मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रदेश की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और शासन के प्रमुख कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की। इस बैठक में सुशासन, जनसेवा, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष जोर दिया गया। सतना के एनआईसी कक्ष से कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस, डीएफओ मयंक चांदीवाल, नगर निगम आयुक्त शेर सिंह मीना, जिला पंचायत के सीईओ शैलेन्द्र सिंह और एसडीएम राहुल सिलाडिया सहित जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी इस महत्वपूर्ण बैठक में आभासी रूप से शामिल हुए।

सुशासन और सीएम हेल्पलाइन: जन-कल्याण की सर्वोच्च प्राथमिकता

बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों को सुशासन की दिशा में समर्पित रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता के कल्याण से जुड़े कार्य राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता हैं। सीएम हेल्पलाइन में दर्ज प्रकरणों के निराकरण में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्य सचिव ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कोई भी शिकायत 50 दिनों से अधिक समय तक लंबित नहीं रहनी चाहिए। इसके अतिरिक्त, नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे राजस्व मामलों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर निपटाना अनिवार्य है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन प्रकरणों में समयबद्ध कार्रवाई नहीं की जाती, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

बाढ़ राहत और आपदा प्रबंधन की तैयारी

मानसून के आगमन को देखते हुए, मुख्य सचिव ने जिला प्रशासन को बाढ़ राहत और आपदा प्रबंधन के लिए अभी से कमर कसने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश शुरू होने से पहले ही बाढ़ नियंत्रण और बचाव के सभी प्रबंध सुनिश्चित कर लिए जाएं। अतिवृष्टि या बाढ़ की विकट स्थिति में राहत शिविरों की स्थापना की व्यवस्था पूर्व-निर्धारित होनी चाहिए। मुख्य सचिव का मुख्य उद्देश्य बाढ़ के दौरान जन-धन की हानि को न्यूनतम स्तर पर रखना है।

सड़क सुरक्षा: दुर्घटनाओं में कमी का संकल्प

सड़क सुरक्षा के विषय पर चर्चा करते हुए मुख्य सचिव ने जिला सड़क सुरक्षा समिति की मासिक बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित करने पर बल दिया। उन्होंने बताया कि यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराने और सड़कों से ‘ब्लैक स्पॉट्स’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) को कम करने से मौतों का आंकड़ा काफी हद तक घटाया जा सकता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया है।

अधिकारियों को अवगत कराया गया कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष के प्रथम 9 महीनों में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली मौतों में कमी दर्ज की गई है, जो एक सकारात्मक संकेत है। दुर्घटना की जानकारी तत्काल 'ई-डॉर' (e-DAR) पोर्टल पर दर्ज करने और 'प्रधानमंत्री राहत योजना' के तहत पीड़ितों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही, 'राहगीर योजना' के व्यापक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया ताकि समय पर मदद मिलने से बहुमूल्य जानें बचाई जा सकें।

कृषि, पशुपालन और विपणन का एकीकरण

मध्य प्रदेश की जीडीपी में कृषि का योगदान पिछले 10 वर्षों में बढ़कर 43 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो राज्य की आर्थिक प्रगति में खेती की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। मुख्य सचिव ने कहा कि कलेक्टर्स को कृषि और संबद्ध विभागों की गतिविधियों की नियमित समीक्षा करनी चाहिए। पशुपालन और मछलीपालन के क्षेत्र में हो रहे विकास की सराहना करते हुए उन्होंने बताया कि मछलीपालन की 'केजकल्चर योजना' के अंतर्गत राज्य में 1 लाख 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं।

कृषि उत्पादों के बेहतर दाम सुनिश्चित करने के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि स्वरोजगार योजनाओं के माध्यम से ऐसी इकाइयों की स्थापना की जाए, जिससे किसानों को उनके उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों।

उपार्जन और उर्वरक वितरण व्यवस्था

गेहूं उपार्जन के संबंध में मुख्य सचिव ने संतोष व्यक्त करते हुए बताया कि प्रदेश में 101 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि उपार्जित गेहूं का तत्काल सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करें। साथ ही, 5 जून तक किसानों को उपार्जित गेहूं की राशि का शत-प्रतिशत भुगतान अनिवार्य रूप से हो जाना चाहिए। खाद वितरण के लिए पूरे प्रदेश में 'ई-विकास सिस्टम' लागू कर दिया गया है, अब उर्वरक का वितरण केवल 'ई-टोकन' के माध्यम से ही किया जाएगा।

बुनियादी ढांचा और भविष्य की योजनाएं

बैठक में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 30 जून तक जल संरक्षण के सभी कार्यों को पूरा कर पोर्टल पर दर्ज करने का लक्ष्य दिया गया है। मनरेगा योजना के अंतर्गत स्वीकृत 31,975 निर्माण कार्यों को भी 30 जून तक पूर्ण करने का निर्देश है, जिसके तुरंत बाद 1 जुलाई से 'व्हीबीजीरामजी' (VBG) योजना का क्रियान्वयन शुरू किया जाएगा।

औद्योगिक विकास पर चर्चा करते हुए बताया गया कि प्रदेश के 34 विधानसभा क्षेत्रों में नए औद्योगिक क्षेत्र प्रस्तावित हैं। कलेक्टरों को इन क्षेत्रों के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने में तेजी लाने को कहा गया है। इसके अलावा, भारत औद्योगिक विकास योजना (भव्य) के क्रियान्वयन को भी प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।

शहरी विकास एवं अन्य प्रमुख अभियान

बैठक में शहरी क्षेत्रों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम, जलाशयों में पर्यटकों की सुरक्षा, प्रधानमंत्री श्रम मानधन योजना, और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। नशा मुक्ति अभियान, मिलावट के विरुद्ध कार्रवाई और हिरण्यगर्भा अभियान के साथ-साथ नरवाई प्रबंधन, दूध उत्पादन बढ़ाने के प्रयास, क्षीरधारा योजना और अमृत योजना के कार्यों की भी समीक्षा की गई।

पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना ने भी इस अवसर पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने एनकोर समिति की बैठकों, आपदा प्रबंधन, और त्योहारों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस विभाग की सक्रियता पर बल दिया।

यह बैठक स्पष्ट रूप से यह संकेत देती है कि शासन की योजनाओं को जमीनी स्तर पर उतारने के लिए प्रशासन पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सतना जिले सहित पूरे मध्य प्रदेश के अधिकारी इन निर्देशों के पालन के लिए जुट गए हैं, ताकि सुशासन के लक्ष्यों को समय सीमा में प्राप्त किया जा सके।

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