आलोट। गांव-गांव जाकर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा एवं आशा सहयोगिनी कार्यकर्ताओं का दर्द एक बार फिर सामने आया है। अपनी लंबित मांगों, अनियमित भुगतान और आर्थिक परेशानियों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपते हुए शासन से न्याय की गुहार लगाई है। ज्ञापन शासकीय अस्पताल आलोट में बीएमओ डॉ. देवेंद्र मोर्य को सौंपा गया।
ज्ञापन में बताया गया कि 6 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा आशा कार्यकर्ताओं एवं आशा सुपरवाइजरों के मानदेय में प्रतिवर्ष ₹1000 की वृद्धि की घोषणा की गई थी, लेकिन आज तक इसका लाभ धरातल पर नहीं पहुंच पाया है। इसके अलावा कई-कई महीनों तक प्रोत्साहन राशि एवं मानदेय का भुगतान नहीं होने से आशा कार्यकर्ताओं को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं का भार, लेकिन सुविधाएं नदारद

ज्ञापन में कहा गया है कि आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, जनजागरूकता सहित अनेक सरकारी योजनाओं को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्हें समय पर भुगतान नहीं मिल रहा है। कई बार अधिकारियों द्वारा बजट या तकनीकी कारण बताकर भुगतान टाल दिया जाता है, जिससे कार्यकर्ताओं में निराशा बढ़ रही है।

12 सूत्रीय मांगों पर शासन से निर्णय की अपेक्षा

आशा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि उन्हें सम्मानजनक वेतन, सामाजिक सुरक्षा और सेवा सुविधाएं प्रदान की जाएं। ज्ञापन में आशा वर्कर को ₹18 हजार एवं आशा सहयोगिनी को ₹24 हजार मासिक वेतन, ईपीएफ, ईएसआई, पेंशन, दुर्घटना बीमा, सेवानिवृत्ति लाभ, पदोन्नति, यात्रा भत्ता, गणवेश, विश्राम कक्ष, मोबाइल/टैबलेट तथा मातृत्व अवकाश जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

गरीब परिवारों से आती हैं अधिकांश आशा कार्यकर्ता

ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अधिकांश आशा कार्यकर्ता आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आती हैं। ऐसे में दो-दो और तीन-तीन माह तक भुगतान नहीं मिलने से उनके परिवारों का भरण-पोषण प्रभावित होता है। संगठन ने मांग की कि केंद्र, राज्य एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से मिलने वाली राशि का भुगतान पूर्व की भांति एकमुश्त किया जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और समय पर राशि मिल सके।

सरकार से न्याय की उम्मीद

आशा एवं आशा सहयोगिनी कार्यकर्ताओं ने उम्मीद जताई है कि सरकार उनकी वर्षों पुरानी मांगों पर गंभीरता से विचार करेगी और स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण योगदान देने वाली इन जमीनी कार्यकर्ताओं को उनका हक दिलाएगी। ज्ञापन के माध्यम से उन्होंने शीघ्र कार्रवाई कर लंबित घोषणाओं को लागू करने की मांग की है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान आशा कार्यकर्ता एवं संगठन की पदाधिकारी उपस्थित थीं।