आमला। तहसील क्षेत्र के लगभग 180 गांवों से जुड़े महत्वपूर्ण राजस्व अभिलेखों के समय पर उपलब्ध नहीं होने से न्यायिक और प्रशासनिक कार्यों पर गंभीर असर पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार, तहसील का पुराना राजस्व रिकॉर्ड स्कैनिंग के लिए बैतूल जिला मुख्यालय भेजा गया था, लेकिन लगभग छह माह बीत जाने के बाद भी अभिलेख वापस नहीं लौटे हैं। इसके कारण बंटवारा, नामांतरण, रिकॉर्ड दुरुस्ती, स्वत्व-आधिपत्य, पंजीयन और अन्य राजस्व मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है।
पुरानी नकल नहीं मिलने से न्यायालयीन मामलों पर असर
अधिवक्ता शिवम उपाध्याय ने बताया कि सिविल न्यायालय में भूमि संबंधी मामलों, स्वत्व एवं आधिपत्य तथा खानदानी भूमि के प्रमाण के लिए पुरानी राजस्व नकलें अत्यंत आवश्यक होती हैं। लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद संबंधित नकलें समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। इससे न केवल न्याय प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, बल्कि पक्षकारों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है।
रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था भी बनी समस्या
तहसील का रिकॉर्ड रूम सुव्यवस्थित नहीं होने से भी परेशानियां बढ़ रही हैं। रिकॉर्ड रूम में पुराने चुनाव संबंधी दस्तावेज, अनुपयोगी सामग्री और अन्य फर्नीचर रखे होने से रिकॉर्ड के सुरक्षित संधारण और व्यवस्थित रखरखाव में दिक्कत आ रही है।
बैंक के अधिवक्ता मधुकर महाजन ने बताया कि भूमि संबंधी सर्च रिपोर्ट और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की नकल प्राप्त करने के लिए वकील, पक्षकार और आम नागरिक लगातार परेशान होते रहते हैं। उन्होंने कहा कि बदलते समय में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर पुरानी नकलें लोक सेवा केंद्रों के माध्यम से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
आमला में ही हो आधुनिक रिकॉर्ड रूम की व्यवस्था
अधिवक्ता विपिन बरडे और रोशन बेले का कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्यप्रदेश में पुरानी नकल प्राप्त करना काफी कठिन कार्य है। आमला तहसील का पुराना रिकॉर्ड जिला मुख्यालय बैतूल में होने के कारण आम जनता को बेवजह परेशान होना पड़ता है। उन्होंने मांग की कि आमला तहसील में ही बड़ा और आधुनिक रिकॉर्ड रूम बनाकर सभी अभिलेखों को डिजिटल और व्यवस्थित रूप से सुरक्षित रखा जाए।
आदिवासी अंचल के ग्रामीणों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
मोरखा क्षेत्र के अधिवक्ता शैलेंद्र सिंह रघुवंशी, राजेश अमरोही, भीमराव उपराले और मनोज दीवाने ने बताया कि खेड़ली बाजार, मोरखा, नरेरा, जमदेही, छिपन्या, पिपरिया सहित आदिवासी अंचल के ग्रामीणों को छोटी-सी नकल के लिए भी बैतूल तक जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है और ग्रामीणों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता है।
पटवारी और कर्मचारी भी परेशान
राजस्व विभाग के कर्मचारी और पटवारी भी रिकॉर्ड वापस नहीं आने से परेशान हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, यदि किसी मामले में रिकॉर्ड दुरुस्ती, जांच या प्रतिवेदन प्रस्तुत करना हो, तो मूल अभिलेख देखे बिना सही रिपोर्ट तैयार करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
रजिस्ट्री और राजस्व वसूली पर भी असर
अधिवक्ता दिलीप सोनी और विजय मालवीय ने बताया कि भूमि की रजिस्ट्री के लिए कई मामलों में पुरानी नकल जरूरी होती है। लेकिन नकल समय पर नहीं मिलने से पंजीयन कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे शासन को राजस्व का नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। वहीं न्यायालय में समय पर प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं होने से संबंधित पक्षों और अधिवक्ताओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कलेक्टर से की जाएगी समस्या समाधान की मांग
अधिवक्ता संघ के उपाध्यक्ष रविशंकर पटवारी, अधिवक्ता पूजा मालवीय और शबाना खान ने कहा कि इस गंभीर समस्या को लेकर वे जल्द ही कलेक्टर बैतूल से मुलाकात करेंगे। उन्होंने मांग की है कि आमला तहसील के अभिलेख शीघ्र वापस बुलाए जाएं, रिकॉर्ड रूम की समस्या का समाधान किया जाए और जनता को समय पर राजस्व अभिलेखों की नकल उपलब्ध कराई जाए।

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