बैतूल: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से गुजरात मॉडल पर चलते हुए, मध्यप्रदेश की सभी चेक पोस्ट बंद करने के आदेश दिए थे। इसी क्रम में नागपुर–भोपाल राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित ससुद्रा चेक पोस्ट को भी बंद किया गया था।

लेकिन, वास्तविकता इसके विपरीत नजर आ रही है। स्थानीय वाहन चालकों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चेक पोस्ट बंद होने के बावजूद सड़क पर वाहनों को रोका जा रहा है और कथित तौर पर अवैध वसूली की जा रही है। यह स्थिति मुख्यमंत्री के आदेशों पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है और प्रशासनिक निगरानी की कमी को उजागर करती है।

डिवाइडर बन रहा जानलेवा

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि वाहनों को रोकने के लिए सड़क पर अस्थायी डिवाइडर और अवरोधक लगाए जा रहे हैं। अचानक रुकने की वजह से तेज़ रफ्तार वाहनों का संतुलन बिगड़ रहा है, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस अव्यवस्थित रोक-टोक के कारण पहले भी हादसे हो चुके हैं, जिनमें लोगों की जान तक जा चुकी है।

निजी व्यक्ति पर गंभीर आरोप

इस पूरे प्रकरण में पंकज श्रीवास्तव नामक एक निजी व्यक्ति को लेकर चर्चाएं तेज़ हैं। आरोप है कि उसके साथ कुछ लोग मिलकर चेक पोस्ट क्षेत्र में सक्रिय हैं और वही इस कथित अवैध गतिविधि को अंजाम दे रहे हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि यह गतिविधि किसके संरक्षण में संचालित हो रही है।

बड़ा सवाल—अधिकार किसका?

  • जब चेक पोस्ट बंद हैं, तो वाहनों को रोकने का अधिकार किसे है?
  • यदि अवैध वसूली हो रही है, तो इसकी जानकारी प्रशासन को क्यों नहीं?
  • क्या यह मुख्यमंत्री के आदेशों की खुली अवहेलना नहीं है?

राहत की उम्मीद टूटी

चेक पोस्ट बंद होने के फैसले से ट्रांसपोर्टरों और आम वाहन चालकों को राहत मिलने की उम्मीद थी, लेकिन कथित अवैध वसूली जारी रहने से उनकी परेशानियां जस की तस बनी हुई हैं।

जांच और कार्रवाई की मांग

नागरिकों ने जिला प्रशासन और परिवहन विभाग से इस मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो न केवल संबंधित व्यक्तियों बल्कि उन्हें संरक्षण देने वालों पर भी कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद सामने आए इन गंभीर आरोपों पर प्रशासन कब संज्ञान लेता है और कब तक कार्रवाई होती है।