रिपोर्ट राकेश कटारे की खास रिपोर्ट 

सीहोर: स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। भेरूंदा सिविल अस्पताल से आई तस्वीरें स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को उजागर कर रही हैं। आदिवासी समाज ने अस्पताल परिसर में एक महिला की डेड बॉडी रखकर जोरदार प्रदर्शन किया और स्वास्थ्य विभाग पर गंभीर आरोप लगाए।

मामला 12 तारीख का है, जब मृतक शिवानी बरेला पति नवल सिंह की नसबंदी भेरूंदा सिविल अस्पताल में डॉ. रुक्मणी द्वारा की गई थी। ऑपरेशन के बाद शिवानी को घर भेज दिया गया, लेकिन अगले ही दिन उसकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उसे जिला अस्पताल ले गए, जहां से भोपाल के हमीदिया अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान शिवानी की मौत हो गई।

महिला की मौत से आक्रोशित आदिवासी समाज ने अस्पताल पहुंचकर आरोप लगाया कि नसबंदी के दौरान डॉक्टर ने गलत नस काट दी, जिससे शरीर में ज़हर फैल गया और महिला की जान चली गई। पीड़ित परिजनों ने इसे चिकित्सकीय लापरवाही बताते हुए डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग की।

  • डॉ. रुक्मणी को तत्काल वर्खास्त करने की मांग
  • मृतक महिला के तीन मासूम बच्चों को शासन से मुआवजा देने की अपील
  • दोषी डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग

अस्पताल गेट पर हंगामे के चलते पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई। यह घटना न सिर्फ भेरूंदा बल्कि पूरे सीहोर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर बड़ा सवाल खड़ा करती है—आखिर कब तक लापरवाही की कीमत गरीब और आदिवासी महिलाएं, बच्चे, और आम इंसान अपनी जान देकर चुकाते रहेंगे?

प्रतिनिधि वक्तव्य:

  • पीड़ित परिवार के सदस्य
  • राजेश बकोरिया, सरपंच
  • संतोष गौर, कांग्रेस नेता
  • डॉक्टर प्रफुल हेडाऊ, मेडिकल प्रभारी
  • सुधीर कुशवाहा, एसडीम भैरूंदा