सतना जिले में राजस्व प्रशासन को अधिक चुस्त-दुरुस्त और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। अपर कलेक्टर विकास सिंह की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जिले की सभी तहसीलों और अनुभागों के पीठासीन अधिकारियों, रीडरों तथा राजस्व शाखाओं के प्रमुख कर्मचारियों ने भाग लिया। बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की स्थिति, उनका गुणवत्तापूर्ण निराकरण और अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करना था। अपर कलेक्टर ने बैठक में उपस्थित सभी अधिकारियों को शासन की मंशानुरूप राजस्व कार्यों को प्रभावी ढंग से निष्पादित करने के लिए कड़े निर्देश दिए हैं।

बैठक में अधिकारियों की उपस्थिति

इस विस्तृत समीक्षा बैठक में जिले के प्रशासनिक नेतृत्व का एक बड़ा हिस्सा उपस्थित रहा। अपर कलेक्टर विकास सिंह के साथ बैठक में एसडीएम राहुल सिलाडिया, एल.आर. जांगड़े और सुभाष मिश्रा सहित जिले भर के तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व शाखाओं के जिम्मेदार अधिकारी-कर्मचारी शामिल हुए। बैठक की शुरुआत में अपर कलेक्टर ने अनुभाग और तहसील स्तर पर राजस्व कार्यों की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली।

राजस्व प्रकरणों की प्रगति की गहन समीक्षा

बैठक के दौरान अपर कलेक्टर विकास सिंह ने एक-एक कर राजस्व न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की समीक्षा की। उन्होंने इस बात पर विशेष ध्यान दिलाया कि आम नागरिकों के राजस्व संबंधी कार्य समय-सीमा के भीतर पूर्ण होने चाहिए।

  • लंबित मामलों का त्वरित निपटारा: अपर कलेक्टर ने सभी पीठासीन अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे अपने न्यायालयों में लंबित राजस्व प्रकरणों का वर्गीकरण करें और उन्हें शीघ्रता से निपटाने के लिए प्राथमिकता तय करें।

  • गुणवत्तापूर्ण निराकरण: उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रकरणों का निराकरण केवल संख्या बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि पूरी गुणवत्ता और कानूनी स्पष्टता के साथ होना चाहिए, ताकि भविष्य में अनावश्यक अपील या पुनरीक्षण की स्थिति उत्पन्न न हो।

  • समय-सीमा का पालन: राजस्व मामलों में देरी आम आदमी के लिए परेशानी का कारण बनती है, इसलिए प्रत्येक स्तर पर निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।

अभिलेखों का सुव्यवस्थित संधारण

राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली में अभिलेखों (Records) का संधारण सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। अपर कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि:

  • सभी तहसीलों और अनुभागों में राजस्व अभिलेखों का संधारण आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति से हो।

  • अभिलेखों में किसी भी प्रकार की त्रुटि या अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह भविष्य में स्वामित्व संबंधी विवादों का आधार बन सकती है।

  • डिजिटल रिकॉर्ड्स और भौतिक रिकॉर्ड्स का मिलान नियमित अंतराल पर किया जाना चाहिए ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

पारदर्शिता एवं जवाबदेही पर विशेष बल

अपर कलेक्टर ने बैठक में शासन की नीतियों का जिक्र करते हुए कहा कि राजस्व प्रशासन का मुख्य उद्देश्य जनता को सहज और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराना है। इस दौरान उन्होंने निम्नलिखित बिंदुओं पर बल दिया:

  1. जवाबदेही सुनिश्चित करना: प्रत्येक मामले के निराकरण के लिए पीठासीन अधिकारी से लेकर रीडर तक की भूमिका स्पष्ट होनी चाहिए। यदि किसी स्तर पर बिना कारण देरी होती है, तो उसके लिए संबंधित अधिकारी जवाबदेह होगा।

  2. पारदर्शी प्रक्रिया: राजस्व न्यायालयों में होने वाली सुनवाई और पारित किए गए आदेशों में पूरी पारदर्शिता होनी चाहिए। नागरिकों को उनके प्रकरण की स्थिति की जानकारी समय पर उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

  3. शासन के निर्देशों का अनुपालन: बैठक में सभी अधिकारियों को स्मरण कराया गया कि शासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए सर्कुलर और दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन अनिवार्य है।

अधिकारियों को प्रभावी दिशा-निर्देश

बैठक के समापन पर अपर कलेक्टर विकास सिंह ने सभी अधिकारियों को प्रोत्साहित किया कि वे राजस्व प्रशासन की छवि को बेहतर बनाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करें। उन्होंने निर्देशित किया कि:

  • क्षेत्रीय स्तर पर जनसुनवाई में प्राप्त होने वाली राजस्व शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करें।

  • नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन और आरसीएमएस (RCMS) पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों की दैनिक मॉनिटरिंग करें।

  • अधिकारियों को फील्ड में जाकर राजस्व संबंधी समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि तहसील कार्यालयों पर अनावश्यक बोझ कम हो सके।

निष्कर्ष और भविष्य की कार्ययोजना

सतना जिले में आयोजित यह समीक्षा बैठक राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने की एक बड़ी कवायद है। अपर कलेक्टर विकास सिंह का कड़ा रुख यह दर्शाता है कि प्रशासन अब लंबित मामलों को लेकर कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं करेगा। सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदारों ने भरोसा दिलाया है कि वे आगामी समीक्षा बैठक तक लंबित प्रकरणों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाएंगे।

राजस्व कार्यों में इस तरह की नियमित मॉनिटरिंग न केवल प्रशासनिक कुशलता को बढ़ाती है, बल्कि आम नागरिकों के लिए भी न्याय प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाती है। जिले के सभी राजस्व अधिकारियों को दी गई यह दिशा-निर्देशों की श्रृंखला निश्चित रूप से सतना जिले के राजस्व विभाग को और अधिक गति प्रदान करेगी।

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