सागर, मध्य प्रदेश। भारतीय लोकतांत्रिक ढांचे में जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती का माध्यम नहीं है, बल्कि यह भविष्य के भारत की विकास नीतियों और सामाजिक-आर्थिक खाके को तैयार करने वाली सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसी दिशा में मध्य प्रदेश के सागर जिले के अंतर्गत आने वाले रहली विकासखंड ने एक ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी गूँज पूरे प्रदेश में सुनाई दे रही है। रहली के ग्राम कैलवास (HLB-0100) ने जनगणना 2027 के प्रथम चरण को शत-प्रतिशत सटीकता और निर्धारित समय से पूर्व पूर्ण कर एक नया प्रशासनिक बेंचमार्क स्थापित किया है।

इस सफलता ने यह प्रमाणित कर दिया है कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी हो और टीम तकनीक के प्रति समर्पित हो, तो जटिल से जटिल कार्य को भी सुगमता से संपन्न किया जा सकता है।

1. प्रशासनिक नेतृत्व: श्रीमती प्रतिभा पाल का रणनीतिक विजन

किसी भी बड़े अभियान की सफलता उसके शीर्ष नेतृत्व की कार्यकुशलता पर निर्भर करती है। सागर जिले में इस अभियान को गति प्रदान करने का श्रेय कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती प्रतिभा पाल को जाता है।

  • स्पष्ट दिशा-निर्देश: श्रीमती प्रतिभा पाल ने अभियान के प्रारंभ से ही डेटा की शुद्धता और समयबद्धता पर बल दिया।

  • तकनीकी निगरानी: उनके मार्गदर्शन में यह सुनिश्चित किया गया कि प्रगणकों को तकनीकी रूप से इतना सक्षम बनाया जाए कि फील्ड पर कोई बाधा न आए।

  • प्रेरणा: कलेक्टर के निरंतर प्रोत्साहन का ही परिणाम है कि रहली प्रशासन ने इस चुनौतीपूर्ण कार्य को प्रदेश के अग्रणी रिकॉर्ड के रूप में दर्ज कराया।

2. कैलवास मॉडल: सफलता के मुख्य स्तंभ और डेटा विश्लेषण

रहली के कैलवास ग्राम ने अपनी कार्यशैली से "त्रुटिहीन जनगणना" का मॉडल प्रस्तुत किया है। इस डेटा की सूक्ष्मता को निम्नलिखित बिंदुओं में समझा जा सकता है:

  • भवनों का सटीक चिन्हांकन: सर्वेक्षण के दौरान पूरे क्षेत्र में कुल 105 भवनों की पहचान की गई और उन्हें विधिवत नंबर प्रदान किए गए।

  • विस्तृत मकान सूचीकरण: इन 105 भवनों के भीतर कुल 182 जनगणना मकानों की प्रविष्टि एचएलओ (HLO) ऐप के माध्यम से डिजिटल पोर्टल पर दर्ज की गई।

  • सामान्य परिवारों का कवरेज: गाँव के सभी 158 सामान्य परिवारों को गणना के दायरे में लाया गया। उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति का डेटा अब डिजिटल रूप से सुरक्षित है।

  • व्यावसायिक बुनियादी ढांचा: आवासीय मकानों के साथ-साथ 22 गैर-आवासीय मकानों का भी डेटा संग्रह किया गया, जो क्षेत्र के आर्थिक परिदृश्य को समझने में सहायक होगा।

  • शून्य त्रुटि का रिकॉर्ड: कार्य की गुणवत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे क्षेत्र में एक भी 'लॉक' प्रकरण, अधूरा कार्य या संस्थागत परिवार की विसंगति दर्ज नहीं हुई।

3. तकनीक और तत्परता: एचएलओ (HLO) ऐप की भूमिका

डिजिटल इंडिया के युग में इस बार जनगणना की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाने का प्रयास किया गया है।

  • अमित यादव की विशेषज्ञता: प्रगणक अमित यादव ने एचएलओ ऐप के तकनीकी पहलुओं को गहराई से आत्मसात किया। उन्होंने मोबाइल एप्लीकेशन के माध्यम से डेटा संकलन की प्रक्रिया को इतनी तीव्रता दी कि 1 मई को ही पूरा डेटा पोर्टल पर सिंक (Sync) हो गया।

  • स्व-गणना आईडी (Self-Enumeration ID): इस प्रक्रिया की सबसे अनूठी विशेषता 158 परिवारों की स्व-गणना आईडी का समय से पहले निर्माण रहा। इससे वास्तविक गणना के समय डेटा प्रविष्टि में लगने वाला समय बच गया और सटीकता बनी रही।

4. फील्ड ऑपरेशन और पर्यवेक्षण: समन्वय की शक्ति

मैदानी स्तर पर कार्य की गुणवत्ता को बनाए रखने में प्रशासनिक टीम का समन्वय उल्लेखनीय रहा:

  • सुपरवाइजर श्रीमती पूनम पाठक: डेटा की गुणवत्ता की पहली परख सुपरवाइजर स्तर पर होती है। श्रीमती पूनम पाठक ने प्रगणक और पोर्टल के बीच एक सुदृढ़ सेतु का कार्य किया। उन्होंने फील्ड से आने वाले हर डेटा पॉइंट का सूक्ष्म सत्यापन किया।

  • तहसीलदार श्री राजेश पांडे: चार्ज अधिकारी और रहली तहसीलदार श्री राजेश पांडे ने पूरी प्रक्रिया की कमान संभाली। उनके प्रशासनिक अनुभवों और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता ने टीम को विपरीत परिस्थितियों में भी लक्ष्य की ओर अग्रसर रखा।

5. डेटा की शुद्धता और नीति-निर्धारण पर प्रभाव

सांख्यिकीय विशेषज्ञों का मानना है कि कैलवास से प्राप्त यह सटीक डेटा आने वाले 10 वर्षों के लिए शासन की योजनाओं का आधार बनेगा।

  • सटीक लाभार्थी चयन: जब डेटा में कोई त्रुटि नहीं होती, तो स्वास्थ्य, शिक्षा और राशन जैसी सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और सही व्यक्ति तक पहुँचता है।

  • बुनियादी ढांचे का विकास: गैर-आवासीय भवनों और मकानों की नंबरिंग से प्रशासन को यह समझने में आसानी होगी कि क्षेत्र में कहाँ नए स्कूल, अस्पताल या सड़कों की आवश्यकता है।

  • भविष्य का खाका: यह डिजिटल डेटा बेस मध्य प्रदेश के ग्रामीण विकास के लिए एक 'ब्लूप्रिंट' की तरह काम करेगा।

6. निष्कर्ष: एक नई प्रशासनिक क्रांति की शुरुआत

रहली के कैलवास की यह उपलब्धि केवल एक गाँव की जीत नहीं है, बल्कि यह सागर जिले के प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी की मेहनत का परिणाम है। 1 मई को कार्य पूर्ण कर लेना यह दर्शाता है कि सागर जिला मध्य प्रदेश में डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी है। प्रगणक अमित यादव, सुपरवाइजर श्रीमती पूनम पाठक और तहसीलदार श्री राजेश पांडे की इस "टीम रहली" ने यह सिद्ध कर दिया है कि तकनीक और प्रतिबद्धता के मेल से सरकारी लक्ष्यों को न केवल प्राप्त किया जा सकता है, बल्कि उनमें नए कीर्तिमान भी स्थापित किए जा सकते हैं।

यह सफलता अन्य जिलों के प्रगणकों और अधिकारियों के लिए एक प्रेरणा पुंज बनेगी, जिससे 2027 की महा-जनगणना को राष्ट्रव्यापी सफलता की ओर ले जाया जा सकेगा।

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