आमला। रमज़ान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में लीन हैं, वहीं नन्हें बच्चों में भी रोज़ा रखने का जज़्बा देखने को मिल रहा है। आमला शहर की महज़ 7 वर्षीय नन्हीं बच्ची मायरा शेख ने अपना पहला रोज़ा रखकर सभी का दिल जीत लिया और समाज को एक खूबसूरत संदेश दिया।
मायरा ने पूरे दिन इबादत में समय बिताते हुए पूरे सब्र, अनुशासन और श्रद्धा के साथ अपना रोज़ा मुकम्मल किया। इतनी कम उम्र में उनकी यह लगन और आस्था हर किसी के लिए प्रेरणा बन गई है।
मायरा शेख ने बताया कि उन्होंने रोज़ा रखकर सभी धर्मों के लोगों के लिए अमन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी। उनकी यह सोच समाज में सौहार्द और एकता की मिसाल पेश करती है।
मायरा शेख, आमला के भूतपूर्व भाजपा अल्पसंख्यक मंडल अध्यक्ष शेख शोएब की पुत्री हैं। परिवार में मिले अच्छे संस्कार और धार्मिक वातावरण के चलते उन्होंने छोटी उम्र में ही रोज़े की अहमियत को समझा और पूरी निष्ठा के साथ इसे निभाया।
परिजनों के अनुसार मायरा ने बिना किसी कठिनाई के रोज़ा पूरा किया और पूरे दिन संयम व अनुशासन बनाए रखा। उनकी इस भावना ने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों को भावुक कर दिया और सराहना पाने का अवसर दिया।
उल्लेखनीय है कि रमज़ान का महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का प्रतीक होता है। इस दौरान रखा जाने वाला रोज़ा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जो इंसान को अनुशासन, त्याग और इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। ऐसे में कम उम्र में बच्चों का इबादत के प्रति समर्पण, परिवार से मिले संस्कारों का जीवंत उदाहरण है।

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