रहली विधानसभा क्षेत्र में राजनीतिक घमासान हुआ तेज,
पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति पटैल के भाई पर एक दलित युवक के साथ मारपीट का लगा आरोप।
मात्र दस रुपये के लेन–देन में कांग्रेस भाजपा मैदान, छोटे से विवाद ने लिया राजनीतिक रंग।
मध्यप्रदेश के सागर जिले की रहली विधानसभा इस समय होने वाली घटनाओं के राजनीतीकरण के कारण सुर्ख़ियों में है।
बीते एक वर्ष में रहली विधानसभा में दलितों और समाज विशेष से जुड़ी घटनाओं ने हर बार राजनैतिक रंग लिया है।
बीते रोज भी दलित के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने
रहली थाना परिसर में धरना–प्रदर्शन किया
और पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को वापस लेने की मांग करने लगे।
कांग्रेस नेताओं ने इस दौरान
भाजपा और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए।
सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात है कि रहली विधानसभा के विधायक एवं पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव के खिलाफ़ नारेबाजी, मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ़ नारेबाजी इन सब बातों ने आज कांग्रेस को राजनीति के कटघरे में खड़ा कर दिया है।
भाजपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस
इस घटना के बाद भाजपा की ओर से युवा भाजपा नेता अभिषेक भार्गव ने विधानसभा के तीन पूर्व कांग्रेस प्रत्याशियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि इन तीनों या इनके रिश्तेदारों सगे संबंधियों के द्वारा बीते कई वर्षों में दलितों के साथ कई घटनाओं को अंजाम दिया गया है जिनमे मारपीट जातिगत शोषण एवं आर्थिक शोषण जैसे मामले शामिल है।
पूरे मामले बाकायदा रजिस्टर्ड है।
उन्होंने कहा कि हमने तो बचपन में एक कहावत सुनी थी, बल्कि दो कहावतें सुनी थीं—
एक थी “उल्टा चोर कोतवाल को डाँटे” और दूसरी “चोरी ऊपर से सीनाजोरी”।
ये दोनों कहावतें हमने जब सुनी थीं, उनका प्रत्यक्ष उदाहरण हम आज देख रहे हैं।
बीते रोज से मीडिया में चल रही खबरों और सभी मीडिया के साथियों के माध्यम से हमें जानकारी मिली कि यहाँ एक घटना हुई थी, जिसमें एक पूर्व प्रत्याशी के भाई ने एक दलित युवक के साथ मारपीट की थी, जिसे वे स्वयं भी स्वीकार कर रहे हैं।
मात्र 10 रुपये के लेन–देन को लेकर, मुझे यह बताया गया कि लगभग दो घंटे तक उस युवक के साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी और वह युवक स्वयं थाने आकर अपनी FIR दर्ज करवा कर गया था।
उसके बाद अगले दिन जब इन लोगों ने यह माहौल बनाया कि पुलिस ने जबरदस्ती FIR करवाई है।
तब मैंने पूरी जानकारी ली, तो यह स्पष्ट हुआ कि जिस युवक के साथ मारपीट हुई थी, वह स्वयं अपनी इच्छा से यहाँ आकर पुलिस के सामने अपनी शिकायत लिखवाकर गया था। पुलिस ने अपना कर्तव्य निभाते हुए उसकी FIR दर्ज की।
जब इन लोगों को यह बात पता चली, तो उन्होंने उस युवक को डराया-धमकाया और यहाँ लाकर पूरा प्रोपेगैंडा खड़ा किया। क्योंकि कल मुख्यमंत्री का भी सागर जिले में आगमन था, इसलिए यह पूरी तरह से सोची-समझी रणनीति के तहत राजनैतिक प्रोपोगेंडा किया गया था।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा की मैं ऐसे सभी लोगों से निवेदन करता हूँ कि इस प्रकार के षड्यंत्र न करें। पुलिस को अपना काम करने दें। न्याय मिलेगा—चाहे वह पीड़ित हो या अपराधी। अगर किसी ने अपराध किया है तो उसे दंड मिलेगा। यह न्यायालय का काम है, न कि हमारा या आपका। किसी पर कोई दबाव बनाकर एफआईआर नहीं करवाई गई है।
जब आप स्वयं स्वीकार कर रहे हैं कि दलित युवक के साथ मात्र 10 रुपये को लेकर मारपीट की गई, और उस युवक के वीडियो भी मैंने देखे हैं जिसमें वह रो-रोकर कह रहा है कि उसके साथ बहुत ज्यादा मारपीट की गई, तो फिर इसमें पुलिस या भारतीय जनता पार्टी का क्या लेना-देना है?
लंबे समय से इन लोगों की आदत बन गई है। ये संपन्न लोग हैं—100-200 एकड़ जमीन के मालिक हैं, पेट्रोल पंप हैं, वेयरहाउस हैं। गरीबों को, दलितों को, आदिवासियों को ये कुछ नहीं समझते। इसी कारण मात्र 10 रुपये के पेट्रोल को लेकर एक दलित युवक को बेरहमी से पीटा गया। उन्हें अंदेशा ही नहीं था कि वह युवक इतनी हिम्मत करके पुलिस तक पहुँच जाएगा। जब यह हुआ तो उन्होंने उसे फिर डराया-धमकाया।
यह पूरा घटनाक्रम है।
मैं पुलिस से भी मांग करूँगा और न्यायालय में भी यही कहूँगा कि उस दलित युवक को न्याय मिले। इसमें भारतीय जनता पार्टी या नेताओं का कोई लेना-देना नहीं है।
एक और घटना हुई, जिसमें एक कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी ने करीब 20 रुपये के लेन-देन पर तीन आदिवासी युवकों के साथ मारपीट की। ये युवक रेहली विधानसभा के नहीं बल्कि शायद पथरिया या बांदा विधानसभा क्षेत्र के थे। किराये को लेकर बस में विवाद हुआ और बस चालक, कंडक्टर और मालिक ने उन्हें होटल-ढाबे पर दो घंटे तक बैठाकर पीटा और बंधक बना लिया। पुलिस आने पर भी मारपीट की गई। बड़ी मुश्किल से पुलिस ने उन्हें बचाया और उनकी FIR दर्ज की।
फिर ये लोग थाने में दबाव बनाने लगे, लेकिन पुलिस ने दबाव नहीं माना और पीड़ितों की FIR दर्ज की। इसमें भाजपा या किसी नेता का क्या लेना-देना?
चांदपुर गांव की घटना में एक दलित युवक की हत्या हुई। मृतक के परिवार ने स्वयं आकर आवेदन दिया कि कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी के रिश्तेदार का इसमें हाथ है। परिवार ने जांच की मांग की।
तो इसमें भाजपा या मुख्यमंत्री कहाँ से आ जाते हैं?
मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूँ कि रहली विधानसभा क्षेत्र में दलितों और आदिवासियों पर अत्याचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे कोई कितना भी बड़ा राजनैतिक ओहदा रखने वाला व्यक्ति क्यों न हो, और किसी भी पार्टी का हो—अगर वह गरीबों पर अत्याचार करेगा दलितों आदिवासियों को किसी भी रूप से प्रताड़ित करेगा तो उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
गरीबों को न्याय दिलाने के लिए हम सब पार्टी और सरकार संकल्पबद्ध हैं।
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