मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में ग्रामीण विकास, अधोसंरचना निर्माण और जनहित से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक का आयोजन किया गया। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी की अध्यक्षता में गुरुवार को विदिशा जिला पंचायत सभागार में जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक संपन्न हुई। इस महत्वपूर्ण बैठक में विदिशा जिला पंचायत के उपाध्यक्ष, सभी सम्मानित सदस्यगण तथा विभिन्न प्रमुख विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा पूर्व में आयोजित बैठकों के निर्णयों के अनुपालन की समीक्षा करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, पेयजल व्यवस्थाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्यान्न वितरण प्रणालियों की मैदानी स्थिति का जायजा लेना था।
बैठक का मुख्य आकर्षण: नल-जल योजनाओं से क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत पर कड़ा रुख
बैठक के दौरान सबसे गंभीर और प्रमुख चर्चा का विषय ग्रामीण क्षेत्रों में नल-जल योजनाओं के निर्माण कार्यों के दौरान सड़कों की वर्तमान स्थिति और उनकी मरम्मत में हो रही घोर लापरवाही रहा। जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी ने इस मुद्दे पर अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों को स्पष्ट और दो-ूक शब्दों में निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नल-जल योजनाओं के तहत पाइपलाइन बिछाने अथवा अन्य तकनीकी और निर्माण कार्यों के कारण ग्रामीण अंचलों में जो सड़कें खोदी गई हैं, उनकी समय पर मरम्मत न होना अत्यंत आपत्तिजनक है।
अध्यक्ष का कड़ा निर्देश: श्रीमती रघुवंशी ने निर्देश दिए कि जिन-जिन स्थानों पर पाइपलाइन बिछाने या अन्य कार्यों के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं, उनकी मरम्मत निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरी कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि किसी भी विभाग, एजेंसी या ठेकेदार द्वारा इस महत्वपूर्ण कार्य में लापरवाही या हीला-हवाली बरती जाती है, तो उनके विरुद्ध तत्काल पुलिस थाने में एफआईआर (प्रथम सूचना रिपोर्ट) दर्ज कराने की सख्त कार्रवाई की जाए।
अध्यक्ष के इस कड़े निर्देश से प्रशासनिक अमले में पूरी तरह हड़कंप मच गया है, क्योंकि ग्रामीण सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से आम नागरिकों और ग्रामीण जनों को आवागमन में भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहभागिता और शासकीय कार्यक्रमों की सूचना पर विशेष जोर
ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले शासकीय कार्यक्रमों और आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा या उन्हें समय पर सूचना न मिलने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष ने प्रशासनिक अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि:
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ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित होने वाले सभी प्रकार के शासकीय कार्यक्रमों और समारोहों की आधिकारिक सूचना संबंधित क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्यों एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों को समय पर दी जाए।
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जनप्रतिनिधियों को हर कार्यक्रम में पूरी प्रतिष्ठा और सम्मान के साथ आमंत्रित किया जाए ताकि उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित हो सके।
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जनप्रतिनिधियों की सहभागिता से न केवल योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच बेहतर और मजबूत समन्वय भी स्थापित होगा।
पूर्व निर्णयों का अनुपालन और विभागवार नवीन एजेंडे की गहन समीक्षा
बैठक की शुरुआत में पिछली सामान्य सभा की बैठक में लिए गए विभिन्न नीतिगत निर्णयों के अनुपालन प्रतिवेदन को सदन के पटल पर प्रस्तुत किया गया। उपस्थित सदस्यों ने इस प्रतिवेदन पर विस्तार से चर्चा की और अपने-अपने क्षेत्रों की जमीनी वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए कई महत्वपूर्ण और रचनात्मक सुझाव दिए। इसके पश्चात नवीन एजेंडे के विभिन्न बिंदुओं पर विभागवार गहन समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान निम्नलिखित प्रमुख बिन्दुओं पर विचार-विमर्श हुआ:
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ग्रामीण विकास कार्यों की अद्यतन प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा और विलंब से चल रहे कार्यों को गति देने के निर्देश।
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शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी और महत्वाकांक्षी योजनाओं के मैदानी क्रियान्वयन की स्थिति की मॉनिटरिंग।
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पंचायत स्तर पर आम नागरिकों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाई जा रही समस्याओं का समयबद्ध और त्वरित निराकरण।
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पेयजल व्यवस्थाओं के सुचारू संचालन के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और खाद्यान्न वितरण प्रणालियों की जमीनी हकीकत का आकलन।
जिला पंचायत सीईओ श्री ओपी सनोडिया के निर्देश एवं नए पेयजल प्रावधान
बैठक के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) श्री ओपी सनोडिया ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को कड़े निर्देश देते हुए कहा कि सामान्य सभा की इस बैठक में जितने भी नीतिगत निर्णय लिए गए हैं, उन्हें एक निश्चित समय-सीमा के भीतर शत-प्रतिशत पूर्ण कराया जाए। उन्होंने सदन को अवगत कराते हुए एक महत्वपूर्ण जानकारी दी कि शासन के नए प्रावधानों के तहत अब भविष्य में पेयजल संबंधी सभी नए कार्य संबंधित ग्राम पंचायतों के माध्यम से ही संपादित किए जाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व के जो भी पेयजल संबंधी कार्य या अधूरी परियोजनाएं लंबित हैं, उन्हें पूरा करने की जिम्मेदारी पूर्व संबंधित विभाग या एजेंसी की ही रहेगी, जिसे वे समय पर पूरा करें।
शिक्षा और छात्रावास संचालन के संबंध में कड़े दिशा-निर्देश
बैठक के अंत में ग्रामीण अंचलों में शिक्षा की गुणवत्ता और छात्र-छात्राओं के कल्याण से जुड़े मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा की गई। विदिशा जिले के भीतर संचालित शैक्षणिक संस्थानों और आवासीय परिसरों को लेकर निम्नलिखित विशेष निर्देश जारी किए गए:
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पेयजल व्यवस्थाओं के साथ-साथ जिले की शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और सार्वजनिक खाद्यान्न वितरण व्यवस्थाओं की नियमित मॉनिटरिंग की जाए।
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जिले के जिला उत्कृष्ट विद्यालय (Excellence School), मॉडल स्कूल, 200 सीटर बालिका छात्रावास तथा दिव्यांग छात्रावासों के सुचारू संचालन के लिए निर्धारित संचालन निर्देशिका (Guidelines) का पूरी कड़ाई के साथ पालन करने के निर्देश दिए गए।
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यह विशेष निर्देश दिए गए हैं कि जिला उत्कृष्ट विद्यालय, मॉडल स्कूल तथा राज्य बजट के माध्यम से संचालित होने वाले सभी बालक एवं बालिका छात्रावासों में नियमों का पालन सुनिश्चित हो, और ये निर्देश विशेष रूप से कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों के संचालन हेतु प्रभावी होंगे।
अंत में, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती गीता कैलाश रघुवंशी ने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि शासन की लोक-कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता और समय पर पहुंचना चाहिए। विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की उदासीनता या कोताही को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक का मूल उद्देश्य ग्रामीण विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करना, विभिन्न विभागों के बीच आपसी समन्वय को सुदृढ़ बनाना और जनहित से जुड़े हर कार्य को गति प्रदान करना रहा।
image source: https://vidisha.mpinfo.org
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