नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश।जिले के विकास को नई गति देने और बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से गुरुवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई इस संयुक्त बैठक में निर्माण कार्यों से जुड़े विभिन्न विभागों की प्रगति का सूक्ष्म विश्लेषण किया गया। श्रीमती सिंह ने स्पष्ट किया कि विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी या गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
1.बैठक में शामिल प्रमुख विभाग और परियोजनाएं
समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण विभागों और परियोजनाओं के कार्यों की स्थिति की जानकारी ली:
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लोक निर्माण विभाग (PWD): विभाग के अंतर्गत आने वाली प्रमुख सड़कों और भवनों की प्रगति।
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सिंचाई एवं बहुउद्देशीय परियोजनाएं: चिनकी बोरास बराज संयुक्त बहुउद्देशीय परियोजना और शक्कर पेंच लिंक संयुक्त परियोजना की समीक्षा।
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सड़क विकास: मप्र सड़क विकास निगम लिमिटेड (MPRDC) जबलपुर और मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) परियोजना इकाई नरसिंहपुर।
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भवन निर्माण: लोक निर्माण विभाग (भवन) पीआईयू के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्य।
2.प्रमुख बिंदु: समीक्षा बैठक के मुख्य निष्कर्ष और निर्देश
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह ने बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर कड़े निर्देश दिए, जिन्हें निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:
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समय-सीमा का कड़ाई से पालन:
कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए कि जिले में जितने भी लंबित (Pending) और वर्तमान में चल रहे (Ongoing) निर्माण कार्य हैं, उन्हें निर्धारित समय-सीमा के भीतर ही पूर्ण किया जाए। कार्य में अनावश्यक देरी करने वाली एजेंसियों पर कार्रवाई की बात भी कही गई।
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सघन मॉनिटरिंग और निरीक्षण:
उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि केवल कागजों पर प्रगति देखना पर्याप्त नहीं है। निर्माण कार्यों की लगातार 'साइट मॉनिटरिंग' की जाए ताकि काम की रफ्तार बनी रहे और आने वाली बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके।
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सड़क निर्माण कार्यों की विस्तृत समीक्षा:
बैठक में लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत आने वाले महत्वपूर्ण मार्गों की प्रगति पर विशेष चर्चा हुई, जिनमें प्रमुख हैं:
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गाडरवारा–तेंदूखेड़ा से भैंसा मार्ग
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पलोहा से काटजूनगर मार्ग
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एनएच-44 से सतधारा मार्ग
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खुलरी–देगुवां मार्ग
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पनागर से डुंगरिया मार्ग
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सुपारी से सड़ूमर मार्ग
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पिपरिया से इमलिया मार्ग
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शिक्षा और अन्य विभागों के निर्माण कार्य:
बैठक में अवगत कराया गया कि राजस्व, स्कूल शिक्षा, विधि एवं विधायी विभाग, राज्य शिक्षा केन्द्र, उच्च शिक्षा और कौशल विकास विभाग के अंतर्गत कुल 25 निर्माण कार्य स्वीकृत हैं। कलेक्टर ने इन विभागों के अंतर्गत ऐसे कार्य जो अभी तक शुरू नहीं हुए हैं (अप्रारंभ), उन्हें शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
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विभागीय समन्वय (Inter-departmental Coordination):
कलेक्टर ने जोर दिया कि विकास कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें। अक्सर विभागों के बीच तालमेल की कमी से कार्य रुक जाते हैं, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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गुणवत्ता सुनिश्चित करना:
समीक्षा के दौरान यह स्पष्ट किया गया कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता (Quality) सर्वोपरि है। सड़क हो या भवन, निर्माण के मानकों का पालन सुनिश्चित करना कार्यपालन यंत्रियों की जिम्मेदारी होगी।
3.विकास कार्यों का रोडमैप और भविष्य की रणनीति
कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह की इस पहल से जिले के निर्माण कार्यों में नई तेजी आने की उम्मीद है। बैठक का सार यह रहा कि:
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जवाबदेही तय करना: कार्यपालन यंत्रियों को उनके अधीन चल रहे कार्यों के प्रति जवाबदेह बनाया गया है।
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जनसुविधा पर ध्यान: जिन सड़कों की समीक्षा की गई, वे जिले की लाइफलाइन मानी जाती हैं, इनके पूर्ण होने से ग्रामीणों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
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पारदर्शिता: स्वीकृत 25 कार्यों की सूची और उनकी वर्तमान स्थिति की समीक्षा कर प्रशासन ने पारदर्शिता की ओर कदम बढ़ाया है।
4.निष्कर्ष
नरसिंहपुर जिले में अधोसंरचना विकास प्रशासन की प्राथमिकता में है। कलेक्टर की इस सक्रियता से न केवल सरकारी विभागों में कार्य के प्रति गंभीरता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता तक विकास योजनाओं का लाभ समय पर पहुँच सकेगा। बैठक के अंत में श्रीमती सिंह ने पुनः दोहराया कि निर्माण कार्यों में किसी भी स्तर पर शिथिलता पाए जाने पर संबंधितों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।
image source :https://narsinghpur.mpinfo.org

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