आमला ।अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) आमला श्री शैलेन्द्र बड़ौनियाँ की सक्रिय पहल से एक दिव्यांग व्यक्ति को उसका बकाया भुगतान दिलाया गया। आपसी राजीनामा होने के बावजूद दूसरा पक्ष तय राशि देने में लगातार टालमटोल कर रहा था, जिसके बाद मामला प्रशासन के संज्ञान में पहुंचा और त्वरित हस्तक्षेप से पीड़ित को राहत मिली।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मालेगांव निवासी रघुराज पिता मेहतू पाल एवं संतोष पिता मेहतू पाल आपस में सगे भाई हैं। दोनों के बीच खानदानी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। मामला इतना बढ़ गया था कि दोनों पक्षों द्वारा इसकी शिकायत जिला कलेक्टर बैतूल तक पहुंचाई गई थी।
बाद में दोनों पक्षों के बीच आपसी सहमति से राजीनामा हुआ, जिसमें यह तय किया गया था कि रघुराज पाल, संतोष पाल को 70 हजार रुपये दो किस्तों में अदा करेगा। इसके साथ ही भूमि संबंधी कुछ शर्तें भी आपसी सहमति से निर्धारित की गई थीं।
हालांकि समझौता होने के बाद भी तय शर्तों के अनुरूप राशि का भुगतान नहीं किया जा रहा था, जिससे दिव्यांग व्यक्ति को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। मामला जब एसडीएम आमला श्री शैलेन्द्र बड़ौनियाँ के समक्ष पहुंचा, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल हस्तक्षेप किया।
*एसडीएम के हस्तक्षेप से तत्काल मिला भुगतान*
एसडीएम श्री बड़ौनियाँ की पहल और सख्ती के बाद संबंधित पक्ष से नगद 70 हजार रुपये का भुगतान करवाया गया। प्रशासन की इस सक्रियता से पीड़ित दिव्यांग व्यक्ति को समय पर न्याय और राहत मिल सकी।
इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में प्रशासन की संवेदनशीलता और तत्परता की सराहना की जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में यदि प्रशासन इसी प्रकार सक्रियता दिखाए, तो कई जरूरतमंदों को शीघ्र राहत मिल सकती है।
*प्रशासन ने दी सख्त चेतावनी*
एसडीएम शैलेन्द्र बड़ौनियाँ ने स्पष्ट किया है कि आपसी समझौते या राजीनामा के बाद यदि कोई पक्ष तय शर्तों का पालन नहीं करता, तो उसके विरुद्ध आवश्यक वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन कमजोर, पीड़ित और जरूरतमंद लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
एसडीएम की इस पहल से न केवल एक दिव्यांग व्यक्ति को उसका अधिकार मिला, बल्कि यह भी संदेश गया है कि समझौते के बाद वादाखिलाफी करने वालों को अब प्रशासनिक सख्ती का सामना करना पड़ेगा।

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