रीवा। शासन की उच्च प्राथमिकता वाली योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन, प्रशासनिक पारदर्शिता और जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण को लेकर रीवा संभाग प्रशासन पूरी तरह से मुस्तैद है। इसी कड़ी में कमिश्नर कार्यालय के सभागार में एक अत्यंत महत्वपूर्ण एवं उच्च स्तरीय संभागीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक की अध्यक्षता रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य शासन की जनकल्याणकारी और प्राथमिकता वाली योजनाओं की गहन समीक्षा करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना था। कमिश्नर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासनिक कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

इस महत्वपूर्ण बैठक में जल संरक्षण, ई-ऑफिस प्रणाली, सीएम हेल्पलाइन के लंबित प्रकरण, पेयजल व्यवस्था और पशुपालन विभाग की योजनाओं सहित कई अहम बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए। कमिश्नर द्वारा दिए गए निर्देशों और बैठक की विस्तृत रिपोर्ट को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है:

1. संभागीय बैठक के एजेंडा बिंदुओं पर तत्परता और पोर्टल पर प्रतिवेदन: बैठक की शुरुआत करते हुए कमिश्नर बीएस जामोद ने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि संभागीय बैठक के जो भी एजेंडा बिंदु निर्धारित किए गए हैं, उन पर तत्काल प्रभाव से और पूरी तत्परता के साथ कार्यवाही सुनिश्चित की जाए। केवल कार्यवाही करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि की गई सभी कार्यवाहियों का विस्तृत प्रतिवेदन (रिपोर्ट) संबंधित विभागीय पोर्टल पर भी अनिवार्य रूप से दर्ज कराया जाए। इसके अलावा, उन्होंने इस बात पर भी विशेष जोर दिया कि सभी अधिकारी अपने अधीनस्थ जिला अधिकारियों के माध्यम से इन कार्यवाहियों को जमीनी स्तर पर सुनिश्चित करवाएं। साथ ही, कमिश्नर्स-कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में तय किए गए एजेंडा बिंदुओं पर भी सतत और निरंतर कार्यवाही जारी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।

2. जल गंगा संवर्धन अभियान में अधिकारियों की भागीदारी और अनिवार्य श्रमदान: बैठक में जल संरक्षण के मुद्दे को अत्यंत गंभीरता से लिया गया। कमिश्नर ने बताया कि वर्तमान में संभाग के सभी जिलों में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन के लिए शासन का अत्यंत महत्वपूर्ण 'जल गंगा संवर्धन अभियान' जोर-शोर से चलाया जा रहा है। उन्होंने संभाग के सभी अधिकारियों को इस पुनीत अभियान में अपनी सक्रिय और व्यक्तिगत भागीदारी निभाने के निर्देश दिए। कमिश्नर ने जल की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि जल संरक्षण और संवर्धन केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हम सबका एक बड़ा नैतिक और सामाजिक दायित्व भी है। जल के बिना इस धरती पर जीवन की कल्पना भी संभव नहीं है। यदि आज हमने जल संरक्षण की दिशा में थोड़े से भी सार्थक प्रयास कर लिए, तो हमारी आने वाली भावी पीढ़ी का भविष्य और उनका जीवन पूरी तरह से सुरक्षित हो जाएगा। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए, कमिश्नर ने एक बड़ा निर्देश जारी किया कि सभी अधिकारी सप्ताह में कम से कम दो दिन जल संरक्षण और संवर्धन के कार्यों में अनिवार्य रूप से अपना 'श्रमदान' (स्वैच्छिक शारीरिक योगदान) करेंगे।

3. ई-ऑफिस प्रणाली में रीवा संभाग की शानदार उपलब्धि और आगामी लक्ष्य: डिजिटल इंडिया और पेपरलेस वर्किंग (कागज रहित कार्यप्रणाली) की दिशा में रीवा संभाग ने एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। बैठक में कमिश्नर ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि रीवा संभाग के सभी अधिकारियों की निरंतर सक्रियता और मेहनत के कारण ई-ऑफिस (e-Office) प्रणाली के उपयोग में रीवा संभाग अक्टूबर 2025 से संभागीय रैंकिंग में पूरे प्रदेश में लगातार प्रथम स्थान पर अपनी जगह बनाए हुए है। यह संभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। हालांकि, प्रशासन यहीं रुकने वाला नहीं है। कमिश्नर ने नया लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि संभाग और जिलों की सम्मिलित (ओवरऑल) रैंकिंग में भी रीवा संभाग को प्रदेश के 'टॉप फाइव' (शीर्ष पांच) में पहुंचाने के लिए सभी अधिकारी अपनी शत-प्रतिशत फाइलें और पत्राचार केवल ई-ऑफिस के माध्यम से ही करें। इसके साथ ही एक सख्त चेतावनी भी जारी की गई कि यदि अधीनस्थ जिला अधिकारियों का 'फाइल मूवमेंट' (फाइलों का ई-ऑफिस पर संचालन) जीरो (शून्य) पाया जाता है, तो ऐसे लापरवाह अधिकारियों के विरुद्ध तत्काल अनुशासनात्मक कार्यवाही प्रस्तावित की जाए। इस मामले में विशेष रूप से मैहर, मऊगंज और सतना जिलों की कार्यप्रणाली पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं।

4. सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों की बढ़ती संख्या पर चिंता और सख्त कार्यवाही के निर्देश: आम जनता की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए बनाई गई सीएम हेल्पलाइन (CM Helpline) की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि प्रकरणों और शिकायतों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कमिश्नर ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी। उन्होंने निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के निराकरण में लापरवाही बरतने वाले विभागों को बख्शा नहीं जाएगा। कमिश्नर ने स्पष्ट मानदंड तय करते हुए कहा कि जिन भी विभागों में एक हजार (1000) से अधिक आवेदन लंबित पड़े हैं, तथा जिन विभागों में 100 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद 500 से अधिक आवेदन लंबित हैं, उन सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) जारी किया जाए। कमिश्नर ने सभी संभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे सीएम हेल्पलाइन प्रकरणों के निराकरण पर अपना विशेष और व्यक्तिगत ध्यान दें। सभी संभागीय अधिकारी इसकी जिलेवार विस्तृत समीक्षा करेंगे और हर सप्ताह इसकी प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करेंगे।

5. पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप सुधार और नल-जल योजनाओं की सतत निगरानी: गर्मी के मौसम और ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी) विभाग की कार्यप्रणाली की भी कड़ी समीक्षा की गई। कमिश्नर ने अधीक्षण यंत्री, पीएचई को स्पष्ट निर्देश दिए कि वे संभाग के सभी जिलों में पेयजल व्यवस्था की सतत और निरंतर निगरानी करें। पेयजल संकट से निपटने के लिए सभी जिलों में पर्याप्त संख्या में 'राइजर पाइप' और 'सिंगल फेज मोटर' की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और इनके सही उपयोग की मॉनिटरिंग भी की जाए। कमिश्नर का यह स्पष्ट आदेश है कि हर एक बसाहट (चाहे वह कितनी भी दूरस्थ क्यों न हो) में पेयजल की सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही, यदि कोई हैंडपंप खराब है और वह सुधार योग्य स्थिति में है, तो उसे अधिकतम दो दिन (48 घंटे) की सख्त समय-सीमा के भीतर सुधार कर चालू किया जाए। पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक व्यवस्था 'नल-जल योजनाओं' के सुचारू संचालन और संधारण (रखरखाव) पर भी लगातार निगरानी रखने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।

6. क्षीरधारा ग्राम योजना और पशुपालन विभाग की नई पहल: बैठक के दौरान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालन विभाग की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। बैठक में उपस्थित संयुक्त संचालक, पशुपालन विभाग ने शासन की महत्वाकांक्षी 'क्षीरधारा ग्राम योजना' के बारे में बिंदुवार और विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस लाभकारी योजना को रीवा संभाग के सभी जिलों में कुल तीन चरणों (थ्री-फेज) में सुव्यवस्थित तरीके से लागू किया जा रहा है। क्षीरधारा ग्राम योजना के तहत मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण कार्यों पर विशेष जोर दिया जाएगा - पशुओं का समय पर और शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित करना, दुधारू पशुओं की नस्ल में वैज्ञानिक तरीके से सुधार करना, और दुग्ध उत्पादन को बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रयासों को गति प्रदान करना। इससे न केवल पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ होगी।

7. बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति: कमिश्नर कार्यालय सभागार में आयोजित इस महत्वपूर्ण संभागीय समीक्षा बैठक में प्रशासन के कई आला अधिकारी मौजूद रहे। कमिश्नर बीएस जामोद के साथ-साथ इस बैठक में संयुक्त आयुक्त श्री सुदेश मालवीय, संयुक्त आयुक्त श्रीमती दिव्या त्रिपाठी, उपायुक्त श्री एल.एल. अहिरवार, वन विभाग के एसडीओ (SDO) श्री हितेश खण्डेलवाल सहित संभाग स्तर के सभी अन्य प्रमुख संभागीय अधिकारी प्रमुखता से उपस्थित रहे। सभी अधिकारियों ने कमिश्नर द्वारा दिए गए निर्देशों का अक्षरशः पालन करने की प्रतिबद्धता जताई।

निष्कर्ष: रीवा संभाग के कमिश्नर बीएस जामोद द्वारा ली गई यह बैठक स्पष्ट करती है कि प्रशासन आम जनता से जुड़े मुद्दों, जल संरक्षण जैसी दूरगामी आवश्यकताओं और ई-गवर्नेंस को लेकर कितना गंभीर है। ई-ऑफिस में प्रदेश भर में प्रथम स्थान प्राप्त करना जहां प्रशासन की एक बड़ी कामयाबी है, वहीं सीएम हेल्पलाइन और पेयजल व्यवस्था में कोताही बरतने वालों पर कार्यवाही के निर्देश यह संदेश देते हैं कि सुशासन और जवाबदेही से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

image source:https://rewa.mpinfo.org