आमला। रमजान के पाक महीने में जहां बड़े-बुजुर्ग इबादत में मशगूल हैं, वहीं नन्हें बच्चों में भी रोजा रखने का जज़्बा देखने को मिल रहा है। आमला शहर की महज़ 6 वर्षीय नन्हीं बच्ची रूही मेमन ने रोजा रखकर सभी का दिल जीत लिया।

रूही ने पूरे दिन इबादत में समय बिताया और पूरे सब्र व अनुशासन के साथ अपना रोजा मुकम्मल किया। इतनी कम उम्र में उनकी यह लगन और आस्था लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है।

रूही ने बताया कि उन्होंने रोजा रखकर सभी धर्मों के लोगों के लिए अमन, शांति और भाईचारे की दुआ मांगी। उनकी यह सोच समाज में सौहार्द और एकता का सुंदर संदेश देती है।

रूही मेमन, प्रेस क्लब ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट आमला के अध्यक्ष मोहम्मद आसीफ लंघा के छोटे भाई शोएब मेमन की पुत्री हैं। परिवार में धार्मिक और संस्कारों से भरे वातावरण के कारण रूही ने छोटी उम्र में ही रोजे की अहमियत को समझते हुए इसे पूरी निष्ठा के साथ निभाया।

परिजनों के अनुसार रूही ने बिना किसी कठिनाई के रोजा पूरा किया और पूरे दिन संयम व अनुशासन बनाए रखा। उनकी इस भावना ने परिवार के साथ-साथ पूरे क्षेत्र के लोगों को भी भावुक कर दिया।

उल्लेखनीय है कि रमजान का महीना इबादत, सब्र और आत्मसंयम का प्रतीक है। इस दौरान रखा जाने वाला रोजा इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है, जो इंसान को अनुशासन और इंसानियत की राह पर चलने की सीख देता है। कम उम्र में बच्चों का इस तरह इबादत के प्रति समर्पण, परिवार से मिले संस्कारों का जीवंत उदाहरण है।