आमला । आमला ब्लॉक में निजी स्कूलों की मान्यता व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र में कई ऐसे निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जिनके पास न तो पर्याप्त खेल मैदान है, न ही खुद का भवन और न ही विद्यार्थियों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था। इसके बावजूद इन स्कूलों को शासन से मान्यता प्राप्त है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभागीय जांच किस आधार पर की गई और नियमों का पालन सुनिश्चित करने वाले अधिकारी इन अनियमितताओं पर मौन क्यों हैं।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) और मध्यप्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार निजी स्कूलों में खेल मैदान, सुरक्षित भवन और अन्य बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य हैं। वर्ष 2018 में स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा था कि बिना खेल मैदान वाले स्कूलों को मान्यता नहीं दी जाएगी। इतना ही नहीं, फर्जी जानकारी रोकने के लिए जीपीएस तकनीक से निगरानी की व्यवस्था भी लागू की गई थी। इसके बावजूद आमला ब्लॉक में कई स्कूल नियमों को ताक पर रखकर संचालित होते दिखाई दे रहे हैं।

*कागजों में मैदान, हकीकत में खाली जगह*

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई स्कूलों ने दस्तावेजों में खेल मैदान दर्शा रखा है, लेकिन वास्तविकता में स्कूल परिसर में बच्चों के खेलने तक की जगह नहीं है। कुछ मामलों में मैदान स्कूल से दूर किसी अन्य व्यक्ति की भूमि पर बताया गया है। ऐसे में यह आशंका गहरा रही है कि कहीं फर्जी दस्तावेजों और कागजी औपचारिकताओं के सहारे मान्यता तो नहीं ली गई।

*नियम क्या कहते हैं*

मध्यप्रदेश में निजी स्कूलों की मान्यता के लिए स्पष्ट नियम निर्धारित हैं—

शहरी क्षेत्र में कम से कम 0.200 हेक्टेयर (लगभग आधा एकड़) खेल मैदान अनिवार्य।

हाईस्कूल के लिए 4000 वर्गफीट और हायर सेकंडरी स्कूल के लिए 5600 वर्गफीट भूमि आवश्यक।

लगभग 2000 वर्गफीट क्षेत्र खेल गतिविधियों के लिए आरक्षित होना जरूरी।

स्कूल का स्वयं का भवन या कम से कम 10 वर्ष का वैध किरायानामा अनिवार्य।

RTE गाइडलाइन के तहत खेल गतिविधियां समग्र शिक्षा का आवश्यक हिस्सा मानी गई हैं।

इसके बावजूद आमला ब्लॉक में कई स्कूल छोटे किराए के भवनों और संकरी जगहों में संचालित हो रहे हैं, जहां बच्चों के लिए खेलना तो दूर, बैठने तक की समुचित व्यवस्था नहीं है।

*बच्चों के भविष्य से खिलवाड़*

अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं हो सकती। बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास के लिए खेल गतिविधियां बेहद जरूरी हैं। लेकिन क्षेत्र के कई निजी स्कूलों में बच्चों को खेल मैदान जैसी बुनियादी सुविधा तक उपलब्ध नहीं है। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ हो रहा है।

*बैतूल जिले में भी चल रही जांच*

जानकारी के अनुसार बैतूल जिले में भी निजी स्कूलों की मान्यता और भूमि संबंधी मामलों की जांच चल रही है। करीब 68 स्कूल जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं, जहां भूमि उपयोग परिवर्तन और खेल मैदान संबंधी नियमों के उल्लंघन की शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में आमला ब्लॉक के स्कूलों को लेकर भी कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।

*विभागीय मिलीभगत की चर्चा*

क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ स्कूल संचालकों और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के चलते नियमों को नजरअंदाज किया जा रहा है। बिना पर्याप्त सुविधाओं के स्कूलों को मान्यता मिलना पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर बच्चों के भविष्य से जुड़े इस गंभीर मामले में प्रशासन कब जागेगा और नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे स्कूलों पर कार्रवाई कब होगी।