आमला (बैतूल)। अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा आमला के बैनर तले आमला विकासखंड के शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के खिलाफ जोरदार आवाज उठाते हुए प्रधानमंत्री, केंद्रीय शिक्षा मंत्री एवं मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित किया है। ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने इस प्रावधान को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने तथा संबंधित नियमों में संशोधन करने की मांग की है।

शिक्षकों ने अपने ज्ञापन में स्पष्ट किया कि हाल ही में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद प्रदेश में कार्यरत शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता लागू किए जाने की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिससे वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के सामने अस्थिरता और असुरक्षा की स्थिति उत्पन्न हो गई है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत शिक्षक अपने अनुभव, प्रशिक्षण एवं समर्पण के आधार पर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर रहे हैं, ऐसे में अचानक इस प्रकार की अनिवार्यता थोपना न्यायसंगत नहीं है।

मोर्चा ने कहा कि वर्ष 2010 में लागू शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act) के तहत टीईटी की अनिवार्यता जोड़ी गई थी, लेकिन इसे पूर्व से कार्यरत शिक्षकों पर लागू करना न केवल अनुचित है, बल्कि उनके अधिकारों का हनन भी है। शिक्षकों का वर्षों का अनुभव, स्थानीय भाषा एवं सामाजिक परिस्थितियों की समझ ही शिक्षा व्यवस्था की वास्तविक मजबूती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान परिस्थितियों में टीईटी की अनिवार्यता लागू होने से हजारों शिक्षकों के भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। यदि समय रहते इस विषय में निर्णय नहीं लिया गया, तो इसका सीधा असर शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और स्थिरता पर पड़ेगा।

शिक्षक संयुक्त मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि आरटीई एक्ट के संबंधित प्रावधानों में आवश्यक संशोधन कर कार्यरत शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से पूर्णतः मुक्त किया जाए। साथ ही, यदि आवश्यक हो तो केंद्र सरकार द्वारा अध्यादेश (Ordinance) लाकर इस विषय में तत्काल राहत प्रदान की जाए, ताकि शिक्षकों के हितों की रक्षा हो सके।

इसके अतिरिक्त ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि मध्यप्रदेश के शैक्षणिक संवर्ग के शिक्षकों की सेवा अवधि की गणना उनकी प्रथम नियुक्ति दिनांक से की जाए तथा उन्हें सेवानिवृत्ति (टर्मिनल) लाभों का पूर्ण अधिकार दिया जाए।

शिक्षकों ने अपने ज्ञापन के अंत में विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार इस गंभीर एवं संवेदनशील विषय पर सकारात्मक पहल करेगी, जिससे हजारों शिक्षकों को न्याय मिलेगा और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी।