विदिशा। प्राकृतिक आपदाएं जब भी आती हैं, तो वे अपने साथ अपार जन-धन की हानि की संभावना लेकर आती हैं। ऐसे कठिन समय में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका स्थानीय स्तर पर काम करने वाले प्रशासनिक तंत्र की होती है। इसी दिशा में एक सराहनीय पहल करते हुए विदिशा जिला प्रशासन द्वारा ग्राम स्तर के सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने का निर्णय लिया गया है। कलेक्टर श्री अंशुल गुप्ता के विशेष निर्देशानुसार और जिला होमगार्ड सेनानी श्री मयंक कुमार जैन के कुशल मार्गदर्शन में, विदिशा जिले की शमशाबाद तहसील कार्यालय परिसर में बुधवार को कोटवारों के लिए एक विशेष आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ग्राम स्तर के प्रहरी कहे जाने वाले कोटवारों को आपदाओं के प्रति न केवल जागरूक बनाना था, बल्कि उन्हें व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित कर एक 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' (प्रथम सहायता प्रदाता) के रूप में तैयार करना था। यह कार्यक्रम इस दृष्टिकोण पर आधारित था कि यदि ग्राम स्तर पर ही आपदा की प्रारंभिक सूचना और बचाव कार्य शुरू कर दिए जाएं, तो नुकसान को न्यूनतम किया जा सकता है।

शमशाबाद में कोटवारों को मिला आपदा सुरक्षा का मंत्र

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आपदा आने पर घबराहट सबसे बड़ी दुश्मन होती है। यदि कोटवार, जो कि गाँव की हर गतिविधि से वाकिफ होते हैं, सही समय पर सही निर्णय लें, तो वे कई बहुमूल्य जिंदगियां बचा सकते हैं। प्रशिक्षण सत्र को कई मुख्य भागों में विभाजित किया गया था, जिनमें निम्नलिखित प्रमुख आपदाओं पर चर्चा की गई:

  • बाढ़ से बचाव एवं राहत कार्य: विदिशा जिले में कई क्षेत्र ऐसे हैं जो वर्षाकाल के दौरान जलभराव की समस्या से जूझते हैं। कोटवारों को सिखाया गया कि बाढ़ की स्थिति में किस प्रकार स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके सुरक्षित स्थानों तक लोगों और पशुओं को पहुँचाया जाए। बाढ़ के दौरान डूबने की घटनाओं को रोकने और बचाव सामग्री के उपयोग पर विशेष जानकारी दी गई।

  • सर्पदंश (Snake Bite) का प्राथमिक उपचार: ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। प्रशिक्षण में बताया गया कि सर्पदंश होने पर घबराने के बजाय रोगी को कैसे शांत रखा जाए, प्रभावित अंग को स्थिर कैसे रखें और बिना देरी किए उसे अस्पताल तक कैसे पहुँचाया जाए। अंधविश्वासों से दूर रहने और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेने का संदेश दिया गया।

  • अग्नि सुरक्षा और सावधानी: घरों में आग लगने या फसल में आग लगने की स्थिति में क्या करें, इस पर विस्तार से चर्चा हुई। आग बुझाने के प्राथमिक तरीकों और अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के उपायों के बारे में बताया गया।

  • आकाशीय बिजली (Lightning) से सुरक्षा: वर्षाकाल में आकाशीय बिजली गिरना एक बड़ी चुनौती होती है। विशेष रूप से खेतों में काम करने वाले किसानों को इससे बचने के लिए क्या सलाह देनी चाहिए, इसका प्रशिक्षण कोटवारों को दिया गया। खुले मैदान में या पेड़ों के नीचे शरण लेने के खतरों के प्रति आगाह किया गया।

  • फर्स्ट एड (प्राथमिक उपचार): किसी भी प्रकार की चोट या आकस्मिक घटना में चिकित्सकीय मदद पहुँचने से पहले जो प्राथमिक उपचार दिया जाना चाहिए, उसका व्यावहारिक प्रदर्शन किया गया। पट्टियों का सही उपयोग और घायल को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने की तकनीकों पर जोर दिया गया।

विदिशा प्रशासन की दूरदर्शी सोच

विदिशा जिले में इस प्रकार के प्रशिक्षण का आयोजन प्रशासन की दूरदर्शिता को दर्शाता है। एक कोटवार अपने गाँव की नब्ज पहचानता है। वह गाँव का ऐसा व्यक्ति होता है जिसे हर घर की जानकारी होती है। यदि उसे आपदा प्रबंधन का तकनीकी ज्ञान मिल जाए, तो वह प्रशासन की 'आँख और कान' बनकर काम कर सकता है।

प्रशिक्षण के दौरान कोटवारों को यह निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने गाँवों में वापस जाकर इन जानकारियों को ग्रामीणों के साथ साझा करें। उन्हें स्थानीय स्तर पर जोखिम वाले क्षेत्रों (जैसे- पुराने जर्जर मकान, जलभराव वाले क्षेत्र, ऊँचे पेड़ आदि) की पहचान करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। उन्हें यह भी समझाया गया कि किसी भी संभावित आपदा की पूर्व सूचना तत्काल तहसीलदार या जिला प्रशासन के नियंत्रण कक्ष तक पहुँचाना उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए।

एसडीआरएफ टीम द्वारा तकनीकी प्रशिक्षण

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफल बनाने में एसडीआरएफ (SDRF) विदिशा की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। टीम के प्रभारी एएसआई लक्ष्मी विश्वकर्मा के नेतृत्व में, सैनिक संदीप, देवेंद्र कटोरिया और संजय ने कोटवारों को तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया।

एसडीआरएफ के जवानों ने न केवल सैद्धांतिक जानकारी दी, बल्कि उपकरणों के माध्यम से बचाव कार्य का डेमो भी प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि किस तरह कम संसाधनों में भी जान बचाई जा सकती है। कोटवारों ने भी पूरी तत्परता के साथ इन तकनीकों को सीखा। कई प्रतिभागियों ने अपने गाँवों की विशिष्ट भौगोलिक परिस्थितियों के बारे में प्रश्न पूछे, जिसका समाधान विशेषज्ञों ने दिया।

इस प्रकार के प्रशिक्षण से न केवल कोटवारों का आत्मविश्वास बढ़ा है, बल्कि ग्राम स्तर पर आपदा से निपटने के लिए एक नई सुरक्षा पंक्ति तैयार हुई है। विदिशा जिला प्रशासन का यह प्रयास अन्य जिलों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है, जहाँ कोटवार जैसे जमीनी स्तर के कर्मचारियों को आपदा सुरक्षा का प्रहरी बनाया गया है।

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