन इस शिविर ने उस बाधा को खत्म कर दिया। जब विभाग के प्रमुख स्वयं समस्याओं को सुनते हैं, तो निर्णय लेने की गति बढ़ जाती है और पात्र व्यक्ति को तत्काल लाभ प्राप्त हो जाता है।

शिविर में केवल पुरानी समस्याओं का समाधान ही नहीं हुआ, बल्कि अनेक नागरिकों को नई सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। प्रशासन का लक्ष्य है कि मैहर जिले का कोई भी पात्र नागरिक सरकारी सुविधाओं से अछूता न रहे। 146 लंबित आवेदनों के बारे में अधिकारियों ने बताया कि इनकी ट्रैकिंग की जा रही है और संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि इन पर तत्काल अमल किया जाए।

भविष्य की दिशा और सरकारी संकल्प

मैहर प्रशासन का यह कदम न केवल तात्कालिक समस्याओं का समाधान करता है, बल्कि जिले में 'सुशासन' की संस्कृति को भी विकसित कर रहा है। कलेक्टर श्रीमती बिदिशा मुखर्जी द्वारा व्यक्तिगत रूप से पूरी प्रक्रिया की निगरानी करना यह सिद्ध करता है कि जिला प्रशासन जनहित के कार्यों को लेकर कितना गंभीर है।

आने वाले समय में भी ऐसे शिविरों की निरंतरता बनी रहेगी ताकि ग्रामीण अंचलों तक विकास की किरण पहुँच सके। पंचायत प्रतिनिधियों का सक्रिय सहयोग और अधिकारियों की संवेदनशीलता के संगम से मैहर जनपद पंचायत में आयोजित यह शिविर मील का पत्थर साबित हुआ है। प्रशासन की यह कार्यप्रणाली आने वाले समय में अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है, जहाँ नौकरशाही का चेहरा मानवीय और सहयोगी बनकर उभरा है।

इस प्रकार के कार्यक्रमों से न केवल सरकारी योजनाओं का प्रसार होता है, बल्कि आम नागरिकों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया और प्रशासन पर विश्वास भी मजबूत होता है। मैहर जिला प्रशासन का यह 'जनसेवा मॉडल' निश्चित रूप से आने वाले समय में जिले की तस्वीर बदलने में सहायक सिद्ध होगा।

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