पांडवन पवित्र मेला: महाभारत के पौराणिक स्थल पर आस्था का संगम

ललितपुर, उत्तर प्रदेश: महाभारत की कहानियों में वर्णित पांडवों के वनवास का एक अनमोल अध्याय उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले और मध्य प्रदेश की सीमा पर बसे पटना पारोल में जीवंत होता है। यहां हर वर्ष मकर संक्रांति पर पांडवन पवित्र मेला का आयोजन होता है, जो पांडवों के साक्ष्य और आस्था का प्रतीक माना जाता है।

महाभारत के अनुसार, जब पांचों पांडव एवं माता कुंती अपने अज्ञातवास के दौरान लाक्षागृह में ठहरे थे, तब दुर्योधन और शकुनि ने उन्हें मारने के लिए उसमें आग लगवा दी थी। लेकिन पांडवों ने अपनी चतुराई से एक सुरंग के माध्यम से वहां से सुरक्षित निकलने का उपाय खोजा। इसी तरह, ललितपुर और सागर के जंगलों में उन्होंने शरण ली थी।

इस स्थान पर एक छोटा सा सरोवर भी स्थित है, जिसकी गहराई मात्र छह इंच और लंबाई तीन फीट है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सरोवर का जल कभी खत्म नहीं होता है, चाहे कितने भी श्रद्धालु इसका जल पी लें या इसे घर ले जाएं।

आस्था और आस्था का संगम:

  • पांच दिवसीय मेले का आयोजन हर वर्ष मकर संक्रांति पर होता है।
  • यह मेला पांच पांडवों के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
  • जंगल में सड़कें ना होने के कारण श्रद्धालु पैदल, ट्रैक्टर या मोटरसाइकिल से यहां पहुंचते हैं।

इस धार्मिक आयोजन में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है, जो अपनी आस्था और पांडवों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने यहां पहुंचते हैं। हर साल इस पवित्र मेले में हजारों श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं, जिससे यहां की पौराणिकता और धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।

रिपोर्ट: प्रतिपाल राजपूत