आमला। आमला तहसील क्षेत्र में शासकीय भूमि पर अवैध प्लाटिंग का एक बड़ा और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां ग्राम हरण्या में स्थित शासकीय पहाड़ी चट्टान मद की भूमि पर कथित रूप से अवैध रूप से प्लॉट काटकर लोगों को “पट्टे” के नाम पर बेचा जा रहा था। मामला सामने आने के बाद राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया और प्रशासन ने तत्काल सख्ती दिखाते हुए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार मौजा हरण्या, तहसील आमला, जिला बैतूल की शासकीय भूमि खसरा नंबर 47 पर अवैध रूप से प्लाटिंग किए जाने की शिकायत प्रशासन तक पहुंची थी। यह जमीन शासकीय पहाड़ी चट्टान मद की बताई जा रही है, जिस पर किसी भी प्रकार का निजी स्वामित्व या बिक्री वैध नहीं मानी जाती। इसके बावजूद कथित रूप से इस भूमि को प्लॉट के रूप में विकसित कर लोगों को पट्टा दिलाने के नाम पर बेचा जा रहा था।

इस पूरे मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि यह शासकीय भूमि मुख्य मार्ग बैतूल–बोरदेही रोड से लगी हुई है। सड़क से लगी होने के कारण इस क्षेत्र की जमीन की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि इसी मार्ग से लगी निजी भूमि की कीमत लगभग 5 हजार रुपये प्रति स्क्वायर फीट तक बताई जा रही है, जिसके चलते शासकीय भूमि पर भी अवैध नजरें टिक गई थीं। जमीन की बढ़ती कीमतों ने इस पूरे अवैध खेल को और हवा दी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए नायब तहसीलदार रिचा कौरव ने तत्काल संज्ञान लिया और राजस्व अमले से विस्तृत रिपोर्ट मंगवाई। हल्का पटवारी की रिपोर्ट और राजस्व निरीक्षक की जांच के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि संबंधित शासकीय भूमि पर अतिक्रमण कर कब्जा किया गया है और वहां मकान निर्माण व प्लाटिंग की गतिविधियां भी की जा रही थीं।

न्यायालय नायब तहसीलदार बोरदेही, तहसील आमला द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि संबंधित व्यक्तियों ने शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण और प्लॉटिंग की कोशिश की है। आदेश के अनुसार संबंधित अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत कार्रवाई की गई है।

राजस्व आदेश में खसरा नंबर 47/1/1 सहित अन्य शासकीय भूमि पर अतिक्रमण करने वाले कई व्यक्तियों के नाम भी दर्ज किए गए हैं। प्रशासन ने इन सभी को सात दिन के भीतर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर कब्जा नहीं हटाया गया, तो राजस्व अमला मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करेगा, और इस पूरी कार्रवाई में आने वाला खर्च भी संबंधित अतिक्रमणकारियों से वसूला जाएगा।

मामले में नायब तहसीलदार रिचा कौरव की सक्रिय और सख्त भूमिका सामने आई है। उन्होंने पूरे प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई की और यह स्पष्ट किया कि प्रशासन शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं करेगा। सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि कुछ लोग ग्रामीणों और आम नागरिकों को “पट्टा दिलाने” के नाम पर गुमराह कर रहे थे और शासकीय जमीन को निजी बताकर बेचने का प्रयास कर रहे थे।

बताया जा रहा है कि जैसे ही इस अवैध प्लाटिंग की जानकारी प्रशासन तक पहुंची, एसडीएम शैलेंद्र बड़ोनिया के मौखिक निर्देश पर नायब तहसीलदार रिचा कौरव ने तत्काल मामले में संज्ञान लिया और राजस्व विभाग की टीम को मौके पर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद ही राजस्व अमले ने मौके का निरीक्षण कर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद अवैध प्लाटिंग करने वालों और कथित रूप से पट्टे के नाम पर लोगों को गुमराह करने वाले तत्वों में हड़कंप की स्थिति बन गई है। वहीं ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई का स्वागत किया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते राजस्व विभाग सक्रिय नहीं होता, तो शासकीय पहाड़ी चट्टान की पूरी जमीन धीरे-धीरे प्लॉटों में तब्दील हो जाती और कई भोले-भाले लोग फर्जी पट्टों के नाम पर ठगी का शिकार हो सकते थे।

स्थानीय लोगों ने यह भी कहा कि इस प्रकार के मामलों में केवल अतिक्रमण हटाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उन लोगों की भी जांच और पहचान होनी चाहिए जो शासकीय भूमि को निजी बताकर बेचने या पट्टा दिलाने के नाम पर लोगों से रकम वसूलते हैं। यदि ऐसे लोगों पर कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में भी इस तरह की धोखाधड़ी की आशंका बनी रहेगी।

राजस्व विभाग की इस कार्रवाई के बाद अब ग्रामीणों और जमीन खरीदने वालों को भी सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति किसी भी जमीन को खरीदने से पहले उसका खसरा, रिकॉर्ड और राजस्व स्थिति की जांच अवश्य करे, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कानूनी परेशानी या धोखाधड़ी से बचा जा सके।

एसडीएम और तहसील प्रशासन ने साफ संकेत दे दिए हैं कि शासकीय भूमि पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, कब्जा, निर्माण या अवैध प्लाटिंग बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे मामलों में जांच, नोटिस, अतिक्रमण हटाने और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया आगे भी लगातार जारी रहेगी।