सतना जिले में खरीफ सीजन के लिए कृषि तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने सोमवार को समय-सीमा (TL) प्रकरणों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। इस बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिले की सभी पैक्स समितियों में यूरिया, डीएपी और एनपीके खाद का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को ऐन वक्त पर खाद के लिए परेशान न होना पड़े। उन्होंने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद का वितरण पूर्ण रूप से 'ई-विकास पोर्टल' के माध्यम से किया जाएगा, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

सतना में फार्मर रजिस्ट्री की सुस्त चाल पर नाराजगी

बैठक के दौरान कलेक्टर ने 'फार्मर रजिस्ट्री' (किसान पंजीकरण) के कार्य की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जताई। वर्तमान में सतना जिला इस कार्य में प्रदेश के 28 जिलों में सबसे निचले पायदान पर है, जो कि अत्यंत चिंताजनक है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी एसडीएम और तहसीलदार अपने-अपने क्षेत्रों में पटवारीवार प्रतिदिन कार्य की समीक्षा करें। उन्होंने विशेष रूप से कोटर और उचेहरा तहसील के अधिकारियों को चेतावनी दी, जहां पिछले 2-3 दिनों में कोई प्रगति नहीं देखी गई है। कलेक्टर ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिन पटवारियों की प्रगति संतोषजनक नहीं है, उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

उपार्जन और परिवहन कार्य को गति देने के निर्देश

उपार्जन कार्य की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने निर्देशित किया कि परिवहन की गति को और बढ़ाया जाए। इसके लिए ट्रांसपोर्टर्स से समन्वय स्थापित कर गाड़ियों की संख्या में तत्काल वृद्धि की जाए, ताकि उपार्जन केंद्रों पर रखा अनाज समय पर गोदामों तक पहुंचाया जा सके। कलेक्टर ने पैक्स समितियों को खाद वितरण में प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उनका मानना है कि सहकारी समितियाँ ही किसानों तक खाद पहुँचाने का सबसे सुलभ माध्यम हैं, इसलिए समितियों का स्टॉक प्रबंधन उत्कृष्ट होना चाहिए।

सतना में सीएम हेल्पलाइन और अवैध चिकित्सा पर सख्त रुख

कलेक्टर ने सीएम हेल्पलाइन और सीमांकन के प्रकरणों में भी अपेक्षित प्रगति न मिलने पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने इन मामलों को गंभीरता से लेने के निर्देश दिए। इसके अलावा, बैठक में जिले में अवैध रूप से प्रैक्टिस कर रहे झोलाछाप डॉक्टरों का मुद्दा भी उठा। कलेक्टर ने पाया कि शिकायतों के बाद भी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. मनोज शुक्ला द्वारा ऐसे स्थानीय चिकित्सकों के विरुद्ध कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इस लापरवाही पर कलेक्टर ने नाराजगी व्यक्त की और तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए।

सड़क सुरक्षा और एनएचएआई की कार्यप्रणाली पर असंतोष

सड़क सुरक्षा समिति और 'जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट' के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बैठक में एमपीआरडीसी (MPRDC) के अधिकारियों द्वारा सुधार कार्यों का प्रेजेंटेशन दिया गया। हालांकि, एनएचएआई (NHAI) और एनएच-पीडब्ल्यूडी (NH-PWD) द्वारा अपनी सड़कों की स्थिति और सुधार कार्यों का प्रेजेंटेशन प्रस्तुत न करने पर कलेक्टर ने सख्त लहजे में नाराजगी जताई। उन्होंने इन विभागों को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि अगली समय-सीमा की बैठक में प्रेजेंटेशन प्रस्तुत नहीं किया गया, तो उनके वरिष्ठ अधिकारियों को पत्राचार कर शिकायत की जाएगी।

प्रशासन की जवाबदेही और भविष्य की रणनीति

बैठक में आयुक्त नगर निगम शेर सिंह मीना, सीईओ जिला पंचायत शैलेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर विकास सिंह सहित जिले के सभी एसडीएम और विभिन्न विभागों के प्रमुख उपस्थित थे। कलेक्टर ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे केवल कागजी कार्यवाही तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड में जाकर कार्यों का सत्यापन करें।

सतना प्रशासन का मुख्य लक्ष्य खरीफ सीजन को सुचारू बनाना, किसानों का डेटाबेस (फार्मर रजिस्ट्री) पूर्ण करना और सड़क सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्य करना है। बैठक के दौरान यह संदेश दिया गया कि प्रत्येक अधिकारी अपने विभाग के लक्ष्यों के प्रति जवाबदेह है और किसी भी प्रकार की शिथिलता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस बैठक के माध्यम से कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया है कि सतना जिले में विकास और जनसुविधाओं से जुड़ी योजनाओं के क्रियान्वयन में अब सख्ती बरती जाएगी। आने वाले दिनों में इन सभी बिंदुओं पर की गई कार्रवाई की समीक्षा फिर से की जाएगी। प्रशासन का यह कदम न केवल किसानों के लिए बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है।

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