आधुनिक कृषि के युग में खेती की पारंपरिक पद्धतियों में सुधार लाना समय की मुख्य मांग बन गया है। मध्य प्रदेश का सतना जिला, कृषि क्षेत्र में नवाचारों को अपनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में, खरीफ 2026 सीजन की तैयारी के दौरान धान की खेती को अधिक लाभकारी और सुलभ बनाने के लिए 'डीएसआर' (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है। सतना जिले के जनपद उचेहरा के ग्राम मझगवां में 3 जून 2026 को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस की गरिमामयी उपस्थिति में इस उन्नत तकनीक का सीधा प्रदर्शन किया गया, जिसका उद्देश्य स्थानीय किसानों को आधुनिक खेती की बारीकियों से परिचित कराना था।

डीएसआर तकनीक और मल्टीक्रॉप प्लांटर का प्रदर्शन

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण डीएसआर विधि से धान की बुवाई का प्रत्यक्ष प्रदर्शन रहा। इस विधि में धान की रोपाई के पारंपरिक और श्रमसाध्य कार्यों के बजाय सीधे बुवाई पर ध्यान केंद्रित किया जाता है, जिससे जल की खपत कम होती है और पैदावार में सुधार की संभावनाएं बढ़ती हैं। कार्यक्रम के दौरान 'मल्टीक्रॉप प्लांटर' मशीन की कार्यप्रणाली का अवलोकन किया गया।

कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने स्वयं इस यंत्र की बारीकियों को समझा और अधिकारियों से इसके संचालन की विस्तृत जानकारी ली। उपस्थित कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि यह मल्टीक्रॉप प्लांटर किसानों के लिए एक क्रांतिकारी यंत्र साबित हो सकता है। इस यंत्र की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • बहुउद्देशीय उपयोग: यह मशीन न केवल धान की बुवाई में सक्षम है, बल्कि इसे अन्य फसलों के लिए भी सफलतापूर्वक उपयोग में लाया जा सकता है।

  • वैज्ञानिक बुवाई: इस यंत्र की सहायता से पौध से पौध और कतार से कतार की दूरी को बिल्कुल सटीक रखा जा सकता है, जो फसल के उचित विकास के लिए आवश्यक है।

  • सीडकम फर्टिलाइजर ड्रिल: यह मशीन बीज और उर्वरक (खाद) को एक साथ निर्धारित गहराई पर डालने का कार्य करती है, जिससे खाद की बर्बादी कम होती है और पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है।

  • बहुआयामी अटैचमेंट: आवश्यकतानुसार इसमें मल्टीक्रॉप प्लांटिंग एवं रेज्ड बेड अटैचमेंट भी जोड़े जा सकते हैं, जिससे एक ही यंत्र का लाभ विभिन्न परिस्थितियों में लिया जा सकता है।

किसानों को मिली महत्वपूर्ण सलाह

कार्यक्रम के माध्यम से कलेक्टर ने किसानों को शासकीय अनुदान पर उपलब्ध इन आधुनिक बुवाई यंत्रों का लाभ उठाने की पुरजोर सलाह दी। उन्होंने कहा कि खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए तकनीक का सहारा लेना अनिवार्य है। किसानों को यह समझाया गया कि कैसे पारंपरिक विधि में जो समस्याएं आती हैं, उनका समाधान यह यंत्र कर सकता है।

इसके अलावा, कार्यक्रम में खरपतवार नियंत्रण पर भी विशेष सत्र रखा गया। डीएसआर विधि में खरपतवार की समस्या एक मुख्य चुनौती होती है, जिसके निराकरण के लिए विशेषज्ञों ने किसानों को प्रभावी तकनीकों और दवाओं के सही समय पर उपयोग का मार्गदर्शन दिया। कलेक्टर ने किसानों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि शासन की मंशा है कि हर छोटे-बड़े किसान तक ये यंत्र पहुंचें ताकि कृषि लागत कम हो और मुनाफा बढ़े।

कृषि यंत्रीकरण और भविष्य की दिशा

कार्यक्रम के अंत में सहायक कृषि यंत्री सतना ने विस्तार से बताया कि कैसे विभाग लगातार आधुनिक कृषि तकनीकों का प्रचार-प्रसार कर रहा है। उनका कहना था कि सतना जिले के किसान अब जागरूक हो रहे हैं और वे नई तकनीकों को अपनाने में पीछे नहीं हैं। विभाग का लक्ष्य है कि जिले के प्रत्येक विकासखंड में ऐसी प्रदर्शनियां आयोजित की जाएं ताकि अधिक से अधिक किसान डीएसआर और मल्टीक्रॉप प्लांटिंग जैसे नवाचारों को देख सकें और उन्हें अपना सकें।

डीएसआर विधि के लाभ

इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों के मन में पनप रहे कई संदेहों का भी निवारण हुआ। डीएसआर विधि के लाभों पर चर्चा करते हुए बताया गया कि:

  1. यह विधि रोपाई वाली धान की तुलना में जल की बचत करने में सहायक है।

  2. इससे श्रम की लागत कम होती है क्योंकि नर्सरी तैयार करने और रोपाई करने के झंझट से मुक्ति मिलती है।

  3. फसल की जड़ें अधिक गहराई तक जाती हैं, जिससे सूखा झेलने की क्षमता बढ़ती है।

निष्कर्ष

सतना जिले का यह प्रयास निश्चित रूप से सराहनीय है। जब प्रशासनिक स्तर पर जिला प्रमुख स्वयं किसानों के बीच जाकर नई तकनीक का प्रदर्शन देखते हैं, तो इससे किसानों का मनोबल बढ़ता है। उचेहरा का यह कार्यक्रम केवल एक प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह भविष्य की उन्नत कृषि का एक मार्गदर्शक था। आने वाले दिनों में यह देखा जाना सुखद होगा कि सतना जिले के किसान इस तकनीक को कितनी व्यापकता से स्वीकार करते हैं। यदि इस तरह के प्रयासों को निरंतर जारी रखा गया, तो निश्चित रूप से सतना जिले के धान उत्पादक किसान उन्नत खेती की दिशा में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे।

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